ट्रॉमा मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई के आदेश

Sat 12-Aug-2017 07:41:31

- विद्युत सुरक्षा निदेशालय की रिपोर्ट में लापरवाही उजागर, कार्रवाई के आदेश

- रिपोर्ट में इंजीनियर्स और अन्य जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर

- जिलाधिकारी ने दिए रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के निर्देश

sunil.yadav@inext.co.in

LUCKNOW:

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रॉमा सेंटर में लगी आग में जिम्मेदारों पर अब कार्रवाई तय है। विद्युत सुरक्षा निदेशालय की रिपोर्ट में जिम्मेदारों पर कार्रवाई की संस्तुति की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, केजीएमयू के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर पर गाज गिरनी तय है। डीएम की ओर से केजीएमयू के रजिस्ट्रार को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.

लापरवाही से हुआ हादसा

सुरक्षा निदेशालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रॉमा सेंटर के दूसरे तल पर बिजली लोड का डिस्ट्रीब्यूशन नियमानुसार नहीं किया गया। साथ ही सर्किट्स में लगे एमसीबी की क्षमता अधिक थी। जिसके कारण शार्ट सर्किट होने के बावजूद एमसीबी ट्रिप नहीं हुई। इसके कारण ही इतनी बड़ी आग लगने की घटना हुई। जिम्मेदार सजग रहते और नियमों का पालन करते तो शायद इस अग्निकांड को रोका जा सकता था.

कार्रवाई की संस्तुति

विद्युत सुरक्षा निदेशालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि अग्निकांड भारतीय विद्युत नियमावली 1956 के नियम 29 के अनुपालन न होने के कारण हुई है। इसलिए जिम्मेदार स्टाफ के खिलाफ केजीएमयू आवश्यक कार्रवाई करे। साथ ही सुरक्षा निदेशालय ने कहा है कि जांच के समय पाई गई कमियों के निवारण के लिए नियमावली के नियमक 5 (4)के तहत जारी आदेशों का केजीएमयू लखनऊ शीघ्र पालन कराए।

मरीजों की सुरक्षा संग खिलवाड़

गौरतलब है कि पिछले माह 15 जुलाई को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भीषण आग लग गई थी। जिसमें मरीजों को शिफ्ट करने के दौरान उनकी हालत बिगड़ने से लगभग एक दर्जन मरीजों की मौत हो गई। मामले में डीएम, विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने अपनी रिपोर्ट दी थी और फिर कमिश्नर ने इनकी रिपोर्ट शासन को भी भेजी थी। हालांकि मामले में कोई एक्शन नहीं लिया गया। अब 25 दिन बाद मामले में डीएम कार्यालय की ओर से विद्युत सुरक्षा निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.

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फ्रिज से ही लगी थी आग

विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने कहा है कि आग दवाओं के स्टोर में रखे फ्रिज में शार्ट सर्किट से ही लगी है। इसके कारण फ्रिज तक आने वाले तारों को दीवार के अंदर से निकाला गया तो वे आपस में चिपके हुए थे। जिससे स्पष्ट है कि फ्रिज में आए फाल्ट के कारण शार्ट सर्किट हुआ था। जिससे आग लगी। शार्ट सर्किट के कारण ही दीवार के अंदर तक के तार आपस में चिपक गए। जबकि शार्ट सर्किट न होने की स्थिति में दीवार के अंदर तारों का इंसुलेशन सुरक्षित रहता है, बाहर खुले हुए तारों का इंसुलेशन ही गर्मी के कारण क्षतिग्रस्त होता है।

विद्युत सुरक्षा निदेशालय की रिपोर्ट आई है। उसका अध्ययन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

- राजेश कुमार राय, रजिस्ट्रार, केजीएमयू

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Web Title : On Traumatized Trauma Action Order