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राफ्टिंग पर सरकार सख्त, बिना रजिस्ट्रेशन नहीं चलेगी राफ्ट

Sat 20-May-2017 07:40:43

- - राफ्टिंग को लेकर सरकार सख्त

- - बीते शुक्रवार को राफ्टिंग के दौरान यात्री की मौत के बाद सरकार ने कड़े किए नियम

DEHRADUN:

ऋषिकेश में एडवेंचर का आनंद लेन आने वाले पर्यटकों और राफ्ट संचालकों के लिए सरकार ने सख्ती से कड़े नियम लागू करने का निर्णय लिया है। सरकार ने ये फैसला बीते शुक्रवार क्ख् मई को दिल्ली के एक युवक की राफ्िटग के दौरान मौत होने के बाद लिया है। राफ्ट संचालकों को अब हर राफ्ट में अपना रजिस्ट्रेशन नम्बर लेना अनिवार्य होगा। साथ ही अवैध रूप से राफ्टिंग करवाने वाले संचालकों की छापेमारी की कार्रवाई भी तेज की जाएगी।

गाइड पर खड़े हो रहे सवाल

बीते शुक्रवार क्ख् मई को दिल्ली से शिवपूरी घूमने आए पर्यटकों की एक राफ्ट गंगा में पलटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। राफ्टिंग में क्0 लोग सवार थे, हालांकि लोगों को रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया गया था, लेकिन महरौली निवासी फ्ब् वर्षीय सुभाष की मौत हो गई। मृतक के साथ राफ्टिंग करने आए साथियों ने आरोप लगाया था कि राफ्ट पलटने पर गाइड ने पहले ही कूद गया और पर्यटकों को नाव पर छोड़ दिया था। पर्यटक की मौत के बाद जिला प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम नरेन्द्रनगर को पूरी घटना के जांच के आदेश दिए। इधर एडवेंचर टूरिज्म इन्चार्ज उत्तराखंड प्रदीप नेगी का कहना है कि प्रशासन ने अवैध रूप से चल रहे राफ्टिंग के खिलाफ छापेमारी का अभियान तेज कर दिया है। साथ ही राफ्ट ऑपरेटर को पकड़ कर जरूरी कार्रवाई की जा रही है। ख्0क्भ् में लगाए गए इस्टिमेट के अनुसार क्ब्0 वैध रुप से राफ्टिंग कंपनी थी, इसके अलावा फ्क्0 राफ्ट अवैध रूप से चल रहे हैं। जबकि आज की तारीख में ख्70 राफ्टिंग लाइसेंस हैं। आपको बता दें कि शिवपुरी से ऋषिकेश तक ब्0 किमी की राफ्टिंग होती है। जिला प्रशासन ने अब राफ्ट ऑपरेटर्स के लिए रजिस्ट्रेशन नम्बर को अनिवार्य कर दिया है। साथ ही हर राफ्टिंग के लिए रजिस्ट्रेशन करना होगा।

पहले भी हो चुके हैं हादसे

मानवाधिकार आयोग ने भी इस घटना को लेकर नोटिस जारी कर सरकार से जवाब तलब किया है। आपको बता दें कि इससे पहले भी ऋषिकेश में राफ्टिंग के दौरान कई बार हादसे हो चुके हैं। ख्0क्भ् में यूपी के श्रम मंत्री की बेटी की भी राफ्टिंग हादसे में मौत हो गई थी। जिसके बाद कड़ी कार्रवाई करने की बात कही गई थी, लेकिन तब भी प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया था।

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