इलाहाबाद यूनिवर्सिटी देगी गुमनाम क्रांतिकारियों को नाम! इतिहास विभाग में बनेगी फ्रीडम फाइटर गैलरी

2019-05-22T09:31:38+05:30

एयू के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग की अनोखी पहल बनेगी फ्रीडम फाइटर्स की गैलरी

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PRAYAGRAJ: देश को आजादी दिलाने में इलाहाबाद के असंख्य क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया था। आज इन क्रांतिकारियों को जानने वाला कोई नहीं है। जंग-ए-आजादी में ऐसे ही गुमनाम क्रांतिकारियों की कहानियों और उनके जीवन से जुड़े दस्तावेजों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग ने अनोखी पहल की है। इसके लिए विभाग में फ्रीडम फाइटर गैलरी को स्थापित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

विभाग ने किया संपर्क, शुरू हुई छानबीन
विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो। योगेश्वर तिवारी ने विभाग में फ्रीडम फाइटर गैलरी की स्थापना को लेकर मई के पहले हफ्ते में प्रयास शुरू किया था। इस क्रम में प्रो। तिवारी ने प्रयागराज के क्षेत्रीय अभिलेखागार, लखनऊ के क्षेत्रीय अभिलेखागार व नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार में संपर्क किया है। यहां से पत्र व्यवहार के जरिए इलाहाबाद के गुमनाम क्रांतिकारियों के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान से संबंधित दस्तावेज और दुर्लभ चित्रों की मांग की गई है।

खास बातें
देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश की आजादी तक के आंदोलन में शामिल इलाहाबाद के क्रांतिकारियों पर केन्द्रित फ्रीडम फाइटर गैलरी स्थापित की जाएगी।

-नई दिल्ली, प्रयागराज और लखनऊ के क्षेत्रीय अभिलेखागार से वार्ता की गई है। वहां के अधिकारियों ने जून महीने तक क्रांतिकारियों के दस्तावेज और दुर्लभ चित्रों को देने का आश्वासन दिया गया है।

-गैलरी के लिए विभाग के दौ सौ मीटर के एरिया में बने लॉन को चयनित किया गया है। इसका सौंदर्यीकरण कराकर दीवारों की पेंटिंग कराई जा चुकी है।

-विभाग में फ्रीडम फाइटर गैलरी को आठ जुलाई तक स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

-इसकी बड़ी वजह यह है कि उसी दिन से विश्वविद्यालय का नया एकेडमिक सेशन शुरू होगा।

-गैलरी में लगाई जाने वाली इलाहाबाद के गुमनाम क्रांतिकारियों के दस्तावेजों और दुर्लभ चित्रों का महत्व बताने के लिए शिक्षकों द्वारा छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन दस-दस मिनट का टाइम दिया जाएगा।

सौ साल से भी पुराना है विभाग
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना अल्फ्रेड लायर की प्रेरणा से वर्ष 1887 में हुई थी। जबकि मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग की स्थापना वर्ष 1912 में हुई थी और विभाग के पहले अध्यक्ष प्रो। एलएफ रूसब्रुक विलियम्स थे।

यह यूनिवर्सिटी के प्राचीन विभागों में से एक है। इसलिए युवा पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता आंदोलन में इलाहाबाद के गुमनाम क्रांतिकारियों की अमूल्य निधि से रूबरू कराने के लिए फ्रीडम फाइटर गैलरी स्थापित की जा रही है। जिससे नए एकेडमिक सेशन में आने वाले छात्र-छात्राओं को प्रयागराज के क्रांतिकारियोंका देश को आजादी दिलाने में योगदान का महत्व बताया जा सके।

-प्रो। योगेश्वर तिवारी, अध्यक्ष मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग इविवि


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