school management not taking lessons from the events

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घटनाओं से सबक नहीं ले रहे स्कूल और प्रशासन

Tue 12-Sep-2017 07:40:17

- तमाम घटनाओं के बाद फौरी कार्रवाई कर पुलिस ने झाड़ा पल्ला

- किसी भी मामले में स्कूल प्रशासन की नहीं तय हुई जवाबदेही

LUCKNOW

जद्दोजहद के बाद एडमिशन और उसके बाद हर महीने मोटी फीस की वसूली, बावजूद इसके मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं। गुरुग्राम स्थित हाईप्रोफाइल स्कूल रेयॉन इंटरनेशनल स्कूल में मासूम प्रत्यूष की निर्मम हत्या के बाद सवाल उठ खड़ा हुआ है कि राजधानी के हाईप्रोफाइल स्कूल मासूमों के लिये कितने सुरक्षित हैं। बीती कुछ घटनाओं पर नजर डालें तो राजधानी के इन स्कूलों के हालात भी बदतर ही साबित हुए हैं। तमाम शोशेबाजी के बावजूद न तो इन स्कूल्स में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम हैं और न ही उन्हें दरिंदों से बचाने के लिये कोई निगरानी तंत्र। यही वजह है कि हर घटना के बाद फौरी कार्रवाई कर पुलिस अपना पल्ला झाड़ लेती है। वहीं, शिक्षा विभाग या फिर प्रशासन भी इस ओर आंखें मूद कर बैठ जाता है। ऐसी ही कुछ सनसनीखेज घटनाएं जिन्होंने राजधानी को दहलाया तो लेकिन, दोषियों के खिलाफ पुख्ता कार्रवाई को लेकर सवाल अब भी बाकी हैं-

घटना: 1

डेट: 11 मई 2017

जगह: एलन हाउस स्कूल, वृंदावन कॉलोनी

प्री क्लास में पढ़ने वाली पांच साल की बच्ची के प्राइवेट पार्ट में इंफेक्शन हो गया। परिजन उसे डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने चेकअप के बाद दवा दी। पर, इंफेक्शन सही होने के बजाय बढ़ता गया। इधर, बच्ची शांत रहने लगी। वह किसी अनजान को देखकर सहम जाती। डॉक्टर्स ने बच्ची की मां को बेटी से अकेले में बात करने की सलाह दी। आखिरकार मां ने बच्ची से अकेले में समझा- बुझाकर पूछताछ की। जिस पर बच्ची ने जो बात बताई उसे सुनकर उसकी मां के होश उड़ गए। बच्ची ने बताया कि स्कूल के दो कर्मचारी बीते सात महीने से उसका यौन शोषण कर रहे थे। उनकी इस करतूत में एक आया भी मददगार थी। प्रिंसिपल से शिकायत पर उन्होंने कोई कार्रवाई करने के बजाय पेरेंट्स को फटकार लगाते हुए वहां से लौटा दिया। आखिरकार परिजनों ने पीजीआई थाने में एफआईआर दर्ज कराई।

पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने स्कूल के सभी कर्मचारियों की शिनाख्त परेड कराई। जिसमें बच्ची ने स्कूल के एकाउंटेंट इरफान, आया सीमा और ड्राइवर विकास की पहचान की। बच्ची के पहचान करते ही पुलिस ने उन तीनों को अरेस्ट कर लिया। पर, स्कूल प्रशासन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।

घटना: 2

डेट: 10 मार्च 2015

जगह: लामार्टीनियर ब्वायज कॉलेज, गौतमपल्ली

लामार्टीनियर कॉलेज में कक्षा आठ के छात्र राहुल श्रीधर की छत से गिरकर मौत हो गई। जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस इसे बिना जांच ही आत्महत्या बताने पर उतारू हो गई। कॉलेज प्रशासन ने भी इसे आत्महत्या बताया। पुलिस ने आखिरकार इसे आत्महत्या मानते हुए जांच शुरू की। इधर, मृतक छात्र के पिता वी। श्रीधर घटना को आत्महत्या मानने को तैयार न थे, उन्होंने केस की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इसी बीच केस में पेंच आया कि छत पर मिले राहुल के मोबाइल फोन से एसएमएस और कॉल लॉग डिलीट मिला। जिससे पुलिस के दावे पर शक गहरा गया। हालांकि, पुलिस ने राहुल के पिता की दलील को नजरंदाज करते हुए आनन- फानन जांच को निपटा दिया और इसे आत्महत्या ही करार दे दिया।

पुलिस कार्रवाई: 11 अक्टूबर को पुलिस ने मामले को आत्महत्या मानते हुए केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। पिता वी। श्रीधर ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट से केस की पुनर्विवेचना की मांग की। कोर्ट ने तीन मार्च 2017 को गौतमपल्ली थाने को मामले की फिर से विवेचना करने का आदेश दिया। जिसके बाद से मामले की जांच जारी है।

घटना: 3

डेट: सेंट जॉन विएनी स्कूल, उतरटिया

डेट: 4 सितंबर 2017

स्कूल की टीचर ने अटेंडेंस के लिये पुकारे जाने पर प्रेजेंट न बोलने पर क्लास 3 के स्टूडेंट को बुरी तरह पीट डाला। पिटाई का हाल यह था कि बच्चे के गाल में बुरी तरह सूजन आ गई। जिस देख परिजन स्कूल पहुंचे और हंगामा किया। पहले तो स्कूल प्रबंधन ने टीचर पर लगे आरोप को मानने से इंकार कर दिया। पर, जब क्लास की सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई तो उसमें टीचर की हरकत को देख सभी दंग रह गए। टीचर ने महज 40 सेकेंड में छात्र को ताबड़तोड़ 40 थप्पड़ मार दिये। उसकी यह हरकत देख क्लास में मौजूद बच्चे भी सहम गए। सीसीटीवी फुटेज में बच्चे द्वारा लगाए गए आरोप की पुष्टि होने पर हंगामा मच गया। दबाव में आए स्कूल प्रशासन ने बचाव के लिये टीचर को नौकरी से निकाल दिया। हालांकि, बच्चे के पिता ने पीजीआई थाने में बेरहम टीचर के खिलाफ तहरीर दी।

पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने बच्चे के पिता की तहरीर पर महज जुबिनाइल जस्टिस एक्ट की धारा के तहत एफआईआर दर्ज कर मामले से पल्ला झाड़ लिया। गौरतलब है कि इस धारा में पुलिस को अरेस्टिंग का अधिकार नहीं है। इस धारा में दोषी पाए जाने पर आरोपी टीचर को सिर्फ 10 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा। जबकि, कानूनविदों की राय में ऐसी टीचर के खिलाफ संगीन धारा में एफआईआर दर्ज कर उसे अरेस्ट किया जाना चाहिये था।

घटनाएं होती रहीं, शिक्षा विभाग ताकता रहा

गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशन स्कूल में स्टूडेंट की हत्या के बाद देश के सभी स्कूलों में स्टूडेंट्स की सुरक्षा को लेकर सिस्टम ठीक करने की बात की जा रही है। वहीं दूसरी ओर इन स्कूलों पर नजर रखने वाले डिपार्टमेंट और अधिकारी ऐसे मामलों के संज्ञान में आने के बाद इस पर जांच कर कार्रवाई तक करने से बचते हैं। समय बीतने के साथ ही यह सभी मामले फाइलों में दबकर बंद हो जाते हैं.

जांच रिपोर्ट का पता नहीं

बीते दिनों राजधानी के पीजीआई एरिया के सेंट जॉन विएनी स्कूल में क्लास थर्ड के स्टूडेंट को टीचर ने 40 सेकेंड में 40 से अधिक थप्पड़ मारे थे। मामला प्रकाश में आने के बाद स्कूल प्रशासन ने आनन- फानन में टीचर को स्कूल से निकाल दिया। साथ ही स्टूडेंट के अभिभावकों ने इस मामले में पुलिस में मामला दर्ज कराया। मामले के तूल पकड़ने पर बेसिक शिक्षा विभाग ने भी अपने स्तर से जांच शुरू की। एक कमेटी का गठन किया। जिसको एक वीक में अपनी रिपोर्ट देनी थी पर अभी तक जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट बीएसए को नहीं सौंपी है। जबकि स्कूल प्रशासन ने इस पूरे प्रकरण से पल्ला झाड़ लिया है।

एलन हाउस को मिली एनओसी

बीते साल सुपर हाउस ग्रुप के एलन हाउस स्कूल में छह साल की बच्ची के साथ यौन शोषण का मामला संज्ञान में आया था। मामले की जांच में स्कूल के तीन लोगों की छात्रा द्वारा पहचान करने के बाद उनको जेल भेजा गया था। उस समय स्कूल को मान्यता नहीं थी। इस मामले की शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की। पर जांच रिपोर्ट में क्या निकला यह सार्वजनिक नहीं किया गया। उल्टा कुछ समय बाद स्कूल को एनओसी जारी कर मान्यता भी दे दी गई। शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि स्कूल ने मान्यता के लिए जो कागज सौपें थे उसका सही से वेरीफिकेशन तक नहीं किया गया। हालांकि स्कूल प्रशासन ने इस घटना के बाद स्कूल में स्टूडेंट्स के सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने का दावा कर रहा है।

एक भी स्कूल ने नहीं दी एनओसी

शिक्षा विभाग का स्कूलों पर कितना दबाव है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ज्वांइट डायरेक्टर ने राजधानी के सभी सीबीएसई और आईएससीई बोर्ड के स्कूलों से मान्यता के लिए जारी एनओसी प्रस्तुत करने को कहा था। इसके लिए एक वीक का समय दिया गया था। पर करीब दो हफ्ते का समय बीतने के बाद भी अभी तक एक भी स्कूल के मान्यता के लिए जारी एनओसी प्रस्तुत नहीं की है।

स्कूलों के खिलाफ जो भी मामले आते हैं उन पर नियमों के अनुसार कार्रवाई होती है। घटना से जुड़ी जो भी रिपोर्ट प्रस्तुत होती है उसी आधार पर कार्रवाई की जाती है। एलन हाउस को एनओसी सभी मानकों को देखने के बाद ही जारी हुई है.

- सुरेंद्र तिवारी, ज्वाइंट डायरेक्टर, लखनऊ मंडल

सेंट जॉन विएनी स्कूल के पास आठवीं तक की मान्यता है, स्कूल में हुई घटना की जांच रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। हालांकि स्कूल प्रशासन ने टीचर को हटा दिया है। जब तक स्कूल में ऐसी घटनाओं के लगातार होने के सबूत नहीं मिलते हैं। हम मान्यता वापस नहीं ले सकते.

- प्रवीण मणि त्रिपाठी, बीएसए, लखनऊ

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