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कमीशन के खेल में 'कैशलेस' फेल

Wed 13-Sep-2017 07:40:31

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मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में कैशलेस मुहिम को लग रहा है पलीता

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कमीशन के खेल में कैशलेस फेल

इंट्रो

आठ नवंबर 2016 हुए नोटबंदी का मकसद ब्लैक मनी को बैकिंग सिस्टम में वापस लाना था। नोटबंदी के साथ पीएम नरेन्द्र मोदी ने करप्शन फ्री इंडिया का नारा दिया और देश को कैशलेस इकॉनमी की ओर ले जाने की शुरुआत की। लेकिन पीएम को नहीं पता कि उनके ही संसदीय क्षेत्र में कैशलेस मुहिम को पलीता लगाया जा रहा है। जी हां, आई नेक्स्ट के स्टिंग में प्रूव हुआ कि कैशलेस सिस्टम पर कमीशन का खेल हावी है। इस खेल में शामिल हैं शहर के डॉक्टर्स और उनकी बदौलत फल- फूल रहे पैथालॉजी व डायग्नोस्टिक सेंटर्स

स्पॉट- 1: अरिहंत डायग्नोस्टिक सेंटर महमूरगंज

समय: दोपहर एक बजे

डीजे आई नेक्स्ट रिपोर्टर अपने एक सहयोगी के साथ सेंटर के काउंटर पर पहुंचा। सहयोगी का मोबाइल वीडियो मोड पर था।

रिपोर्टर: भाई साहब अल्ट्रा सोनोग्राफी करानी है। केयूबी।

काउंटर मैन: थोड़ी देर रुकिये।

रिपोर्टर: थोड़ी जल्दी है। अगर बता देते कितना पैसा लगेगा तो अच्छा होता।

काउंटर मैन: सात सौ रुपये लगेंगे। पांच बजे के बाद आपका नंबर आएगा।

(रिपोर्टर ने पेमेंट के लिए एटीएम कार्ड निकाला)

काउंटर मैन: कार्ड से पेमेंट नहीं होगा। कैश देना पड़ेगा।

रिपोर्टर: हर जगह तो कार्ड पेमेंट होता है और आपका सेंटर इतना बड़ा है फिर भी आप कैश मांग रहे हैं।

काउंटर मैन: हां, हम लोगों के पास कार्ड स्वाइप मशीन नहीं है। कैश ही देना पड़ेगा।

स्पॉट टू

परख डायग्नोस्टिक कलेक्शन सेंटर, महमूरगंज

समय: करीब 1.30 बजे

रिपोर्टर अपने सहयोगी के पैथालॉजी जांच के लिए आगे बढ़ गया। सेंटर के काउंटर पर सिर्फ एक व्यक्ति बैठा था।

रिपोर्टर: भाई साहब केएफटी कराना है.

काउंटर मैन: हो जायेगा।

रिपोर्टर: कितना पैसा लगेगा।

काउंटर मैन: नौ सौ रुपये लगेंगे।

रिपोर्टर: कार्ड से पेमेंट हो जायेगा?

काउंटर मैन: नहीं यहां कार्ड पेमेंट की व्यवस्था नहीं है। आप बगल में एटीएम है वहां से पैसे निकाल कर आइये तो हम जांच कर देंगे।

स्पॉट- 3: एसआरएल लैब, लक्ष्मी सिनेमा महमूरगंज

समय: लगभग दो बजे

डीजे रिपोटर्स अपने पड़ताल के क्रम में अगले पड़ाव पर पहुंचे। लैब में पहुंच कर हमने वहां केएफटी कराने की बात दोहराई। वहां बैठे एक व्यक्ति ने हमें दूसरे काउंटर की ओर भेजा।

रिपोर्टर: भाई साहब केएफटी कराना है।

काउंटर मैन: हो जायेगा। हमारे पास दो तरह की जांच है। एक कंप्लीट किडनी फंक्शन टेस्ट है जिसकी फीस 1350 रुपये है और दूसरे तरह का टेस्ट में सिर्फ किडनी से जुड़े टेस्ट करते हैं। जिसका 850 रुपये लगेगा।

रिपोर्टर: कार्ड से पेमेंट हो जायेगा?

काउंटर मैन: नहीं, हमारे यहां कार्ड पेमेंट का सिस्टम नहीं है। आपको कैश पेमेंट देना पड़ेगा।

स्पॉट- 4: आनंद एक्सरे, लक्सा

समय: शाम करीब 4 बजे

डीजे आई नेक्स्ट के रिपोर्टर अपनी पड़ताल को जारी रखते हुए अगले पड़ाव पर पहुंचे।

रिपोर्टर: एक अल्ट्रा साउंट कराना था केयूबी रीजन।

काउंटर मैन: हो जायेगा लेकिन आज नहीं। कल सुबह आना होगा।

रिपोर्टर: कितना पैसा लगेगा?

काउंटर मैन: छह सौ रुपये लगेंगे।

रिपोर्टर: कार्ड से पेमेंट हो जायेगा?

काउंटर मैन: नहीं कार्ड पेमेंट नहीं है। कैश लेकर आना।

रिपोर्टर: कुछ खाकर आना होगा कि खाली पेट।

काउंटर मैन। हां, खाली पेट, बस चाय पी सकते हैं।

शहर के चार नामी पैथॉलजी व डायग्नोस्टिक सेंटर्स में कार्ड पेमेंट न लिया जाने की बात तो सिर्फ एक बानगी भर है। शहर के 95 परसेंट सेंटर्स में ऐसा ही होता है। हर जगह आपको कैश पेमेंट करना होगा। ये आपको हर जगह सुनने को मिलेगा कि हमारे यहां कार्ड स्वाइप मशीन नहीं है। डाइग्नोसिस सेंटर्स के साथ आखिर ऐसा क्यों है? क्यों ये जांच सेंटर कैश ही लेते हैं? इसकी तहकीकात में चौंकाने वाली जानकारी मिली।

कमीशन का है सारा खेल

डायग्नोस्टिक फील्ड के एक जानकार ने बताया कि ऐसा करना जांच सेंटर्स की मजबूरी है। क्योंकि सभी को जांच फीस का एक हिस्सा कमीशन के रूप में उन डॉक्टर्स को देना पड़ता है, जो पेशेंट को यहां रेफर करते हैं। ई- पेमेंट में खतरा ये है कि वो पूरा पेमेंट जांच सेंटर की इनकम में काउंट होगा। जबकि जांच सेंटर्स को फीस का एक हिस्सा डॉक्टर को देना रहता है इसलिए वो उसे अपनी इनकम में शो नहीं करना चाहते। लिहाजा वो कैश ही पेमेंट लेते हैं।

हर जांच में हिस्सा

हर जांच सेंटर की चाहत होती है कि ज्यादा से ज्यादा मरीज उनके यहां आएं। इसके लिए वो खुद ही डॉक्टर्स को मोटा कमीशन ऑफर करते हैं। ताकि वो ज्यादा से ज्यादा मरीज उनके यहां भेजें। जांच सेंटर हर जांच की फीस इस हिसाब से रखते हैं जिससे डॉक्टर को कमीशन निकल जाए। जैसे कि 300 रुपये के अल्ट्रासाउंड के लिए वो 500 रेट रखते हैं ताकि 200 रुपये डॉक्टर को दिये जा सकें। यदि कोई 700 रुपये तक की जांच कराता है तो तय मानिये कि उसमें से 300 से लेकर 400 रुपये तक डॉक्टर की जेब में जाएगा।

बॉक्स

अल्ट्रामार्डन सेंटर लेकिन कैशलेस नहीं

डायग्नोस्टिक व पैथॉलजी सेंटर्स जहां अल्ट्रा माडर्न सुविधाएं होती हैं। ई पेमेंट की सुविधा न होना अपने आप में चौंकाने वाला है। स्वाइप मशीन, पेटीएम जैसी सुविधा आजकल तो चाय- पान की दुकानों से लेकर खोमचे वालों के पास तक है। फिर पैथालॉजी या डाइग्नोस्टिक सेंटर्स के पास क्यों नहीं। मामला ये है कि कार्ड से पेमेंट लेने पर पूरी फीस जांच सेंटर संचालय के एकाउंट में क्रेडिट हो जाएगी। जबकि उसे पूरी फीस में से 30 से 50 परसेंट डॉक्टर को देना रहता है। इसी वजह से जांच सेंटर कैश ही लेते हैं ताकि वो इनकम में उतना ही शो करें जितना कमीशन काटने के बाद बचता है।

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