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बच्चा पुलिस को है बच्चियों की तलाश

by Inextlive

Wed 06-Sep-2017 05:40:52

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-कैंट थाना कैंपस में खुले बाल मित्र थाने में नाबालिग बच्चों के अपराध से जुड़े मामलों संग पहुंच रहे हैं किशोरियों के अपहरण के मामले -घर से लापता किशोरियों के अपहरण की शिकायत के बाद इनकी तलाश में जुटी है टीम

Varanasi:
एक थाना सिर्फ बच्चों के लिए, जहां बाल अपराधियों को कड़क होकर नहीं बल्कि सॉफ्ट होकर ट्रीट किया जाता है. उनके अपराध की प्रवृति को देखते हुए उनकी कांउसलिंग कर उन्हें सुधारने की कोशिश की जाती है लेकिन इन दिनों यहां बच्चों के ऐसे अपराधों की जांच छोड़ यहां तैनात पुलिस बच्चियों की तलाश कर रही है. आप सोच रहे होंगे कि हम ये क्या कह रहे हैं. दरअसल पूर्वाचल में गोरखपुर के बाद बनारस में खुले बाल मित्र थाने में तैनात पुलिस वाले इन दिनों घरों से लापता ऐसी 24 बच्चियों को तलाश रहे हैं जिनके अपहरण की सूचना परिजनों ने यहां दर्ज कराई है.

 

मर्जी से गई या ले गया कोई

बाल मित्र थाने का वर्क लापता बच्चों के अलावा अपराध में लिप्त नाबालिग बच्चों को सही रास्ते पर लाना और जूवेनाइल एक्ट के तहत अपराध पाने वाले बच्चों को जुवेनाइल कोर्ट में पेश कर उनके सुधार की दिशा में प्रयास करना है. करीब दो साल पहले शुरू हुए इस थाने में जिले के अलग अलग थानों सें बाल अपराध से जुड़े मामले भी आते हैं. ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा घरों से नाबालिग बच्चियों के भाग जाने या लापता होने की सूचना ज्यादा आ रही हैं. बाल मित्र थाने के प्रभारी एसके पाण्डेय के मुताबिक पाक्सो एक्ट और अपहरण के 24 मामले जनवरी से अब तक यहां आये हैं. जिसमें या तो बच्चियां घर से लापता हैं या अपनी मर्जी से किसी के साथ गई हैं. ऐसे में परिजन उनके अपहरण की रिपोर्ट यहां दर्ज करा दे रहे हैं. जिसके चलते पुलिस टीम को सब काम छोड़कर इन लापता बच्चियों की पड़ताल करनी पड़ रही है. इनमें से कुछ को तो बरामद कर घर वालों को सुपुर्द भी किया जा चुका है.

 

ये है यहां का हाल

24

मामले बच्चियों के अपहरण के जनवरी से अब तक आये

10

बच्चियों की हुई है बरामदगी

01

नोडल अधिकारी सीओ लेवल का करता है निगरानी

01

एसआई लेवल का ऑफिसर है इंचार्ज

02

एसआई समेत 01 काउंसलर भी हैं तैनात

 

 

ये है थाने का वर्क

- बाल अपराधियों को थाने में ही खाना और पानी की सुविधा मिलती है

-थाने में ही है टॉयलेट की व्यवस्था

किसी अपराध में पकड़े जाने के तत्काल बाद बाल अपराधियों को किशोर गृह नहीं भेजा जाता

- थाने में रखकर की जाती है काउंसलिंग

- जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, जिला श्रम अधिकारी, एसजेपीयू के प्रभारी अधिकारी, ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी व एनजीओ के पदाधिकारी हैं इस थाने से जुड़े

- यूनिसेफ और एहसास संस्था भी करती हैं मदद

- थाने की मॉनिटरिंग लखनऊ से होती है

 

 

बाल मित्र थाने में बच्चों से जुड़े अपराध के मामले तो आते ही हैं साथ में बच्चियों या यूं कहिये नाबालिग लड़कियों के अपहरण से जुड़े मामले भी आ रहे हैं. ऐसे मामलों की जांच में ही यहां ज्यादा वक्त लग जाता है.

एसके पाण्डेय, प्रभारी बाल मित्र थाना

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