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महज पांच सौ रुपए मे बदल देता था 'उम्र'

Sun 13-Aug-2017 07:41:30

टॉपर गणेश की उम्र में हेराफेरी करने वाला क्लर्क हुआ गिरफ्तार

- दो से पांच सौ रूपए लेकर करता था रजिस्ट्रेशन फार्म में उम्र में बदलाव

PATNA : समस्तीपुर के संजय गांधी उच्च विद्यालय में तैनात लिपिक अरुण कुमार महज दो सौ से पांच सौ रुपए उम्र बदल देता था। उम्र में हेराफेरी कर फर्जी इंटर आ‌र्ट्स टॉपर बने गणेश कुमार का इसी ने उम्र को बदला था। इस मामले में शनिवार को एसआइटी ने गिरफ्तार कर लिया है। अरुण कुमार ने गणेश के मैट्रिक रजिस्ट्रेशन फार्म में उम्र को कम और जाति बदलने का का काम विद्यालय प्रशासन की मिलीभगत से किया था।

फरार प्रधानाचार्य, टीचर और लिपिक की थी तलाश

उम्र की हेराफेरी कर गणेश कुमार इस वर्ष इंटर ऑटर्स का टॉपर बना था। जांच में गणेश के फर्जीवाड़ा का खेल उजागर हुआ और कोतवाली में केस दर्ज हुआ। पूरे मामले की जांच के लिए एसआइटी का गठन हुई थी। इस मामले में गणेश का फर्जी उम्र सर्टिफिकेट लगाकर समस्तीपुर के सिवालीनगर में स्थित संजय गांधी उच्च विद्यालय लक्ष्मीनिया में दसवीं का रजिस्ट्रेशन हुआ था। एसआइटी ने जांच के दौरान इस मामले में फर्जी टॉपर गणेश, संजय गांधी विद्यालय के प्रधानाध्यापिका देव कुमारी, सचिव रामकुमार, दलाल संजय सहित कई दो अन्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि बेगुसराय के खोदावंधापुर थाना क्षेत्र निवासी उक्त विद्यालय का लिपिक अरूण कुमार, आरएनएसजेएस उच्च विद्यालय समस्तीपुर के प्रधानाध्यापक और संजय गांधी विद्यालय के टीचर विजय कुमार चौहान फरार थे। एसआइटी में शामिल कोतवाली में तैनात एसआई राघवेन्द्र झा गुरूवार और शुक्रवार को तीनों की तलाश में समस्तीपुर और बेगुसराय में छापेमारी की। हालांकि प्राचार्य और टीचर नहीं मिले, जबकि लिपिक अरुण कुमार को उसके घर से एसआइटी ने दबोच लिया।

दलाल संजय बना था गणेश का अभिभावक

अरुण ने एसआइटी की पूछताछ में बताया कि वह संजय गांधी विद्यालय में वर्ष क्99भ् से लिपिक पद पर तैनात है। अरुण ने बताया कि उसे इस बात की जानकारी थी कि गणेश कुमार उम्र में हेरफेर किया है। उसके मुताबिक इस बात की जानकारी विद्यालय की प्रधानाध्यापिका और सचिव रामकुमार को भी पता था। गणेश के दाखिला के दौरान दलाल संजय अभिभावक बना था। संजय ने कई सालों फर्जी उम्र, जाति और छात्र को अच्छे अंक दिलाने के नाम मोटी रकम वसूल दाखिला कराता था। अरुण के मुताबिक संजय गांधी विद्यालय में सत्तर फीसद छात्र अच्छे अंक हासिल करने के लिए ही दसवीं में दाखिला लेते थे।

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