रोनाल्डो का गोल रोकने वाला ये ईरानी गोलकीपर कभी सोता था सड़क पर

2018-06-26T04:17:43+05:30

पुर्तगाल के स्टार खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो का गोल रोककर रातोंरात चर्चा में आया ये ईरानी गोलकीपर अलीरेजा बेरनवांद कौन है। आइए जानते हैं

रोनाल्डो को गोल रोकने वाला ये हीरो
कानपुर। मंगलवार को फीफा वर्ल्ड कप में ग्रुप बी का एक रोमांचक मुकाबला खेला गया। पुर्तगाल और ईरान के बीच यह मैच 1-1 से ड्रा रहा। बीच मैच में पुर्तगाल के पास एक और गोल का मौका आया था मगर टीम के स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो उसमें चूक गए जिसके चलते मैच उनके हाथ से निकल गया। दरअसल हुआ यूं कि पुर्तगाल की टीम 1-0 से आगे चल रही थी तभी 53वें मिनट में मिली पेनाल्टी को रोनाल्डो गोल में नहीं बदल पाए। ईरान के गोलकीपर अलीरेजा बेरनवांद ने अंदाजा लगा लिया था कि गेंद कहां आएगी और उन्होंने रोनाल्डो की किक को रोककर अपनी टीम के लिए एक गोल बचा लिया। यह गोल रेाकते ही अलीरेजा की चर्चा चारों तरफ होने लगी। तो आइए द गार्जियन में छपी एक रिपोर्ट के आधार पर जानें आखिर ये अलीरेजा है कौन और कहां से आया।

बंजारा परिवार में हुआ था जन्म

ईरानी गोलकीपर अलीरेजा दरअसल एक बंजारा फैमिली में पैदा हुए थे, जिनके पास न कोई घर था न ही ठिकाना। यह भेड़ पाला करते थे और उनके चारा के लिए एक जगह से दूसरी जगह घूमना इनकी मजबूरी थी। अलीरेजा चाहते थे कि वह पिता की तरह सिर्फ भेड़ नहीं चराएंगे। 12 साल की उम्र में अलीरेजा ने एक लोकल फुटबॉल टीम की तरफ से खेलना शुरु कर दिया। अलीरेजा ने अपने करियर की शुरुआत बतौर स्ट्राइकर की थी मगर एक दिन उनकी टीम का गोली चोटिल हो गया जिसकी जगह अलीरेजा को गोलकीपर बना दिया। उस मैच में अलीरेजा ने इतना बेहतर परफॉर्म किया कि उन्हें रेगुलर गोलकीपर रख लिया गया। हालांकि अलीरेजा के पिता अपने बेटे के गोलकीपर बनने से नाराज थे। यहां तक कि उन्होंने अलीरेजा के खेलने पर ही प्रतिबंध लगा दिया, फिर क्या एक दिन अलीरेजा अपने सपने को पूरा करने घर से भागकर तेहरान पहुंच गए।
सड़क पर सोना पड़ता था
राजधानी पहुंचते ही अलीरेजा को एक घरेलू टीम में खेलने का मौका मिल गया मगर अंजान शहर में उनके पास रहने के लिए कोई घर नहीं था। ऐसे में अलीरेजा वहां के आजादी टॉवर के बाहर सोने लगे। द गार्जियन को दिए एक इंटरव्यू में अलीरेजा बताते हैं, 'मैं कभी-कभी क्लब के दरवाजे के बाहर ही सो जाता था। सुबह जब मैं उठता तो मेरे हाथ में कुछ सिक्के होते थे जिसे वहां से गुजर रहे लोगों ने रखे होते थे। वे मुझे भिखारी समझते थे! खैर मैं उन पैसों से बढिया नाश्ता कर लेता था।' अलीरेजा को पैसों की काफी जरूरत होती थी, ऐसे में वह अपने एक साथी खिलाड़ी के पिता की फैक्ट्री में काम करने लगे और रात में वहीं सो जाते थे। धीरे-धीरे समय गुजरता गया और अलीरेजा फिर नफ्त-ए-तेहरान क्लब से जुड़ गए वहां जाकर उन्हें एक कमरा मिला। मगर पैसों की तंगी तब भी थी ऐसे में अलीरेजा ने पहले पिज्जा शॉप में काम किया और फिर सड़क पर झाड़ू लगाने लगे। अलीरेजा को यह सब काम करता देख एक दिन फुटबॉल क्लब के कोच ने उन्हें लताड़ा कि तुम यही सब करने यहां आए थे, फिर क्या अलीरेजा ने दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देख और फुटबॉल खेलने में जी-जान से जुट गए। बाद में वह ईरान की अंडर-23 टीम का हिस्सा बने।

वर्ल्ड कप में खूब छाए

साल 2015 में अलीरेजा नेशनल टीम के गोलकीपर बने। रूस में आयोजित हो रहे फीफा वर्ल्ड कप के लिए ईरान को क्वॉलीफायर मैच खेलना था तब अलीरेजा ने अपनी टीम को यहां तक पहुंचाने में मदद की। खैर इस वर्ल्ड कप प्वॉइंट्स टेबल में ईरान के 4 अंक है और उम्मीद है कि उनकी टीम नॉकआउट में पहुंच जाएगी।
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