अंबिका प्रोजेक्ट से गायब होगा दून का गार्बेज

2019-06-03T06:00:04+05:30

- छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में नगर पालिका ने अपने यहां सफलता से लागू किया अंबिका प्रोजेक्ट

- महिला समूहों के द्वारा चलाया जा रहा प्रोजेक्ट, दून में भी 35 समूह गठित

- निगम के अफसर और टेक्नीकल टीम जाएगा स्टडी के लिए छत्तीसगढ़

देहरादून, सिटी में गार्बेज कलेक्शन और उसका डिस्पोजल नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। लगातार स्वच्छ सर्वे में पिछड़ने के कारण दून नगर निगम की कई बार किरकिरी भी हुई है। अब गार्बेज कलेक्शन और डिस्पोजल को लेकर नगर निगम एक और पहल करने जा रहा है। सिटी में महिला समूहों के जरिए सुंदर दून का सपना साकार किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में इस टास्क को महिलाओं ने पूरा किया था। इसी तर्ज पर दून में भी कवायद शुरू की जाएगी। इसके लिए निगम की टीम छत्तीसगढ़ जाएगी और गार्बेज कलेक्शन एंड डिस्पोजल के अंबिका प्रोजेक्ट को स्टडी करेगी। इसके बाद उसे दून में इंप्लीमेंट किया जाएगा।

अंबिका प्रोजेक्ट पर एक नजर

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर नगरपालिका ने गार्बेज कलेक्शन और डिस्पोजल का नायाब प्लान बनाया था। सिटी के नाम से ही इस प्रोजेक्ट का नाम भी अंबिका रखा गया। इसके लिए जरूरतमंद महिलाओं को सिलेक्ट किया गया, उनके ग्रुप बनाए गए और उन्हें डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की जिम्मेदारी दी गई। महिला समूहों को कूड़ा कलेक्शन के लिए ऑटो भी फाइनेंस करके दिये गए। ग्रुप की महिलाओं को दीदी नाम दिया गया है।

गार्बेज का सेग्रीगेशन

अंबिकापुर में महिलाएं ही इस प्रोजेक्ट की रीढ़ हैं। वे सुबह गार्बेज कलेक्शन सेंटर पहुंचती हैं, बायोमेट्रिक अटैंडेंस के बाद अपने-अपने इलाके में कूड़ा कलेक्शन के लिए निकल जाती हैं। कूड़ा कलेक्शन के बाद सेंटर लाया जाता है और उसका सेग्रीगेशन किया जाता है। सूखा कूड़ा 16 और गीला कूड़ा 12 कैटगरी में बांटा जाता है। इसके बाद सूखा कूड़ा रिसाइकिलिंग और गीला कूड़ा खाद बनाने के लिए भेज दिया जाता है। इससे हुई इनकम से ही महिलाओं की सैलरी जनरेट होती है।

घर से ही कूड़ा सैपरेट

नगर पालिका द्वारा सिटी में लोगों को अवेयर किया गया कि वे गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग डस्टबिन्स में रखें। इसके लिए उन्हें दो-दो डस्टबिन दिए गए। ताकि गार्बेज सेग्रीगेशन में दिक्कत न हो। इस गार्बेज को सीधे कलेक्शन सेंटर लाया जाता है और यहां से रिसाइकिलिंग के लिए फैक्टरी भेज दिया जाता है। नगर पालिका क्षेत्र में कहीं भी डंपिंग जोन नहीं है।

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दून में 35 महिला समूह गठित

नगर निगम देहरादून द्वारा अंबिका प्रोजेक्ट के तहत प्रारंभिक तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। निगम द्वारा अब तक 35 महिला समूह गठित कर लिए गए हैं, जो इस प्रोजेक्ट को दून में इंप्लीमेंट करने में मदद करेंगे।

नॉन डिग्रेडेबल गार्बेज रिसाइकिलिंग प्लांट की तैयारी

सिटी से कलेक्ट होने वाले नॉन डिग्रेडेबल गार्बेज की रिसाइकिलिंग के लिए दून नगर निगम हाईटेक प्लांट लगाने की तैयारी कर रहा है। इसका प्रपोजल भी राज्य सरकार को भेज दिया गया है। स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है। प्लांट के निर्माण में 120 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है, ये रकम शीशमबाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का संचालन कर रही कंपनी रैमकी द्वारा वहन की जाएगी।

दून निगम के लिए चुनौतियां

आबादी- अंबिकापुर नगर पालिका क्षेत्र में सिर्फ 300 घर हैं, दून में इनकी संख्या डेढ़ लाख है। ऐसे में इतने बड़े आबादी क्षेत्र में प्रोजेक्ट को प्लान करना आसान नहीं।

रिसाइकिलिंग प्लांट- नगर निगम के पास अभी तक गार्बेज रिसाइकिलिंग की व्यवस्था नहीं है। हालांकि, इसके लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया है, लेकिन वह कब तक स्वीकृत होगा और बनेगा। इसकी गारंटी नहीं है।

मैन पावर- निगम के पास वैसे ही मैन पावर की कमी है, इसे देखते हुए अधिकांश सेनिटेशन की व्यवस्था ठेके पर चल रही है। हालांकि, प्रोजेक्ट के तहत महिला ग्रुप्स के जरिए काम लिया जाएगा, लेकिन 100 वार्डो के लिए इतने ग्रुप गठित करना भी बड़ी चुनौती है।

पब्लिक अवेयरनेस- दून में सेनिटेशन को लेकर पब्लिक अवेयरनेस की कमी है। लोग घर से कूड़े को सैपरेट नहीं करते। मिक्स कूड़ा ही डोर-टू-डोर कलेक्ट किया जाता है। सिटी की आबादी करीब 10 लाख है, इतने लोगों को अवेयर करना बड़ा टास्क होगा, दून में करीब डेढ़ लाख घर हैं, दो तरह का कूड़ा स्टोर करने के लिए तीन लाख डस्टबिन बांटने होंगे, इनकी लागत काफी ज्यादा होगी।

निगम के प्लस प्वाइंट

- शीशमबाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, जहां गीले कूड़े से खाद बनाने की व्यवस्था पहले से है।

- डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की कसरत पहले से चल रही है, ऐसे में ये काम और आसान हो जाएगा।

- नॉन बॉयो डिग्रेडेबल कूड़े की रिसाइकिलिंग के लिए पहले से प्रोजेक्ट तैयार कर लिया गया है, इसे शासन की मंजूरी मिलते ही बनाना शुरू कर दिया जाएगा।

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छत्तीसगढ़ के अंबिका प्रोजेक्ट को दून में भी लागू करने को लेकर मंथन जारी है। बोर्ड मीटिंग में इस पर चर्चा होगी और सुझाव लिए जाएंगे। इसके लिए नगर निगम के अफसर और टेक्नीकल टीम को जल्द ही अंबिकापुर स्टडी के लिए भेजा जाएगा।

सुनील उनियाल गामा, मेयर

inextlive from Dehradun News Desk


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