देहरादून एक सीट एक पार्टी पांच बार बदला कैंडिडेट

2019-03-26T09:22:10+05:30

- टिहरी लोकसभा सीट पर यूकेडी ने 5 बार बदला कैंडिडेट
- 5 लोकसभा सीटों में से 4 पर चुनाव लड़ रही यूकेडी, नैनीताल कैंडिडेट का नॉमिनेशन रद्द

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DEHRADUN:
एक सीट, एक पार्टी और पांच उम्मीदवार। कभी राज्य की क्षेत्रीय पार्टी कहे जाने वाली पार्टी उत्तराखंड क्रांति दलल(यूकेडी)का कुछ ऐसा ही हाल रहा है। कहने के लिए यूकेडी ने इस लोकसभा चुनाव में सभी लोकसभा सीटों पर अपने कैंडिडेट्स मैदान में उतारने का शुरू से ही दावा किया था, लेकिन दल की हकीकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यूकेडी को अकेले टिहरी संसदीय सीट से अपने पांच- पांच कैंडिडेट्स बदलने पड़े। आखिर में दल ने जय प्रकाश उपाध्याय को मैदान में उतारा है.
कभी एक मात्र बड़ी क्षेत्रीय पार्टी रही यूकेडी
एक वक्त था जब यूकेडी को राज्य की एक मात्र क्षेत्रीय पार्टी का तमगा मिला था और राज्य आंदोलन के दौरान सक्रिय भूमिका निभाने वाले दल के 4 विधायक विधानसभा में पहुंचे थे। लेकिन वक्त की करवट और राजनीतिक स्वार्थो के कारण यूकेडी का जनाधार लगातार खिसकते रहा। राजनीतिक स्वार्थो के ही कारण पार्टी में कई बार धड़े हुए। यूकेडी के वर्तमान केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट भाजपा सरकार में काबिना मंत्री तक का पद संभाल चुके हैं। लेकिन उसके बावजूद पार्टी के पॉलिटिकल ग्राफ में लगातार गिरावट देखने को मिली। एक बार फिर से लोकसभा चुनाव सामने हैं। पांच सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा करने वाली पार्टी ने कहने के लिए पांच कैंडिडेट्स मैदान में उतारे, लेकिन नैनीताल से उतारे गए कैंडिडेट्स का नामांकन रद्द हो गया है.
5 में से 4 कैंडिडेट्स रह गए मैदान में
फिलहाल पार्टी के पांच सीटों में से 4 उम्मीदवार अब चुनाव मैदान में हैं। इनमें से टिहरी से जय प्रकाश उपाध्याय, पौड़ी से शांति प्रसाद भट्ट, अल्मोड़ा से केएल आर्य और हरिद्वार से सुरेंद्र आर्य मैदान में हैं। दिलचस्प यह रहा है कि यूकेडी को लोकसभा जैसे चुनाव में अपने कैंडिडेट्स को मैदान में उतारने तक के लिए पसीने छूट रहे हैं। टिहरी लोकसभा सीट पर कुछ ऐसा ही देखने को मिला। सबसे पहले पार्टी ने टिहरी से भगवान सिंह पंवार को नाम घोषित किया था। सटीक न बैठने के बाद उनके स्थान पर पार्टी के संरक्षक व वयोवृद्ध नेता बीडी रतूड़ी का नाम तय किया गया। वे भी तैयार नहीं हो पाए, उसके बाद पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पंकज व्यास का नाम लिया जाने लगा। सहमति नहीं बनी तो फिर से पार्टी के नेता डीडी शर्मा का नाम आगे किया गया। लेकिन आखिरी वक्त पर जय प्रकाश का नाम आगे किया गया। जिन्होंने मंडे को टिहरी से दून में अपना नॉमिनेशन फाइल किया। जेपी उपाध्याय वार्ड मेंबर से लेकर अब तक छह चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें कभी भी विजय नहीं मिली। उनका नाम आखिरी वक्त पर तय होने के बारे में जय प्रकाश उपाध्याय का कहना है कि यूकेडी का नाम जिंदा रखना है, राज्य को बचाने व युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए वे चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं.

inextlive from Dehradun News Desk


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