अब दुकानों के आवंटन में भी खेल

2019-05-03T06:00:59+05:30

-पुरानी जगहों पर नहीं उठी ज्यादा रेट पर तो नई जगह पर देंगे

-एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस व धार्मिक स्थानों के करीब खोलने की भी दे दी मंजूरी

देहरादून, उत्तराखंड के इतिहास में शायद पहला मौका है जब आबकारी विभाग शराब की दुकानों की बिक्री न होने के कारण संकट से जूझ रहा है। लाख कोशिशों के बाद भी जो दुकानें सेल आउट हो रही हैं, उसमें भी अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों की अनदेखी की जा रही है। बड़े बजट की दुकानें सेल आउट न होने की दशा में खरीदारों को नई जगह पर सस्ते दामों में दुकानें आवंटित की जा रही हैं। दून के पटेलनगर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिससे सरकार को लाखों रुपए के घाटे का अनुमान है। सूत्र बताते हैं कि पटेलनगर इलाके में जिस दुकानदार के नाम बीते फाइनेंशियल इयर में दुकान आवंटित हुई थी, वह इस बार महंगी होने से सेल आउट नहीं हो पाने की दशा में उसी दुकान के ऑनर को चंद दूरी पर दूसरी शॉप आवंटित कर दी गई है। इधर, इस बार तो यह भी देखने में आया है कि मानकों के मुताबिक एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस व धार्मिक स्थानों के कुछ दूरी पर दुकानें आवंटित कर दी गई हैं, जिसको नियम विरुद्ध बताई जा रहा है।

आवंटित दुकान पर उठे सवाल

वित्तीय वर्ष में अब तक करीब 247 से अधिक शराब की दुकानें सेल आउट होने का इंतजार कर रही हैं। दून में भी जिन दुकानों का आवंटन नहीं हो पाया है, उनकी संख्या थर्सडे शाम तक 28 बताई गई है। इनमें 7 अंग्रेजी और 21 देशी शराब की दुकानें शामिल बताई गई हैं। दुकानें सेल आउट न हो पाने के संकट से उभरने के लिए विभाग ने ऐड़ी-चोटी का जोर जारी रखा है। लेकिन, इसके बावजूद कुछ दुकानें ही आवंटित हुई हैं। इनमें भी मानकों के अनदेखी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पटेलनगर स्थित पेट्रोल पंप के पास की अंग्रेजी शराब की दुकान अब तक सेल आउट नहीं हो पाई है। इस दुकान की कीमत करीब 72 लाख महीना बताई जा रही है। गत वर्ष जिस ऑनर के पास यह दुकान थी, वह इस बार उसको खरीदने के लिए तैयार नहीं हो पाया। कारण जो भी रहे हों, लेकिन बताया जा रहा है कि इसी ऑनर से सहारनपुर रोड पर मंडी के पास चमन विहार में नई दुकान खरीद ली। पटेलनगर का अपनी पुरानी दुकान का बोर्ड भी नई दुकान पर लगा दिया। इस नई दुकान की कीमत करीब 40 लाख रुपये बताई जा रही है। पटेलनगर वाली दुकान आवंटित न होने से सरकार को सालाना करीब 5 करोड़ रुपये राजस्व घाटा उठाना पड़ सकता है। इस बारे में जिला आबकारी अधिकारी का कहना है कि नई दुकान की कोई भी बोली लगा सकता है। लेकिन ऐसी कोई कंप्लेन हो तो वे चेक करवा लेंगे।

प्रतिबंधित जगहों पर ठेके

दुकानों के आवंटन में आबकारी विभाग की हकीकत का इस बात से भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि कई जगहों पर नियमों के विरुद्ध दुकानें आवंटित की गई हैं। नियमानुसार दुकानें एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस व धार्मिक स्थलों से कम से कम 100 मीटर के दायरे से बाहर होने चाहिए। लेकिन, चमन विहार में नई आवंटित दुकान के पास में एजुकेशनल इंस्टीट्यूट व आराघर में दुकान के पास धार्मिक स्थान मौजूद है। आराघर में तो गत वर्ष की तुलना में दुकान धार्मिक स्थान के करीब कर दी गई है।

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प्रमुख बातें

-दून में रखा गया है इस बार 561 करोड़ का लक्ष्य।

-गत वर्ष रखा गया था 437 करोड़ का लक्ष्य।

-दून में कुल देशी-विदेशी दुकानों की संख्या 92, जबकि दो बीयर बार।

-इनमें 37 देशी व 55 अंग्रेजी दुकान हैं शामिल।

-561 करोड़ के लक्ष्य का पीछा करते हुए मार्च तक हासिल हो पाया करीब 392 करोड़

बार की प्रकार

-एफएल-7. केवल रेस्टारेंट बार।

-एफएल-6-सी। बार के साथ होटल।

-एफएल-7बी। केवल बीयर बार।

-एफएल-7 जीओ। सरकारी जैसे मैस।

-एफएल-7-सी। केवल क्बल बार।

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रेवन्यू जेनरेट करने के लिए डिपार्टमेंट के प्रयास जारी हैं। दुकान खरीदने वालों में विश्वास जगाने की कोशिश की जा रही है।

-मनोज उपाध्याय, डीईओ, दून।

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ओवर प्राइसिंग अब भी जारी

राजधानी में ओवर प्राइसिंग का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अब प्रेमनगर स्थित दुकान की भी शिकायतें सामने आ रही है। खुद ग्राहक दैनिक जागरण आईनेक्स्ट को फोन कर प्रेमनगर स्थित दुकान में हो रही ओवरप्राइसिंग को लेकर अपना दर्द सुना रहे हैं। जबकि, विभागीय अधिकारी इस बात को सिरे से खारिज कर रहे हैं। दुकानों के बाहर बोर्ड पर आबकारी के इंस्पेक्टर्स के नंबर व रेट लिस्ट थर्सडे को भी कई दुकानों पर नजर नहीं आए।

inextlive from Dehradun News Desk


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