लोकल हो काम करो पैसा नहीं मिलेगा

2019-04-13T06:00:26+05:30

- दो महीने काम कराने के बाद दिखा दिया बाहर का रास्ता

- चार महीने से अधिकारियों के दर का चक्कर काट रहे युवा

- फर्टिलाइजर कर्मियों का 10 लाख रुपए से अधिक है बकाया

GORAKHPUR: हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के निर्माण में काम करने वाले लोकल यूथ्स के साथ भेदभाव किया जा रहा है। मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड इंप्लॉइमेंट की ओर से तय मिनिमम रेट ऑफ वेजेज का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। कंपनी ने कारखाना निर्माण के लिए जापानी कंपनी मेसर्स टोयो इंजीनियरिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को काम सौंपा है। कंपनी ने मैनपावर सप्लाई के लिए मेसर्स विजय निर्माण कंपनी लिमिटेड को जिम्मेदारी दी है। विजय निर्माण कंपनी लिमिटेड लोकल यूथ्स से काम कराने के बाद उन्हें भुगतान नहीं दे रही है। 40 कर्मचारियों का कंपनी पर 10 लाख से अधिक वेजेज बकाया है। दूसरी ओर कंपनी के जिम्मेदार किसी तरह की जानकारी से भी इंकार कर रहे हैं।

तय दर से नहीं हो रहा भुगतान

मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड इंप्लॉइमेंट, ऑफिस ऑफ डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर की ओर से शहरों को ए, बी और सी कैटगरी में बांटा गया है। इस आधार पर संस्था की ओर से डेली वेजेज भी तय किए गए हैं। गोरखपुर शहर को बी कैटेगरी में रखा गया है जिसमें अनस्किल्ड लेबर को 466, सेमी स्किल्ड को 527, स्कि्ल्ड को 617 और हाईली स्कि्ल्ड को 679 रुपए प्रतिदिन की दर से वेज फिक्स किया गया है। लेकिन कर्मचारियों को इस दर से भुगतान नहीं किया जा रहा है। अनस्किल्ड लेबर को 300 रुपए से भी कम दिया जा रहा है। यही नहीं कर्मचारियों को भुगतान तक नहीं किया जा रहा है और पैसा मांगने पर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जा रहा है।

40 कर्मियों का 10 लाख से अधिक बकाया

हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड में काम करने वाले 40 कर्मचारियों को दो महीने से अधिक समय के मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। कर्मचारियों ने इस संबंध में लेबर इंफोर्समेंट ऑफिसर से शिकायत की तो उन्होंने एक्चुअल रेट से टोटल वेज कैलकुलेट किया तो टोटल 10 लाख से अधिक निकला। लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है और उन्हें बार-बार ऑफिस बुलाकर परेशान किया जा रहा है। साथ ही कंप्रोमाइज करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

डीएम को भी सौंपा था ज्ञापन

कर्मचारियों ने वेजेज का भुगतान नहीं होने के कारण प्रदर्शन किया था और डीएम को भी ज्ञापन सौंपा था। 19 नवंबर 2018 को डीएम ऑफिस के सामने प्रदर्शन कर उन्होंने जल्द से जल्द भुगतान कराने की मांग की थी। जिस पर आज तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। कर्मचारियों को दो महीने काम कराने के बाद बाहर कर दिया गया और उनकी जगह दूसरे प्रदेशों से मजदूर बुलाकर काम करवाया जा रहा है।

कोट्स

मैंने अक्टूबर व सितंबर में कंपनी में काम किया है। हमें 300 रुपए भी नहीं दिया जा रहा था। जब मैंने नियमानुसार भुगतान की मांग की तो मुझे बाहर निकाल दिया गया। अब हम भुगतान के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

राहुल कुमार

काम करने के बाद हम लोग पिछले छह महीने से भटक रहे हैं लेकिन भुगतान नहीं किया जा रहा है। मेरा 14 हजार रुपए बकाया है।

सरवन पांडेय

वर्जन

कर्मचारियों के बकाया वेतन के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता।

आरपी अहीरवार, जीएम, एचयूआरएल

inextlive from Gorakhpur News Desk


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