धर्म और आध्यात्म की गूंज के बीच प्रभु प्रेमी संघ संस्था के शिविर में शनिवार को कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। शिविर में जूना अखाड़ा के आचार्य पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज के सानिध्य में सांस्कृतिक कार्यक्त्रमों की वृहत्तर श्रृंखला के अन्तर्गत आयोजित सम्मेलन में देश के प्रख्यात कवियों ने अपनी काव्य प्रस्तुतियां दी।

गंगा मइया की जय, यमुना मइया की जय व सरस्वती मइया के जयकारे के बीच प्रख्यात कवि पवन जैन ने पुलिस विभाग को समर्पित पंक्तियों बंद हो थाने के पट ऐसा कभी नहीं होता, शहर सोए चैन से इसलिए कभी सोता नहीं से श्रोताओं को सोचने पर विवश कर दिया। प्रख्यात कवि गजेन्द्र सोलंकी ने पंक्तियां कभी अंधियार को उजियार कहना सीख ना पाया, गंगाजल हूं नालों संग बहना सीख ना पाया। जुबां पे प्यार के नग्में दिलों में नफरती दलदल, मैं ऐसे दोस्तों के संग रहना सीख ना पाया सुनाई। चर्चित हास्य कवि डॉ। अनिल चौबे ने पंक्तियां यह वह देश है जहां दीवारों पर लिखकर बताया जाता है कि दीवार पर लिखना मना है सुनाई तो श्रोता हंसते रहे। मंच पर डॉ। ध्रुवेन्द्र भदौरिया, रमेश उपाध्याय बांसुरी, डॉ। सीता सागर, सुमन दुबे व राधाकांत पांडेय जैसे प्रख्यात कवियों ने भी स्वरचित काव्य पंक्तियों की प्रस्तुति की। समापन पर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कवियों को अंगवस्त्रम् देकर सम्मानित किया।