and My Vote Goes To Nobody!

2012-02-03T14:07:00+05:30

असेम्बली इलेक्शन में अगर कोई भी प्रत्याशी आपकी कसौटी पर खरा नहीं उतर रहा है तो आप ‘रिफ्यूज टू वोट’ ऑप्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं

इस व्यवस्था के तहत आपको वोट देने की प्रक्रिया तो पूरी करनी होगी.  लेकिन, ईवीएम का बटन दबाने के बजाय पोलिंग बूथ पर अवेलेबल फॉर्म नंबर 17-ए पर अपनी आपत्ति दर्ज करानी होगी। तो फिर इस बार आप कैंडीडेट्स को जांच परखकर ही वोट दें।

हर बूथ पर मिलेगी ये facility
‘रिफ्यूज टू वोट’ फैसिलिटी हर एक बूथ पर अवेलेबल होगी। अगर कोई वोटर यह ऑप्शन चूज करता है तो चुनाव आयोग इसका सीधा मतलब निकालेगा कि संबंधित वोटर की नजर में उस विधानसभा सीट का कोई भी प्रत्याशी वोट देने लायक नहीं है। डिप्टी इलेक्शन ऑफिसर एसके सिंह ने बताया कि पोलिंग बूथ पर प्रिसाइडिंग  ऑफिसर के पास फॉर्म नंबर 17-ए मौजूद रहेंगे। अगर कोई वोटर अपना वोट एक्सरसाइज नहीं करना चाहता तो वो यह ऑप्शन ऑप्ट कर सकता है।

कैंसिल होगा कैंडीडेचर

कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल 1961 के सेक्शन 49-ओ के तहत वोटर को ‘रिफ्यूज टू वोट’ का राइट हासिल है। खास बात यह कि अगर ‘रिफ्यूज टू वोट’ की संख्या विनर कैंडीडेट को मिले वोट से ज्यादा होगी तो वहां दोबारा चुनाव कराने का प्रावधान है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी विनिंग कैंडीडेट को 60,000 वोट मिलते हैं और उस सीट पर सेक्शन 49-ओ के तहत 60,001 मामले दर्ज होते हैं तो इसका मतलब यह हुआ कि वहां की जनता को कोई भी वोटर पसंद नहीं है।
ऐसी सिचुएशन में आयोग वहां री-पोलिंग यानि दोबारा वोटिंग करवाएगा। इसके साथ ही पहली बार लड़ चुके प्रत्याशियों की कैंडीडेचर भी कैंसिल कर दी जाएगी। री-पोलिंग के दौरान सभी पार्टियों को फ्रेश कैंडीडेट्स खड़े करने होंगे।



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