वास्तु टिप्स शादी को बनाना है यादगार तो अपनाएं ये 10 आसान उपाय

2018-08-20T11:05:48+05:30

जिस जगह विवाह होता है वहां खानेपीने रहने भोजन बनने की जगह स्टोर रूम और दूल्हादुल्हन के बैठने की व्यवस्था सही जगह पर और बड़ी सावधानी से करनी चाहिए जिससे कि सभी मेहमान प्रसन्न होकर जाएं।

नमस्कार मित्रों, जब हमारे यहां कोई मांगलिक कार्य हो तो अक्सर कोई कमी रह जाती है या मेहमान संतुष्ट नहीं होते। ऐसे में जिस जगह विवाह होता है, वहां खाने-पीने, रहने, भोजन बनने की जगह, स्टोर रूम और दूल्हा-दुल्हन के बैठने की व्यवस्था सही जगह पर और बड़ी सावधानी से करनी चाहिए, जिससे कि सभी मेहमान प्रसन्न होकर जाएं।

वास्तु के इन 10 बातों का रखें ध्यान

1. लग्न रूम का प्रवेश द्वार उत्तर या पूर्व की तरफ बनाएं। मंच पर वर—वधू के बैठने की व्यवस्था पश्चिम दिशा या दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ बनानी चाहिए। वह ऐसे बैठें कि उनका मुख पूर्व दिशा की तरफ हो।

2. आस-पास फूलों की सजावट अवश्य हो। वास्तविक फूल हों तो और भी अच्छा है। संगीत की व्यवस्था पूर्व से उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ करें या दूल्हा-दुल्हन के मंच के दाएं या बाएं तरफ भी कर सकते हैं।

3. अपने समारोह के लिए जो भी जगह चुनें, वह ऐसी हो जहां पर्दे, टेंट चौकोर या आयताकार लग सकें।

4. यह भी देखें कि प्रवेश द्वार के आस-पास किसी तरह की कोई गंदगी, बिजली का खंभा या बड़ा पेड़ न हो। यह स्थान साफ-सुथरा हो। समारोह स्थल में दक्षिण-पश्चिम की तरफ बड़ी-बड़ी गुलाबी मोमबत्तियां भी जलाएं और रोज क्वॉट्र्ज भी रॉक फॉर्म में रखें। पूरे ग्राउंड में संभव हो तो लैवेंडर के फ्रेगरेंस का उपयोग लाभदायक रहेगा। आए हुए मेहमान शांत और खुशनुमा माहौल महसूस करेंगे।

5. विवाह की वेदी अग्नि कुंड आग्नेय कोण में रखना शुभ रहेगा और इसी तरफ जेनरेटर भी लगाया जाए। पंडाल, टेंट और पूरे समारोह में लाइट्स, पर्दे और रंगों का वास्तु अनुकूल उपयोग हो तो अच्छा है।

6. पानी की व्यवस्था ईशान कोण में करनी चाहिए। रसोई और तंदूर का स्थान आग्नेय कोण की तरफ हो। अग्नि और पानी साथ-साथ न हो। मध्य का स्थान पूरी तरह साफ और खाली रखें।

7. यदि वास्तु के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए तैयारी की जाएगी तो माहौल भी गरिमामयी होगा और यदि समारोह स्थल छोटा भी हुआ तो भी बहुत खुला-खुला नजर आएगा। स्टोर रूम के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा क्षेत्र ठीक रहेगा।

8. पूरे सामरोह स्थल में यह भी अवश्य देखें कि पूरा स्थान समतल हो। विवाह परिसर में आए हुए मेहमानों के कमरे पश्चिम या वायव्य कोण में होने चाहिए। रिसेप्शन में भोजन की व्यवस्था उत्तर या पश्चिम दिशा की तरफ करनी चाहिए। प्रवेश द्वार में स्वस्तिक का प्रतीक बनवाएं। प्रवेश द्वार के पास पूरी प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। यहां किसी तरह का अंधेरा न हो या लाइट की कमी न हो।

9. उत्तर-पूर्व की दिशा हल्की और साफ-सुथरी रखें। लग्न मंडप लग्न रूम के उत्तर-पूर्व की तरफ हो। पूरे विवाह स्थल में जगह-जगह ऑयल डिफ्यूजर का उपयोग भी कार्यक्रम और लोगों के मूड को बेहतर बनाने में सहायक होगा।

10. विवाह समारोह में आने वाले लोगों के वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था उत्तर-पश्चिम की तरफ हो तो अच्छा है। इस तरह की व्यवस्था के साथ समारोह यादगार तो बनता ही है, साथ-साथ एक सुखद अनुभूति भी हमेशा बनी रहती है।

 

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