शहर में बिक रही नकली दाल!

2016-08-28T12:20:00+05:30

GORAKHPUR अगर अरहर की दाल की खरीदारी करने निकले हैं तो जरा सावधान हो जाइए सिटी की मार्केट में अरहर की दाल में जबर्दस्त मिलावटखोरी करके बेचा जा रहा है नतीजा यह हो रहा है कि पकाने के बाद इसमें अरहर की दाल का स्वाद ही नहीं मिल रहा है अब यह पौष्टिकता क्या देगी इसका अंदाजा तो आप आसानी से लगा सकते हैं सिर्फ इतना ही नहीं फुटकर में अरहर की दाल के मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं 100 रुपए किलो से लेकर 160 रुपए किलो तक की अरहर की दाल बेची जा रही है इस मामले को लेकर जब आई नेक्स्ट ने रियलिटी चेक किया तो कुछ चौंकाने वाली हकीकत उजागर हुई

छ: स्पॉट्स, छ: किस्म की दाल
दाल को लेकर आई शिकायतों के बाद आई नेक्स्ट टीम इसकी हकीकत परखने के लिए मार्केट में निकली. छ: रिपोर्टर्स ने सिटी के छह स्पॉट्स से दाल का सैंपल कलेक्ट किया. इसमें अलग-अलग दुकानों से पर अरहर की दाल के दाम के साथ-साथ इसकी किस्मों में भारी अंतर देखने को मिला. इन सभी दाल के कलर तो अलग-अलग थे ही, साथ ही इसमें दाल का साइज भी काफी बदला हुआ था.
फुटकर में दाम आसमान पर
आई नेक्स्ट टीम ने जब दाल के दाम का सर्वे किया, तो नतीजे चौंका देने वाले निकले. थोक मार्केट में जहां दाल के दाम 80 रुपए से लेकर 85 रुपए प्रति किलो के बीच थे, वहीं फुटकर में आते-आते यह करीब डेढ़ गुने तक हो गए. सभी रिटेलर्स प्रति किलो करीब 20 से 60 रुपए कमा रहे थे. इसमें कुछ दाल जहां 100 रुपए प्रति किलो मिली, तो वहीं कुछ ने इसके 125 रुपए तक वसूल किए. इतना ही नहीं मार्केट में 160 रुपए तक की दाल मौजूद थी.
ऐसे बदले मार्केट में रेट
चौरहिया गोला  100
पैडलेगंज        110
शास्त्री चौक     110
रेलवे स्टेशन     115
इंदिरा नगर      120
हरिओम नगर    125
पब्लिक कॉलिंग
पिछले दिनों सस्ता जानकर मार्केट से दाल आई थी. लेकिन जब इसे पकाया गया तो यह ऐसे गल गई जैसे अरहर की नहीं मूंग की दाल हो. खाने में भी किसी तरह का कोई स्वाद नहीं. बच्चों ने तो खाने से इंकार कर दिया. लगता है कि मार्केट में नकली दाल आ गई है.
-अल्का शाही, हाउस वाइफ
जिस मार्केट में जाओ अरहर की दाल का अलग ही रेट है. कोई 100 रुपए प्रतिकिलो बेच रहा है तो कोई 150 रुपए प्रतिकिलो. समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर माजरा क्या है? अगर एक ही मंडी से सब लोग दाल ला रहे हैं तो दाम में इतना ज्यादा अंतर क्यों है? लगता है दाल में मिलावटखोरी की जा रही है.
रीमा श्रीवास्तव, हाउस वाइफ
अरहर की दाल में काफी मिलावट हो रही है. देखने में तो एकदम पीली और बेहतरीन दाल है, लेकिन जब बन रही है, तो यह न तो गल रही है और न ही कोई टेस्ट ही है.
- विवेक श्रीवास्तव, छोटेकाजीपुर
दाल के दाम अब भी आसमान पर हैं. थोक मार्केट में 82 से 85 रुपए में दाल मौजूद हैं, लेकिन फुटकर मार्केट में इसकी कीमत 100 से 160 रुपए तक वसूल की जा रही है. कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर माजरा क्या है?
- लतीफ खान, बैंक रोड
अरहर की दाल में यह मिल रही शिकायत
- ठीक से न पकना या फिर पूरी तरह से गल जाना.
-  खाने में अरहर की दाल जैसा कोई स्वाद न मिलना.
- देखने में दाने अनुपात से ज्यादा छोटा होना.
ऐसे पहचानें नकली दाल
- अरहर की दाल के दाने थोड़े से बड़े आकार के होते हैं. नकली दाल के दाने छोटे हैं.
- पकाने के बाद दाल में वाजिब गाढ़ापन नहीं आ रहा है.
-मार्केट में पूरी रिसर्च करके अरहर की दाल खरीदें.
-अगर दो दुकानों के दाम में बहुत ज्यादा अंतर हो तो समझ लें कि सस्ती वाली दाल मिलावटी है.
दाल में मिलावट का खेल
सिटी के एक बड़े व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मिलावट खोरी का धंधा जोरों पर चल रहा है. सिटी में अब अरहर की दाल में खेसारी दाल मिलाकर बेचा जा रहा है. व्यापारी ने कहा कि प्रशासन को इस मामले में सख्ती बरतनी चाहिए.
थोक में दाल के भाव काफी हद तक गिरे हैं. लेकिन फुटकर के भाव में तेजी है. जो दाल थोक मंडी में 82 से 85 रुपये है. वह फुटकर में ज्यादा से ज्यादा 90 रुपये किलो बेची जानी चाहिए. मनमाना दाम वसूल रहे कारोबारियों पर नकेल कसने की जरूरत है.
-भाष्करानंद, दाल व्यापारी
गोरखपुर में यहां से आती हैं दाल
-मध्य प्रदेश
-महाराष्ट्र  
यह होती है मिलावट -
बकले के दाल की
खड़सारी की
विशेष तरह की मटर की जिसका दाल अरहर की तरह होता है.
खराब और घटिया दाल को पॉलिश
कलर और ऑयल (जंगली आरंडी)
यह हो सकती है बीमारी
गठिया, घेंघा, स्किन प्रॉब्लम, मांसपेशियों का पतला होना और उसमें ऐंठन. चमडिय़ों का कड़ा हो जाना, आंखों की रोशनी का कम होना, दिमाग की कोशिकाओं का डैमेज हो जाती हैं, पोलियों और लकवा, आंतों में सूजन, अल्ट्रेशन, आंतों की टर्मिनल इंटेस्टाइन में कैंसर, गठिया
ऐसी होती है असली दाल
- जो असली दाल होती है उसमें चमक कम होती है
- दाल की कनवेस्टि एक तरफ से प्लेन और दूसरी तरफ से उभार होता है.
- किनारा स्मूद नहीं बल्कि रफ नहीं होता
- भिगोने पर दाल के सरफेस पर बुलबुले दिखाई देंगे.
- कम समय में पक जाती है दाल
- रंग नहीं छोड़ती असली दाल
- पानी में भिगोकर हाथ पर मसलने से उसका पानी सूख जाता है.
बकला और खड़सार जंगली दलहन है. इस पेड़ को जानवर खाया करते हैं. यह बहुत कम पानी और जलवायु में पैदा हो जाते हैं. इसमें वह प्रोटीन पाए जाते हैं जो यूरिक एसिड को बढ़ा देते हैं. आजकल इसकी काफी मिलावट हो रही है. इससे स्किन और बॉडी में कई तरह की प्रॉब्लम हो सकती है. आंखों की रोशनी तक जा सकती है.
- डॉ. संदीप श्रीवास्तव, फिजिशियन


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