हिंदी मीडियम मूवी रिव्‍यू - इरफान खान ने हंसा हंसाकर बहुत कुछ बता दिया

Fri 19-May-2017 01:06:07
Hindi medium review Irrfan Khan great comedy makes its story amazing
एजूकेशन अब एक व्यापार है, और अंग्रेजी अब एक भाषा नहीं है, क्लास बन चुकी है। आप कितने भी अमीर या गरीब हों, आपको अंग्रेजी बोल पाने या न बोल पाने से आज के समाज में आपको कितनी इज्ज़त दी जानी चाहिए ये आकलंन किया जाता है। 'हिंदी मीडियम' इन दोनों बातों को ध्यान में रख कर बनाई गई है। इरफान खान की शानदार कॉमेडी एक्‍टिंग के साथ यह फिल्म काफी हद तक फिल्म 'इंग्लिश विंगलिश' की तरह हमारी आपकी आखें खोलने का काम करती है, और समाज को आइना भी दिखाती है।

कहानी :

राज बत्रा (इरफ़ान खान)और मीता बत्रा (सबा कमर) एक पंजाबी दंपत्ति हैं, जिनकी एक बेटी है, पिया। ये एक मिडल क्लास परिवार है, जो थोड़े ही समय से थोड़े से अमीर हो गए हैं। इनकी इच्छा है की इनकी बेटी पिया किसी बढ़िया इंग्लिश स्कूल में भर्ती हो जाए ताकि उसकी ज़िन्दगी सुधर जाए, पर ऐसा हो नहीं पाता, क्योंकि आजकल बच्चे के अंग्रेजी स्कूल में पढने के लिए खुद माँ बाप को अंग्रेजी का प्रकांड पंडित होना ज़रूरी है। मीता और राज टयूशन भी लेते हैं पर कुछ नहीं होता। आखिरकार वो गरीबकोटे से अपनी बेटी का एडमिशन कराने की सोचते हैं और गरीब पडोसी श्यामप्रकाश (दीपक डोबरियाल)के साथ मिलकर गरीबी का स्वांग रचते हैं। फिर क्या होता है जानने के लिए देख कर आइये 'हिंदी मीडियम'।

Movie: Hindi Medium

Genre : Drama
Director: Saket Chaudhary
Actors: Irrfan Khan, Saba Qamar, Deepak Dobriyal

Rating :3.5

स्क्रीनप्ले, संवाद और निर्देशन :

इस फिल्म का स्क्रीनप्ले काफी अच्छा लिखा हुआ है, फिल्म का ज्यादातर हिस्सा हास्य और व्यंग्य से रंगा हुआ है, राज और मीता के किरदार बहुत ही ध्यान से लिखे गए हैं, यही कारण है की ये किरदार रियल और बिलीवेबल लगते हैं। जीनत लखानी और साकेत चौधरी को इस फिल्म की कसी हुई राइटिंग के लिए बधाई। अमितोष नागपाल ने इस फिल्म के डायलॉग काफी अच्छे लिखे हैं, डायलॉग ओवर द टॉप न होकर बेहद सिंपल और रीयलिस्टिक हैं, और इन डायलॉग की वजह से फिल्म की कॉमिक टाइमिंग खासी इम्प्रूव होती है, फिल्म का निर्देशन भी टॉप नौच है, साकेत ने इससे पहले प्यार के साइड इफ़ेक्ट और शादी के साइड इफ़ेक्ट निर्देशित की हैं, ये उनकी अब तक की सबसे अच्छी फिल्म है। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी काफी अच्छी है, और लुक एंड फील से भी फिल्म को अच्छे नंबर मिल जाते हैं। फिल्म की एडिटिंग बेहतर हो सकती थी, फिल्म से कम से कम दो गाने काटे जा सकते हैं, ये दोनों गाने जिनमे से एक फिल्म के अंत में आता है फिल्म की सुर लय और ताल को बिगाड़ देते हैं।

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अदाकारी :

इरफ़ान खान अगर फिल्म में होते हैं, तो ये तो मान के चलना चाहिए उन्हें कैसा भी रोल दिया जाए वो उसको परफेक्ट से बेहतर निभाएंगे। इरफ़ान द्वारा निभाया गया राज बत्रा अपने बुटिक में आई हुई बदशक्ल से बदशक्ल शख्सियत को ये यकीं दिला सकता है की वो किसी फ़िल्मी सितारे से कम नहीं है, उनकी अदाकारी देख के लगता है की बुटिक भी उन्ही की है और वो बरसों से दिल्ली में बुटिक ही चला रहे हैं। 'पाकिस्तानी' अदाकारा सबा कमर बेहत अच्छी एक्ट्रेस हैं और साबित करती हैं की वो इस रोल में इसलिए ही कास्ट की गई हैं क्योंकि वो इस रोल के लिए परफेक्ट हैं (#CinemaBeyondBoundary)। दीपक डोबरियाल भी अपने रोल में खूब जचे हैं, पप्पी भैया के बाद ये उनका एक और शानदार परफॉरमेंस है। हनी त्रेहन को कास्टिंग के लिए फुल मार्क्स।

संगीत :

सचिन जिगर का संगीत ठीक ठाक है, बहुत अच्छा नहीं तो बहुत बुरा भी नहीं है। अमर मोहिले का बैकग्राउंड म्‍यूजिक बढ़िया है।

 फिल्म देखने जाने के पांच कारण -

  • अगर आप एक पैरेंट हैं, और आपके बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं, या जल्द ही उनका एडमिशन होने वाला है तो ये फिल्म आपको ज़रूर पसंद आएगी
  • फिल्म के अंत में राज एक स्पीच देता है जो कहा जाए तो हर एक पैरेंट के दिल से निकली हुई सी लगती है, आपको ज़रूर पसंद आएगी। 
  • आप अपने बच्चों के साथ ये फिल्म देखने के लिए जा सकते हैं, बड़े दिनों बाद एक ऐसी फिल्म आई है जो एक परफेक्ट फॅमिली एंटरटेनर है।
  • फिल्म बेहद रोचक है, आप बोर नहीं होंगे।
  • इरफ़ान खान और दीपक डोबरियाल का ज़बरदस्त परफॉरमेंस आपको पसंद आयेगा।

 

 

Review by : Yohaann Bhaargava
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