family members of shahid jawan were honoured by ccl

Local

देश के लिए हुए कुर्बान, नम हुईं परिजनों की आंखें जब मिला सम्मान

Tue 12-Sep-2017 07:41:18

RANCHI संसदीय लोकतंत्र के सत्तर साल पूरे होने के उपलक्ष्य में सीसीएल गांधीनगर में सोमवार को एग्जीबिशन और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर छह शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि सीसीएल के कार्मिक निदेशक आरएस महापात्रा मौजूद थे। समारोह में शहीद के परिजनों को श्रीफल, शॉल, पौधा और मेमेंटो के अलावा नकद राशि दी गई.

लांस नायक बिहारी मरांडी

लांस नायक बिहारी मरांडी जम्मू कश्मीर के बटालिक सेक्टर में ऑपरेशन रक्षक के तहत तैनात थे। पेट्रोलिंग करते हुए वे अंतराष्ट्रीय सीमा पर पहुंच गये। जब वे वापस लौट रहे थे तो हिमस्खलन हुआ और वे बर्फ के नीचे दब गये। उनके भाई बबलू मरांडी ने उनका सम्मान ग्रहण किया.

शहीद नायक विश्वा केरकेटटा

नायक विश्वा केरकेटटा जम्मू- कश्मीर के रजौरी सेक्टर में तैनात थे। आतंकवादियों ने रात में उनके कैंप में हमला कर दिया। विश्वा केरकेटटा ने अपने साथियों के साथ मिलकर दो आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया तथा तीन आतंकवादियों पर गोलियां बरसाते हुए आगे बढ़े। इसी क्रम में आतंकवादियों के ग्रेनेड हमले में वे शहीद हो गए। सम्मान पत्‍‌नी उर्मिला केरकेटटा ने ग्रहण किया.

शहीद फ्रांसिस होरो

शहीद फ्रांसिस होरो ऑपरेशन रक्षक के तहत जम्मू- कश्मीर के उरी सेक्टर में तैनात थे। एक आतंकवादी हमले के दौरान वे घायल हो गये पर आतंकवादियों पर लगातार गोलियां बरसाते रहे। बाद में उन्हें दिल्ली के आर्मी बेस अस्पताल में भर्ती किया गया। जहां जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ते हुए वे शहीद हो गये। उनका सम्मान उनकी पत्‍‌नी अनास्तासिया होरो ने ग्रहण किया.

शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल संकल्प कुमार शुक्ला

कर्नल संकल्प शुक्ला महुरा गण क्षेत्र के पश्चिमी भाग में तैनात थे। यहां छह आतंकवादी घुस आये और पांच सैनिकों को हताहत कर दिया। इसी क्रम में आतंकियों ने ग्रेनेड दागकर और गोलीबारी कर कर्नल शुक्ला को घायल कर दिया। घायल होने के बावजूद कर्नल शुक्ला ने आतंकवादियों का सफाया कर दिया। गंभीर रुप से घायल कर्नल शुक्ला इलाज के दौरान शहीद हो गये। उनका सम्मान उनकी मां ने ग्रहण किया.

हवलदार प्रभु सहाय तिर्की

हवलदार प्रभु सहाय तिर्की जम्मू- कश्मीर के बटालिक सेक्टर में तैनात थे। एरिया डोमिनेशन के लिए वह अपनी सैनिक टुकड़ी लेकर निकले थे। इसी दौरान हिमस्खलन हुआ जिसमें उनके साथी कुलदीप लकड़ा बर्फ के नीचे दब गये। वे उन्हें बचाने में जुटे थे कि तभी एक और बड़ा हिमस्खलन हुआ और वे भी सैकड़ों फीट गहरी बर्फ के नीचे दबकर शहीद हो गये।

inextlive from Ranchi News Desk

Related News