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चीनी के बोरों में दबकर ऑटो ड्राइवर की मौत

by Inextlive

Wed 11-Oct-2017 07:00:36

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JAMSHEDPUR: परसुडीह कृषि बाजार समिति कैंपस में मंगलवार को दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। चीनी के बोरों से दबकर एक ऑटो ड्राइवर की मौत हो गई। घटना प्रिंस स्टोर में घटी। जानकारी के मुताबिक यहां काम कर रहे ऑटो ड्राइवर रामाशंकर सिंह उर्फ मंटन सिंह (ख्7 वर्ष) ऑटो पर लोड करने के लिए चीनी के बोरे उतार रहा था। इस दौरान एक- एक करके कई बोरे उसके ऊपर गिर गए घटना अचानक हुई और ऑटो ड्राइवर को बचाने का मौका तक नहीं मिला।

कीताडीह का था रहनेवाला

रामाशंकर सिंह कीताडीह ग्वालापट्टी का रहने वाला था। घटना मंगलवार की दोपहर पौने क्ख् बजे की है। मृतक के भाई रंजन सिंह ने बताया कि रामाशंकर पिछले चार साल से परसुडीह मंडी स्थित प्रिंस स्टोर के मालिक संजीव कुमार अग्रवाल के यहां काम कर रहा था। ररामाशंकर मालिक के यहां डाला टेंपो चलाता था। मंगलवार को भी वह खलासी राकेश कुमार सिंह के साथ मंडी गया था। स्टोर पहुंचने पर मालिक ने उसे स्टोर से चीनी का बोरा टेंपो में लादने को कहा। उसने चीनी का एक बोरा निकाला ही था कि चीनी से भरे बोरे के लॉट एक- एक कर उस पर गिर गए, इससे वह बोरे के नीचे दब गया। आनन- फानन में स्टोर के मालिक एसके अग्रवाल ने अपने एक कर्मचारी को फ्0 हजार रुपए देकर रामाशंकर को सदर अस्पताल भिजवाया, लेकिन रामाशंकर की स्थिति इतनी खराब थी कि सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने उसे एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया। एमजीएम हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने जांच के बाद रामाशंकर को मृत घोषित कर दिया।

थाना में किया हंगामा

इसी बीच परिजनों को घटना की जानकारी हुई तो उप मुखिया सुनील गुप्ता के नेतृत्व में परिजन व बस्तीवासी एमजीएम अस्पताल पहुंचे। एमजीएम अस्पताल में जब स्टोर के मालिक से बात की गई तो स्टोर मालिक ने क्भ् मिनट में आने की बात कही, लेकिन देर शाम तक नहीं आए। उधर मुआवजा के लिए परिजन स्थानीय लोगों के साथ देर रात परसुडीह थाना में हंगामा किया।

घर में मचा कोहराम

रामाशंकर सिंह की चार साल पहले ही सुमन देवी के साथ शादी हुई थी। शादी के बाद उनकी दो बेटियां हुईं। ढाई साल की स्वीटी कुमारी दूसरी छह माह की परी कुमारी। घर में जैसे ही रामाशंकर की मौत होने की जानकारी मिली, कोहराम मच गया। बूढ़े माता- पिता का तो रो रोकर बुरा हाल था ही, पत्नी की भी रो- रोकर स्थिति खराब हो गई। पत्नी केवल एक ही बात का रट लगाई हुए रही कि अब परिवार को कौन देखेगा। यह कहते हुए वह बार- बार बेहोश हो रही थी।

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