एडमिशन लेने से पहले एलएलबी प्रोफेशनल कोर्स के बारे में जानें सबकुछ

2019-05-08T12:05:55+05:30

लीगल स्टडीज रेप्यूटेड प्रोफेशन्स में से एक तो है ही इसे ऑप्ट करने वाले प्रोफेशनल्स को अच्छा पे पैकेजे भी मिलता है। यही कारण है कि लॉ चूज करने वाले स्टूडेंट्स बढ़ रहे हैं। अगर आप भी एस्पायरिंग लॉ स्टूडेंट हैं तो जानिए इस फील्ड से जुड़ी इंपॉर्टेंट डीटेल्स

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KANPUR : लॉ कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए कैंडीडेट्स इंटरमीडिएट के बाद कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट यानी क्लैट का एग्जाम क्वॉलिफाई करके उससे एफीलिएटेड कॉलेजेस में एडमिशन ले सकते हैं। कुछ प्राइवेट कॉलेजेस क्लैट के स्कोर के बेसिस पर कैंडीडेट्स को अपने इंस्टीट्यूट में एडमिशन देते हैं। इसके अलावा ज्यादातर गवर्नमेंट कॉलेजेस और यूनिवर्सिटीज या तो मेरिट के बेसिस पर कैंडीडेट्स को एडमिशन देते हैं या फि अलग से एंट्रेंस एग्जाम कंडक्ट कराते हैं। ऐसे में अगर आप इस साल इंटरमीडिएट में अपियर हो रहे हैं या इंटर पास कर चुके हैं और लॉ में करियर बनाना चाहते हैं, तो यहां आपको इस फील्ड से जुड़ी सारी इंफॉर्मेशन दी जा रही है।।।

3 ईयर बीए एलएलबी कोर्स
जो कैंडीडेट्स ग्रेजुएशन करने के बाद लॉ की पढ़ाई करना चाहते हैं, उन्हें तीन साल के बीए-एलएलबी कोर्स में एडमिशन दिया जाता है। चूंकि यह कोर्स सिर्फ तीन साल का होता है इसलिए इसमें लॉ के बेसिक कॉन्सेप्ट्स को सिर्फ पहले साल ही कवर किया जाता है, उसके बाद लॉ के अलग-अलग ट्रेड्स को ज्यादा डीटेल में पढ़ाया जाता है। कैंडीडेट्स इस कोर्स को करने के बाद एलएलएम यानी लॉ में मास्टर्स की डिग्री भी ले सकते हैं। ज्यादातर इंस्टीट्यूट्स में यह कोर्स सेमेस्टर बेसिस पर होता है।

मास्टर्स ऑफ लॉ (एलएलएम)

एलएलएम में एडमिशन के लिए वैसे तो हर यूनिवर्सिटी का अपना क्राइटेरिया होता है। लेकिन आमतौर पर कैंडीडेट्स के एलएलबी में कम से कम 50 परसेंट माक्र्स रिक्वायर्ड होते हैं। इसके अलावा यह भी जरूरी है कि कैंडीडेट्स ने अपना कोर्स रेग्युलर किया हो। देश में क्लैट से एफिलिएटेड कॉलेजेस के अलावा चुनिंदा यूनिवर्सिटीज ही एलएलएम कोर्स कराती हैं और इस कोर्स में एडमिशन के लिए कैंडीडेट्स को एंट्रेंस एग्जाम भी क्वॉलिफाई करना होता है।
5 ईयर इंटीग्रेटेड कोर्स
जो स्टूडेंट्स इंटर के बाद सीधे एलएलबी करना चाहते हैं, उन्हें 5 साल के इंटीग्रेटेड बीए एलएलबी कोर्स में एडमिशन दिया जाता है। इस कोर्स में कैंडीडेट्स को लॉ की हर ब्रांच के बारे में पढ़ाया जाता है साथ ही उनकी मैनेजमेंट स्किल्स पर भी ध्यान दिया जाता है। इस कोर्स को करने के बाद कैंडीडेट्स अपनी पसंद की किसी भी ब्रांच में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। 5 साल के इस कोर्स में कुल 10 सेमेस्टर्स होते हैं। कोर्स के लास्ट ईयर में प्रैक्टिकल और मूट कोट्र्स पर ज्यादा जोर दिया जाता है, जो कि स्टूडेंट्स की ग्रूमिंग के लिए जरूरी है।

सही लॉ कॉलेज चुनना है जरूरी

स्टूडेंट्स के लिए सही लॉ कॉलेज का सिलेक्शन जरूरी है क्योंकि वहां मिलने वाली प्रैक्टिकल ट्रेनिंग से लेकर वहां का इन्फ्रास्ट्रक्चर तक लॉ की पढ़ाई में एक इंपॉर्टेंट रोल प्ले करता है। लिहाजा, लॉ कॉलेज का चुनाव करने से पहले खुद से चार सवाल जरूर पूछें: एक- आपकी रैंक के अनुसार किन कॉलेजेस में आपको एडमिशन मिल सकता है?दूसरा- कहीं आपको अपने शहर से बाहर रहकर पढऩे में कोई परेशानी तो नहीं है? तीसरा- अगर आप अपने शहर के कॉलेज में एडमिशन ले रहे हैं, तो आपके घर से उसकी ज्यादा दूरी आपको परेशान करने वाली तो नहीं है?चौथा- आपके लिए सिर्फ कॉलेज मैटर करता है या उससे जुड़ी दूसरी चीजें भी मायने रखती हैं? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद आपके लिए कॉलेज सेलेक्ट करना थोड़ा आसान हो जाएगा। इसके अलावा एडमिशन लेने से पहले इन चार बातों पर ध्यान जरूर दें।।।

कॉलेज की रैंक

कई संस्थाएं और वेबसाइट्स कॉलेजेस को रैंकिंग्स प्रोवाइड करती हैं, जो अलग-अलग फैक्टर्स पर निर्भर करती है। हालांकि लॉ कॉलेज की रैंकिंग के लिए तीन फैक्टर्स पर ध्यान जरूर दिया जाता है: एक- कॉलेज कितना पुराना है, दूसरा- कोर्स के लिए सीटों की संख्या कितनी है और तीसरा- मूट क्लासेज और दूसरी एक्टिविटीज कितनी फ्रीक्वेंट्ली होती है। इन फैक्टर्स पर मिलने वाली रेटिंग क्रेडिबिल होती है, और सही तस्वीर भी पेश करती है।

इंफ्रास्ट्रक्चर की मौजूदग

यह बेहद इंपॉर्टेंट प्वॉइंट है। एडमिशन से पहले इस बात को लेकर तसल्ली जरूर कर लें कि कॉलेज में सभी स्टूडेंट्स के लिए जरूरी इक्विपमेंट्स मौजूद हों, जैसे- कंप्यूटर लैब, मूट कोर्ट, लाइब्रेरी आदि साथ ही इन इक्विपमेंट्स का तकनीक के लिहाज से लेटेस्ट होना भी जरूरी है। ऐसे में अगर आपको ऐसे दो कॉलेजेस में किसी एक को सेलेक्ट करना हो, जो रैंकिंग में एक-दूसरे के करीब हैं, तो इस फैक्टर की हेल्प से डिसीजन ले सकते हैं।

फैकल्टी

अमूमन सभी कॉलेजेस में हाइली क्वॉलिफाइड प्रोफेसर्स होते हैं इसलिए इस फैक्टर को लेकर स्टूडेंट्स को बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। बस, एडमिशन से पहले कॉलेज के एक्स या सीनियर स्टूडेंट्स से कॉलेज में होने वाली क्लासेज के बारे में पूरी जानकारी जरूर ले लें।

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लोकेशन
कॉलेज की लोकेशन भी एक इंपॉर्टेंट फैक्टर है क्योंकि कॉलेज पहुंचने में लगने वाला समय या ट्रांसपोर्टेशन स्टूडेंट्स की परफॉर्मेंस को सीधे तौर पर एफेक्ट करता है। अगर दूसरे शहर में एडमिशन ले रहे हैं, तो ट्रांसपोर्टेशन की सारी जानकारी होनी और भी जरूरी है। कई संस्थाएं और वेबसाइट्स कॉलेजेस को रैंकिंग्स प्रोवाइड करती हैं, जो अलग-अलग फैक्टर्स पर निर्भर करती है। ऐसे में एडमिशन से पहले इन रैंकिंग्स पर ध्यान जरूर दें।



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