कोई भी आसानी से पहचान सकता है कुलभूषण के कबूलनामे का फर्जी वीडियो

Tue 11-Apr-2017 02:52:24
Pakistan released edited video of kulbhushan jadhav
भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। कुलभूषण पर पाकिस्तान आर्मी कानून के तहत मुकदमा चलाया जा रहा था। पाकिस्तान लगातार ये दावा कर रहा है कि वो रॉ के एजेंट हैं। भारत पहले ही साफ़ कर चुका है कि कुलभूषण रॉ एजेंट नहीं हैं। भारत ने कहा था कि वो नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी हैं। वो किसी भी रूप में सरकार से नहीं जुड़े हैं। पाकिस्तान ने आरोप लगाए कि जाधव पाकिस्तान को अस्थिर करना और पाकिस्तान के खिलाफ जंग छेड़ना चाहते थे।

6 मिनट का है कुलभूषण जाधव का वीडियो
कुलभूषण के कबूलनामे का वीडियो की शुरुआत में ही लगाता कई बार एंगल बदले गये हैं। जिसे देख कर कोई भी बता देगा कि इसे एडिट किया गया है। जाधव एक लाल रंग के सोफे पर बैठे हैं। उनके पीछे परछाईं भी साफ नजर आ रही है। अचानक कैमरा का एंगल और लाइट बदल जाती है और उनका चेहरा दूसरी ओर से नजर आता है। वीडियो में कुलभूषण कहते दिख रहे हैं कि उनका कवर नेम हुसैन मुबारक पटेल था। करीब 6 मिनट के वीडियो में इतनी ही गलतियां है कि उसे 105 कट के बाद वीडियो रिलीज किया गया है। भारतीय दूतावास के अधिकारियों को भी कुलभूषण से नहीं मिलने दिया गया। वीडियो देखकर साफ लग रहा है कि टार्चर करके वीडियो को कई एंगल से शूट किया गया है। लाइट का भी ख्याल रखा गया। पूरे वीडियो में कई जगहों पर आवाज में ओवरलैप होती सुनाई देती है।

 


छेड़खानी करने के बाद वीडियो किया गया रिलीज
ईरान बॉर्डर पर पाकिस्तान की तरफ से उन्‍हें पकड़ा गया था। वीडियो में बताते हैं कि दिसंबर 2001 तक वह इंडियन नेवी में रहे। संसद हमले के बाद उन्होंने घरेलू खुफिया जानकारियां जुटानी शुरू कर दीं। 2003 में भारत की इंटेलिजेंस सर्विस ज्वाइन कर ली। वीडियो में कुलभूषण यह भी कहते हैं कि ईरान से बलूचिस्तान में वह आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे। ईरान के चाबहार में उन्होंने 10 साल पहले रॉ का बेस बनाया। कराची और बलूचिस्तान का दौरा करते रहे। कुलभूषण वीडियो में भारतीय नौसेना से अपने रिटायमेंट के बारे में बताते हुए भी दिख रहे हैं। वह कहते हैं कि 2022 में रिटायर होना है।

जाधव की मौत है पूर्वनियेजित हत्‍या

कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद भारतीय विदेश सचिव एस.जयशंकर ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को विदेश मंत्रालय में तलब कर कड़ा विरोध पत्र सौंपा है। इस फैसले से भारत-पाक के रिश्तों में और तनाव बढ़ने की आशंका है। भारत ने कहा है कि जाधव की मौत को भारत एक पूर्वनियोजित हत्या मानेगा। भारत ने बासित को कहा कि जिस कार्रवाई के आधार पर जाधव को यह सजा दी गई है वह हास्यास्पद है। उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं। जाधव के दोस्त तुलसीदास पवार ने बताया कि हमें पता था कि पाकिस्तान कुलभूषण का हाल भी सरबजीत जैसा ही करेगा। वह नेवी जॉइन करने पर बहुत खुश था। नेवी छोड़ने के बाद उसने दोस्तों को बताया था कि वह बिजनस शुरू करेगा। वह बिजनस ही कर रहा था। मुझे नहीं लगता कि उसने रॉ जाइन की होगी।


पाकिस्तानी सेना की मीडिया इकाई ने दी जानकारी
जाधव मामले पर पाकिस्तानी सेना की मीडिया इकाई इंटर सर्विसेस पब्लिक रिलेशन्स की ओर से जारी प्रैस विज्ञप्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा कि पिछले साल ईरान से उनका अपहरण किया गया था। पाकिस्तान में उनकी मौजूदगी के बारे में कभी कोई विश्वसनीय विवरण नहीं दिया गया। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत इस्लामाबाद में अपने उच्चायोग के जरिए वाणिज्य दूतावास को जाधव तक संपर्क देने की मांग की और 23 मार्च 2016 से 31 मार्च 2017 के बीच ऐसे 13 अनुरोध औपचारिक तरीके से किए गए लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसकी इजाजत नहीं दी।


पाकिस्‍तान ने कहा कि जाधव ने स्‍वीकार किया रॉ एजेंट होना
आई.एस.पी.आर. के मुताबिक जाधव ने मैजिस्ट्रेट और अदालत के सामने स्वीकार किया कि उन्‍हें भारतीय खुफिया एजैंसी रॉ ने पाकिस्तान को अस्थिर करने और जंग छेडऩे के उद्देश्य से जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों की योजना बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। उनका काम बलूचिस्तान और कराची में कानून का पालन करवाने वाली एजैंसियों के शांति बहाली के प्रयासों को बाधित करना था। गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तानी सेना ने जाधव के कबूलनामे का वीडियो भी जारी किया था। एमनेस्टी इंटरनैशनल ने मौत की सजा सुनाने की निंदा की है। संस्था के मुताबिक इससे एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय मानकों की अवहेलना की गई है।

पाकिस्‍तानी कैदियों की रूकी रिहाई
जाधव की मौत की सजा को मंजूरी देने के कुछ घंटे बाद भारत ने फैसला किया कि वह उन 1 दर्जन पाक कैदियों को रिहा नहीं करेगा। जिन्हें बुधवार को उनके वतन भेजा जाना था। सरकार का मानना है कि कैदियों को रिहा करने का यह सही समय नहीं है। इन कैदियों को भारत और पाकिस्तान द्वारा जेलों में बंद एक-दूसरे के नागरिकों को सजा पूरी होने के बाद उनके देशों में वापस भेजने की परंपरा के तहत रिहा किया जाना था।

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