'जिम कॉर्बेट का खानसामा'
क्या आपने कभी सुना है कि एक बड़ा सा शेर खानसामा से डर गया. वह खानसामा से उस वक्त डर गया, जब उन्होंने शेर के सिर पर अपना फ्राइंग पैन दे मारा. नहीं, आपने नहीं सुना होगा, क्योंकि इसके लिए आपको जिम कॉर्बेट की कॉर्बेट फैमिली का कुक बनना पड़ेगा. इसके बावजूद एक आदमी ने ऐसा कर दिखाया और वह जवाब में उसका नाम है रस्किन बॉन्ड. उनकी 'Tall Tales by Jim Corbett’s Khansama' में शेर के लिए डिनर से जुड़ी ऐसी बातें मॉजूद हैं, जिनको आप भी खूब एंज्वॉय करेंगे. उनकी जिम कॉर्बेट को लेकर ये किताब संग्रह है आठ बेहतरीन शॉर्ट स्टोरीज़ का. ये कहानियां आधारित हैं कई गर्मियों की छुट्टियों और संडे दोपहर को नन्हे रस्किन के उनके फैमिली कुक के साथ होने वाली चर्चाओं पर.

ये जनाब,आपका बचपन लौटा देंगे!  

रस्किन और बॉलीवुड का भी बहुत पुराना नाता है
रस्किन बॉन्ड की कई कहानियों पर फिल्में भी बन चुकी हैं. इन फिल्मों में शशि कपूर की फिल्म ‘जुनून’ (1978) भी शामिल है. यह फिल्म बॉन्ड की किताब 'अ फ्लाइट ऑफ पिजन्स' पर आधारित है. निर्देशक विशाल भारद्वाज भी रस्किन बॉन्ड की कहानी 'ब्लू अंब्रेला' पर फिल्म बना चुके हैं. उनकी इस फिल्म को कई पुरस्कार भी मिले थे. हाल में फिल्म विशाल भारद्वाज ने एक और फिल्म बनाई थी. उसका नाम था 'सात खून माफ'. इस फिल्म की कहानी भी रस्किन की किताब 'Susanna’s Seven Husbands' पर आधारित है.

कुछ ऐसे शुरू हुई इनकी कहानी
बेहतरीन लेखक रस्किन बॉन्ड का जन्म 19 मई, 1934 को हिमांचल प्रदेश के कसौली गांव में हुआ था. उनके पिता रॉयल एयर फोर्स में हुआ करते थे. बताया जाता है कि जब वह महज चार साल के थे, उस समय ही उनके माता-पिता में तलाक हो गया था. उसके बाद उनकी मां ने एक हिन्दू से शादी कर ली. इसके बाद बॉन्ड का बचपन जामनगर, शिमला में बीता. 1944 में अचानक इनके पिता की मृत्यु हो गई. इसके बाद बॉन्ड देहरादून में अपनी दादी के साथ आकर रहने लगे. उस समय उनकी उम्र तकरीबन दस साल होगी. रस्किन बॉन्ड ने अपनी पढ़ाई शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से पूरी की. उसके बाद वे लंदन चले गये. रस्किन को बचपन से ही लिखने का बहुत शौक था, इसलिए बॉन्ड कॉलेज तक आते-आते एक मंझे हुए लेखक बन गए. अब तब उन्होंने कई अवार्ड भी जीते थे. 17 साल की उम्र में इन्होंने अपना पहला उपन्यास 'रूम ऑन द रूफ' लिखा. इसके लिये उन्हें 1957 में जॉन लिवेलिन राइस पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

पुरस्कारों का लगा अंबार  
रस्किन बॉन्ड (Ruskin Bond) को 1992 में लेखन के लिये उनकी लघु कहानियों के संकलन पर साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है. 1999 में बाल साहित्य में योगदान के लिए इन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया जा चुका है. शौकिया तौर पर लेखन करने वाले रस्किन बॉन्ड लंदन में रहने के बावजूद भारत को भूल नहीं सके. इस समय वह मसूरी के पास लैंडोर में रह रहे हैं.

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