फर्जी नक्सली सरेंडर के मामले में हाईकोर्ट ने मांगा जबाब

Sat 12-Aug-2017 07:41:32

- 514 युवकों को झांसा देकर लूट लिया था राशि, पुराने जेल में था रखा

- इस मामले में चार आरोपी अभी हैं जेल में

RANCHI(11 Aug) : झारखंड में सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के अफसरों की मिलीभगत से चार साल पहले साल 2012 में 514 युवकों को फर्जी तरीके से नक्सली बताकर सरेंडर कराने के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से जबाब मांगा है। जबाब देने के लिए पुलिस के द्वारा पुराने रिकॉर्ड की तलाश की जा रही है। बाद में यह केस सीबीआई के पास चला गया था। केस के पीडि़तों का कहना था कि हाथ में हथियार थमाने से लेकर सरेंडर कराने तक सारा काम सीआरपीएफ के सामने हुआ.

युवकों की हुई थी फर्जी बहाली

झारखंड के जंगलों में रहने वाले आदिवासी बेरोजगार युवकों को गलत तरीके से कागजों पर नक्सली बनाकर समर्पण करने के लिए मजबूर किया गया। साल 2012 में सरेंडर करने वाले 514 युवकों में से ज्यादातर कोरा बटालियन में शामिल होना चाहते थे। इन युवकों से तब रुपये लेकर ये दावा किया गया था कि नक्सली बनकर आत्मसमर्पण करने से नौकरी जल्दी मिल जाएगी.

जमा पूंजी लगा दिया था युवकों ने

साल 2012 में आत्मसमर्पण करने वाले 24 वर्षीय कुलदीप बारा ने बताया था कि नौकरी के लिए मेरे परिवार ने रुपये उधार लेकर 1 लाख रुपये दिए। कुलदीप ने कहा, आत्मसमर्पण के वक्त मुझे गन थमा दी गई। मुझसे वादा किया गया था कि आत्मसमर्पण करने के बाद नौकरी मिलने में आसानी रहेगी। इस केस में रवि बोदरा और दिनेश प्रजापति मुख्य आरोपी हैं। इन दोनों के खिलाफ ख्8 मार्च ख्0क्ब् को एफआईआर भी दर्ज की गई थी।

कोबरा बटालियन में शामिल होना चाहते थे नौजवान

झारखंड के गुमला में ज्यादातर जवान कोबरा बटालियन में भर्ती होना चाहते थे। भर्ती के लिए रिश्वत देने के लिए युवाओं के परिवार के लोगों ने घर बेचने से लेकर अपनी जमीन तक गिरवी रख दी। लेकिन झूठे वादों और ठगों के चलते किसी भी युवा को नौकरी तो नहीं मिली, लेकिन पूर्व नक्सली कहा जाने लगा.

खेत गिरवी रखा, थमाई गन

साल ख्0क्ख् में आत्मसमर्पण करने वाले नकली नक्सली कर्मदयाल ने बताया कि हम 9 महीने कैंप में रहे। नौकरी के लिए भ्0 हजार रुपये रिश्वत दी। हमारे पास पैसे नहीं थे, इसलिए रुपयों के इंतजाम के लिए खेत तक गिरवी रखा दिया , लेकिन आखिर में हमारे हाथ में गन थमाकर हमें नकली नक्सली बना दिया गया.

रांची के पुराने जेल कैंपस में थे युवक

साल ख्0क्ख् में आत्मसमर्पण से पहले भ्क्ब् युवाओं को रांची के पुराने जेल में रखा गया था। नौजवानों को जेल में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन में होने का दिलासा दिया गया। हालांकि कुछ महीने बाद उन्हें वहां से निकालकर आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया.

अटकी हुई है सीबीआई जांच

घटना को चार साल हो गए हैं। लेकिन सीबीआई जांच में अब तक किसी दोषी को सजा नहीं मिल पाई है।

चार लोगों की हुई है गिरफ्तारी

पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को अब तक गिरफ्तार किया है। मामले में अब तक सीआरपीएफ के उन अफसरों से पूछताछ नहीं हुई है, जिन्होंने भ्क्ब् बेगुनाहों को नकली नक्सली बनाकर आत्मसमर्पण करने के लिए कहा था.

मिलिट्री खुफिया से संपर्क में था मुख्य आरोपी

केस के मुख्य आरोपी रवि बोडरा को मिलिट्री खुफिया से जुड़ा पूर्व मुखबिर बताया जाता है। केस के दूसरे मुख्य आरोपी दिनेश प्रजापति को बोदरा का मुखबिर बताया जाता है। प्रजापति दिगदर्शन कोचिंग चलाता था। साल ख्0क्ख् में एमवी राव सीआरपीएफ के आईजी बनकर रांची पहुंचे। राव ने चंद रोज में ही माजरा समझ लिया और झारखंड के पुलिस महानिदेशक को चिट्ठी लिखकर पूरे फर्जीवाड़े से पर्दा उठा दिया।

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Web Title : Naxal Surrender Case Hearing