सरकार के नियमों की स्कूल प्रबंधक उड़ा रहे धज्जियां अब है कार्रवाई की बारी

2019-04-12T06:00:33+05:30

- 20 हजार से ज्यादा फीस की जानकारी ऑनलाइन न करने वाले प्राइवेट स्कूलों पर होगी कार्रवाई

- प्राइवेट शुल्क अधिसूचना के मुताबिक ही स्कूलों को ऑनलाइन करनी होगी फीस

GORAKHPUR: सिटी के प्राइवेट स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। क्लासेज भी शुरू हो चुकी हैं। लेकिन सिटी के ज्यादातर स्कूलों ने सरकार द्वारा शुल्क अधिसूचना को लेकर जारी की गई गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाते हुए उसे अभी तक ऑनलाइन नहीं किया है। जबकि सभी स्कूलों द्वारा 20 हजार से ज्यादा फीस को ऑनलाइन किया जाना कंपल्सरी है। अभी तक शहर के 65 प्रतिशत स्कूलों ने ही फीस की जानकारी ऑनलाइन की है। हालांकि डीआईओएस ने इस मामले की गंभीरता से लेते हुए जांच-पड़ताल की बात कही है।

सीबीएसई स्कूल नहीं मान रहे नियम

बता दें, दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की तरफ से चल रहे कैंपेन बच्चे खड़े बाजार में का संज्ञान लेते हुए जहां जिम्मेदार हरकत में आ चुके हैं। वहीं, पैरेंट्स का कारवां भी स्कूलों की मनमानी रोकने की इस मुहिम संग जुड़ता जा रहा है। इसी कैंपेन के तहत पड़ताल का सिलसिला आगे बढ़ा तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पता चला है कि प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए जिला शुल्क नियामक नियमों की शहर के प्राइवेट स्कूल संचालक धज्जियां उड़ा रहे हैं। सिटी के ज्यादातर सीबीएसई स्कूलों में प्री-नर्सरी, एलकेजी समेत अन्य क्लासेज में दाखिले की प्रक्रिया लगभग समाप्त होने के बावजूद फीस की जानकारी को ऑनलाइन ही नहीं किया गया है। इसे गंभीरता से लेते हुए डीआईओएस ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया ने ऐसे स्कूलों की सूची तैयार करने का निर्देश जारी किया है जिन्होंने फीस को ऑनलाइन नहीं किया है।

धरी रह गईं कवायदें

बता दें, 3 नवंबर 2018 को ग्रीन सिटी स्थित आरपीएम एकेडमी में जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक में समिति के सदस्यों एवं जिले के माध्यमिक, सीबीएसई, सीआईएससीई स्कूलों के प्रिंसिपल शामिल हुए थे। बैठक में डीआईओएस ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया ने शुल्क अधिसूचना 12 सिंतबर 2018 को पढ़कर सुनाया था और विस्तार से प्रिंसिपल्स को इसके बारे में अवगत भी कराया था। साथ ही यह भी निर्देशित किया था की शुल्क अधिसूचना में दिए गए प्रावधानों के तहत ही वार्षिक 20,000 से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। अगर कोई स्कूल बीस हजार से अधिक शुल्क वसूलता है तो यह शुल्क ऑनलाइन किया जाएगा। लेकिन 65 प्रतिशत स्कूल प्रबंधनों ने नए सत्र (2019-20) के दाखिले के लिए शुल्क विवरण ऑनलाइन नहीं कर सके हैं।

अब तक नहीं हुआ प्रचार-प्रसार

वहीं डीआईओएस की तरफ से शुल्क विवरण वार्षिक परीक्षा के पहले उसका प्रचार-प्रसार किया जाने का निर्देश दिया गया था। शुल्क अधिसूचना में दिए गए प्रावधानों के तहत शुल्क नहीं लिए जाने पर संस्था के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। शुल्क विवरण स्टूडेंट्स के प्रवेश से पहले उनके विवरणिका (प्रॉस्पेक्टस) पर अंकित होना चाहिए। लेकिन सीआईएससीई बोर्ड के स्कूलों को छोड़ सीबीएसई के ज्यादातर स्कूल प्रबंधकों ने दर्ज ही नहीं किया है। जबकि मंथली, क्वार्टली व सिक्स मंथली शुल्क का विवरण देना जरूरी है। एक साथ पूरे वर्ष के शुल्क नहीं लिए जाने का प्रावधान है। शुल्क व शैक्षिक गतिविधियां, जिसके लिए शुल्क लिया जाएगा, उसको पारदर्शी रूप में दिखाया जाएगा।

वर्जन

जिला शुल्क अधिसूचना के नियमों पर ही फीस को ऑनलाइन किया जाना है। अगर कोई स्कूल नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

- ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया, डीआईओएस

inextlive from Gorakhpur News Desk


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