जब जैसे चाहा छात्रों की सरकार को रौंद डाला

2019-03-15T06:00:08+05:30

2012 से शुरु हुआ सिलसिला अब तक नहीं थमा

vikash.gupta@inext.co.in

ALLAHABAD: वर्ष 2007 से छात्रसंघ चुनाव पर रोक के बाद केन्द्र में यूपीए गवर्नमेंट के कार्यकाल में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल किया गया। इसकी घोषणा इविवि के पूर्व कुलपति प्रो। एके सिंह के कार्यकाल में वर्ष 2012 में हुई। उस समय कुलपति प्रो। एके सिंह छात्र परिषद गठन के पक्ष में थे। लेकिन इविवि में छात्रों के लंबे आन्दोलन के बाद प्रो। एके सिंह को नई दिल्ली से मिले निर्देश के बाद मजबूरन छात्रसंघ चुनाव की घोषणा करनी पड़ी। तर्क था कि छात्र परिषद की जगह स्वतंत्र छात्रसंघ ही छात्रों की मुखर आवाज की अगुवाई कर सकता है.

उपाध्यक्ष- महामंत्री पर कसा शिकंजा

इविवि में छात्रसंघ चुनाव की बहाली के बाद अब तक कुल सात छात्रसंघ चुनाव हो चुके हैं। लेकिन इनमें कोई भी ऐसा नहीं रहा जो छात्रों की उम्मीदों पर खरा उतरा हो। मौजूदा समय में छात्रसंघ महामंत्री शिवम सिंह और उपाध्यक्ष अखिलेश यादव पर विवि प्रशासन का शिकंजा कसता जा रहा है। वैसे यह कोई पहला वाकया नहीं है, जब विवि प्रशासन और छात्रसंघ के बीच खटास बढ़ी हो। इससे पहले के छात्रसंघ की भी गर्दन मरोड़ने का काम विवि प्रशासन ने किया है। बात 2012 के पहले चुनाव से शुरु करते हैं। 2012 के पहले चुनाव मे समाजवादी छात्रसभा के दिनेश सिंह यादव को अध्यक्ष पद पर जीत हासिल हुई। उपाध्यक्ष पद पर आइसा से शालू यादव तथा महामंत्री पद के चर्चित चुनाव में अभिषेक सिंह माइकल को जेल से हंगामेदार विजय हासिल हुई थी।

पहले निर्वाचन से ही सिलसिला

वर्ष 2012 के पहले चुनाव में निर्वाचित अध्यक्ष- उपाध्यक्ष को अंतिम समय में निष्कासन- निलंबन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अध्यक्ष दिनेश यादव का निर्वाचन ही अवैध करार दे दिया। दिनेश पर कुलपति कार्यालय के भीतर घुसकर तोड़फोड़ व मारपीट का आरोप भी लगा। वर्ष 2013 के चुनाव में स्व। कुलदीप सिंह केडी प्रतियोगी छात्र मोर्चा के पैनल से अध्यक्ष पद का चुनाव जीते थे। वर्ष 2014 के चुनाव में समाजवादी छात्रसभा के पैनल से भूपेन्द्र सिंह यादव अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए थे। इस चुनाव में सछास के संदीप यादव झब्बू महामंत्री निर्वाचित हुए तो उपाध्यक्ष नीलू जायसवाल आइसा से निर्वाचित हुई। वर्ष 2013 और 2014 के छात्रसंघ का कार्यकाल हल्के फुल्के हो हल्ले के साथ कब बीत गया पता ही नहीं चला.

15 मार्च को कार्यकाल खत्म

सबसे हंगामेदार 2015 का छात्रसंघ रहा। इसमें आजादी के बाद चुनी गई पहली महिला छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह अपने पूरे कार्यकाल में छाई रही। इनके कार्यकाल का शुरुआती समय एबीवीपी से उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू, संयुक्त सचिव श्रवण जायसवाल और सांस्कृतिक मंत्री जितेन्द्र शुक्ला कवि विशाल के साथ भिड़ंत में बीता। बाद में ऑनलाइन- ऑफलाइन एग्जाम समेत कुलपति प्रो। आरएल हांगलू के साथ विवादों को लेकर पूरा छात्रसंघ एक मंच पर आ गया और कुलपति के खिलाफ पूरे समय मोर्चा खोले रखा। हाल ये हुआ कि विवि के डीएसडब्ल्यू कार्यालय को नोटिस जारी करके बताना पड़ा कि छात्रसंघ का कार्यकाल 15 मार्च 2016 को खत्म हो गया है।

आगे भी जारी रही बगावत

कुलपति के खिलाफ ऋचा और विक्रांत की बगावत वर्ष 2016 में भी जारी रही। इसकी कमान निर्वाचन के आधे समय बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अध्यक्ष चुनकर आए रोहित मिश्रा ने संभाली। बाद में इनका साथ छात्रसभा से उपाध्यक्ष चुने गए आदिल हमजा ने भी दिया। इनकी अगुवाई में आन्दोलनकारियों को ताबड़तोड़ निष्कासन और निलंबन का सामना करना पड़ा। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का भी कैम्पस में प्रवेश प्रतिबन्धित कर दिया गया। वर्ष 2017 के चुनाव में छात्रसभा से अध्यक्ष अवनीश कुमार यादव, उपाध्यक्ष चन्द्रशेखर चौधरी, संयुक्त मंत्री भरत सिंह और सांस्कृतिक मंत्री अवधेश कुमार पटेल शानू को जीत मिली थी। चार महत्वपूर्ण पद पर छात्रसभा तो महामंत्री पर निर्भय कुमार द्विवेदी को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जीत हासिल हुई थी। इनमें कुलपति के खिलाफ मुंह खोलते ही अवनीश यादव के खिलाफ परीक्षा के दौरान दूसरे से उत्तर पुस्तिका लिखवाने का प्रकरण सामने लाया गया तो निर्भय द्विवेदी का पेंच कसने में भी विवि प्रशासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

विवि प्रशासन का रवैया छात्रसंघ के प्रति दोषपूर्ण रहा है। छात्रसंघ हमेशा से इनकी पोल खोलता रहा है। यही कारण है कि छात्रसंघ को प्रताडि़त करने की इनकी आदत शुरु से रही है। इन्ही की खुली छूट पर पुलिस मेरे साथ चैम्बर में घुसकर मारपीट करती है.

अखिलेश यादव, छात्रसंघ उपाध्यक्ष

छात्रसंघ को विगत कई वर्षो से बदनाम किया जा रहा है। छात्रसंघ को गुंडा और अराजक कहने वालों को करारा जवाब दिया जाएगा। पदाधिकारी अब सत्ताभोगी उच्च अधिकारियों के काले चिट्ठे को उजागर करने का काम करेंगे। खुद पर लगे आरोपों का सबूत के साथ जवाब दूंगा.

शिवम सिंह, महामंत्री

निष्कासन- निलंबन इनकी पुरानी फितरत रही है। हम बात करते हैं छात्र कल्याण की और ये बात करते हैं अपने परिवार कल्याण की। ऐसे ही छात्रसंघ को प्रताडि़त करेंगे तो पूरा छात्रसंघ एकजुट होकर आन्दोलन करेगा.

सत्यम सिंह सनी, संयुक्त मंत्री

विवि प्रशासन की तानाशाही से मुझे आश्चर्य है। वर्तमान में परीक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में मामले को जानबूझकर उलझाकर कैम्पस का माहौल खराब करने के लिए महामंत्री पर कार्रवाई को अंजाम दिया गया है.

रोहित मिश्रा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष

पदाधिकारियों पर कार्रवाई कोई पहली बार नही है। ऐसा विवि द्वारा भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए किया जाता रहा है। विवि प्रशासन को अपनी ओछी हरकत पर विचार करना चाहिए। नहीं तो आगे की जिम्मेदारी विवि प्रशासन की होगी.

निर्भय द्विवेदी, पूर्व महामंत्री

inextlive from Allahabad News Desk


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