9 साल के आजाद को याद है 900 पन्ने का कुरान

2016-05-10T07:42:32+05:30

- आम तौर पर याद करने में लग जाते हैं 2 से चार साल

- मो। आजाद ने साढे चार महीने में याद कर सबको चौंकाया

- पिता मदरसा के सामने बनाते हैं पंक्चर

BHATHAT: भटहट ब्लॉक के बैलो स्थित मदरसे में पढ़ाई कर रहे 9 वर्ष का मो। आजाद ने मात्र साढे चार महीने में पूरी कुरान शरीफ याद कर सबको चौंका दिया है। मदरसा के शिक्षकों का कहना है कि कुरान शरीफ को याद करने में अच्छी याददाश्त वाले व्यक्ति को भी 2 से 4 साल लग जाते हैं। यह आजाद पर अल्लाह की इनायत है। मो। आजाद के पिता मदरसा के सामने ही पंक्चर बनाने की दुकान चलाते हैं। बेटे की आंख की रोशनी जन्म से ही सही नहीं है। पिता की आर्थिक स्थिति भी सही नहीं लेकिन बेटे का लगन देखकर वह उसे पढ़ाकर कुछ बनाने की चाहत रखते हैं।

शिक्षक को लग गए थे तीन साल

बताते हैं कि हाफिज की पढ़ाई पूरा करने के लिए तीन वर्ष तक कठिन परिश्रम करना होता है तब जाकर कहीं कुरान-ए-पाक याद हो पाता है। जिसपर खुदा की नेमत होती है वही इसे कम समय में याद कर पाता है लेकिन तब भी उसे 2 साल लग ही जाते हैं। सिर्फ साढे 4 माह में कुरान याद करने का नजीर जल्दी नहीं मिलता। वह भी इतनी कम उम्र में। हाफिज सईद आबिद अली नूरी का कहना है कि कुरान शरीफ में तीस पारा होता है। प्रत्येक पारा तीस पन्ने का होता है। इस तरह कुल 900 पन्ने होते हैं। एक 9 साल के बच्चे का इसे साढे 4 माह में याद कर लेना किसी को भी हैरान कर सकता है। उन्हें तो इसे याद करने में पूरे तीन साल लग गए थे।

कमजोर हैं आंखें

मो। आजाद की आंख जन्म से ही कमजोर है। ठीक से दिखाई नहीं देता लेकिन वह काफी लगनशील है। यही कारण है कि पिता ने गांव में ही स्थित मदरसे दारुल उलूम अहले सुन्नत अनवारुल उलूम में उसका नाम लिखा दिया। हाफिज व कारी मो। शादाब की निगरानी में आजाद ने कुरान याद किया। शिक्षक बताते हैं कि आजाद की आंख कमजोर है लेकिन उसका दिमाग काफी तेज है। वह हर बात इतनी जल्दी समझ लेता है मानो उस पर खुदा की नेमत है।

पिता बनाते पंक्चर

मदरसे के शिक्षकों ने आजाद के पिता को बेटे की उपलब्धि बताई तो वह खुशी से रो पड़े। आजाद के पिता मो। इस्लाम मदरसा के सामने ही पंक्चर की दुकान चलाते हैं। इसी से परिवार का भरण-पोषण होता है और बेटे की पढ़ाई भी। इस्लाम बताते हैं कि आजाद मदरसे में ही रहता है। उसे कुरान पढ़ने में इतना मन लगता है कि वह घर भी नहीं आता।

बांधी जायेगी आजाद को पगड़ी

मदरसे के प्रिंसिपल मौलाना आस मुहम्मद मिस्बाही समेत सभी शिक्षकों ने आजाद को बधाई दी है। प्रिंसिपल ने बताया कि बैलो में आगामी 15 मई को होने वाले जलसे में दस्तार बन्दी होगी। आजाद को पगड़ी बांधकर उसका सम्मान किया जाएगा। आजाद ने स्कूल के साथ ही क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वह अल्लाह का बंदा है।

inextlive from Gorakhpur News Desk


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