आश्रि्वनी नक्षत्र एवं आयुष्मान योग में करें शनैश्चरी अमावस्या पूजा

2019-05-03T09:45:03+05:30

4 मई को होने जा रही शनैश्चरी अमावस्या शनि कष्टों के निवारण का दिन है। आयुष्मान योग में पूजा पाठ का मिलेगा कई गुना फल। वृश्चिक धनु एवं मकर राशि पर पड़ सकता है ये प्रभाव

BAREILLY: वैशाख माह में पड़ने वाली शनैश्चरी अमावस्या इस बार चार मई को विशेष योग में मनाई जाएगी। इस दिन आश्रि्वनी नक्षत्र अपराह्न 03:47 बजे तक रहेगा, आयुष्मान योग पूरे दिन रात रहेगा। शनिवार के दिन आश्रि्वनी नक्षत्र एवं आयुष्मान योग होने के कारण सोम योग का बनना अतिशुभ रहेगा। पौराणिक मान्यताओें के अनुसार शनिदेव जी का जन्म शनिवार को अमावस्या तिथि में हुआ था। इसलिए भी शनिवारी अमावस्या का विशेष महत्व है।

कार्य सिद्धि का दिन
बालाजी ज्योतिष संस्थान के पं। राजीव शर्मा के अनुसार अमावस्या तिथि कार्य सिद्ध करने वाली मानी जाती है। इस बार इस अमावस्या का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इस वर्ष के राजा भी शनि हैं। गोचर ग्रहों के अनुसार इस दिन धनु राशि में शनि के साथ केतु का विशेष योग बन रहा है। धनु राशि में शनि के भ्रमण के समय निम्न राशियों पर विभिन्न प्रभाव रहेगा।

राशि पर इस तरह रहेगा प्रभाव

मेष:- नवां शनि पुरानी कष्टकारी स्थितियों को दूर करेगा। दूर स्थान की यात्रा तथा आध्यात्मिक प्रवृत्ति बनेगी।

वृष:- शनि की ढैया का प्रभाव रहेगा, आठवां शनि कष्टकारी रहेगा। विघ्न बाधा बनी रहेगी। देरी से सफलता मिलेगी।

मिथुन:- लेन-देन में गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें, दूसरों से मधुर सम्बंध बनाने में सफलता एवं मान-सम्मान मिलेगा।

कर्क:-मनोरंजन एवं सृजनात्मक कायरें में सफलता मिलने के योग हैं। प्रेम के मामलों में सफलता मिलने के योग हैं।

सिंह:- शनि की ढैया से मुक्ति मिलेगी, जमीन-जायदाद सम्बन्धी विवाद से बचें।

कन्या:- शनि की ढैया के प्रभाव में आयेंगे, पारिवारिक सुख प्राप्त होगा, सामाजिक कार्यो में भागीदारी बढ़ेगी। आर्थिक मामलों में छोटी यात्राओं से लाभ होगा।

तुला:- जमीन-जायदाद के मामलों में सफलता मिलेगी, आर्थिक मामलों में स्थिति मजबूत बनने के योग हैं।

वृश्चिक:- शनि की साढ़े साती के प्रभाव में रहेंगे। दृढ़ इच्छा शक्ति से सफलता मिलने के योग हैं।

धनु:- शनि की मध्य साढ़े साती के प्रभाव में रहेंगे। दृढ़ता से काम लेकर सफलता प्राप्ति के योग हैं।

मकर:- साढ़े साती का प्रथम चरण आरम्भ होगा, कायरें में विलम्ब होंगे, बिगड़े हुए सम्बन्ध बनाने व बढ़ाने पर ध्यान दें।

कुंभ:- व्यवसाय अथवा नौकरी में बदलाव होने की सम्भावना रहेगी। कायरें में अच्छी शुरूआत के योग हैं।

मीन:- उन्नति के अच्छे योग बनेंगे, यात्रा आदि से लाभ होगा।

बचने के उपाय
शनि दोषकृत पीड़ा निवारण के लिए जिन राशि वालों को साढ़े साती या ढैया का प्रकोप हो उनको शनि दोष कृत पीड़ा निवारणार्थ- काला वस्त्र, उड़द, काला पुष्प, लोहा आदि दान करते रहना चाहिए। विशेष विषम परिस्थितियों में सविधि ग्रह शान्ति करायें।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
सुबह को 08:32 बजे से 09:40 बजे तक शुभ के चौघडि़या मुहुर्त में अपरान्ह 12:24 बजे से सायं 04:17 बजे तक चर, लाभ, अमृत के चौघडि़या मुहुर्त में एवं सांय काल 05:35 बजे से रात्रि 07:17 बजे तक लाभ के चौघडि़या मुहुर्त में।
ऐसे करें पूजा
शनि अमावस्या के दिन प्रात: व सांय काल सूर्यास्त के पश्चात स्नान आदि के बाद 'हरड़' का तेल शरीर पर लगायें। पश्चिम दिशा की ओर एक चौकी रख कर उस पर काला वस्त्र बिछायें। श्याम रंग के नीले, लाजवंती के पुष्प बिछायें तथा पीपल के पत्ते पर शनि यन्त्र स्थापित करें, सरसों के तेल का दीपक, धूप जलायें, नैवेद्य चढ़ाने के लिए काले उड़द का हलवा, काले तिल से बने लड्डू अक्षत, गंगालल, बेल पत्र, काले रंग के फूल आदि रखें। चौकी के चाराें ओर तिल के तेल से भरी कटोरियां रखें इसमें काले तिल के दाने, एक सिक्का, एक पंचमुखी रूद्राक्ष डालें। शनि के मन्त्रों का जाप, साधना आदि करने के बाद 7 अथवा 11 शनिवार को इन कटोरियों में अपने चेहरे की छाया देखने के बाद शनिदेव जी का स्मरण के साथ शनि का दान लेने वालों को दे दें। इस प्रकार पूजा अर्चना करने से दुर्घटना, गंभीर रोग, अकाल, मृत्यु, शास्त्राघात से शनिदेव जी मुक्त रखते हैं।
शनि शान्ति के यह करें उपाय
-कच्ची धानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। संकट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा।
-काले रंग के पशुओं को रोटी खिलायें।
-पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दिया जलायें, दिया जला कर उसमें काले उड़द के तीन दाने डालें, इससे सभी कार्य पूर्ण होंगे।
-सिन्दूर और चमेली के तेल का दीपक जलाकर हनुमान जी को लाल लंगोट अर्पित करें।
-हनुमान जी के मन्दिर में एक नारियल स्वास्तिक बना कर हनुमान जी को अर्पण करें साथ ही हनुमान चालीसा, बजरंग बाण का पाठ करें।
-शनिवार या मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिन्दूर और तेल का चोला चढ़ायें।
-हनुमान जी के सम्मुख रात्रि में चौमुखा दीपक जलायें।
-प्रात:काल किसी पीपल के पेड़ को जल चढ़ायें और 7 परिक्रमा करें। -पीपल के नीचे बैठ कर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
शनिवार एवं मंगलवार को 11 पीपल के पत्ते लेकर साफ जल से धोकर इन पत्तों पर चंदन से श्री राम का नाम लिखकर हनुमान जी को अर्पित करें।
-प्रत्येक शनिवार एवं मंगलवार को बनारसी पान चढ़ायें ऐसा करने से हनुमान जी की कृपा बनी रहती है।

 


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