अमीरों के ‘राशन’ में सेंधमारी!

2013-12-16T09:03:01+05:30

kanpur एपीएल कार्ड होल्डर्स के लिए खास खबर है खासकर उनके लिए जो कंट्रोल रेट पर राशन नहीं खरीदते खबर है ऐसे कार्ड होल्डर्स के राशन में हर महीने सेंधमारी हो रही है जानकारी पर कमिश्नर ने एपीएल कार्ड होल्डर्स की तरफ से मंथली डिमांड और उसके एवज में सप्लाई होने वाले राशन की जांच के आदेश दिये हैं

साढ़े नौ लाख से ज्यादा
कानपुर में 9.58 लाख एपीएल कार्ड धारक हैं। अर्बन एरिया में साढ़े सात लाख जबकि ढाई लाख से ज्यादा कार्ड होल्डर्स रूरल एरिया में है। बतौर राशन एपीएल कार्ड होल्डर को सिर्फ गेंहू दिये जाने का प्रावधान है। एक कार्ड पर 6.771 किलो गेंहू दिये जाने का प्रावधान है। मगर, सप्लाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार करीब 25 परसेंट यानि 2.39 लाख लोग राशन उठाते ही नहीं है। डिपार्टमेंट के ऑफिसर्स का कहना है कि इस कैटेगरी में सोसाइटी का ए-क्लास सेगमेंट शामिल है। जोकि अपर मिडिल क्लास व हायर क्लास सेगमेंट से ताल्लुक रखते हैं।

हजारों किलो बचत, फिर भी डिमांड  
कंट्रोल रेट पर राशन नहीं उठाने की वजह से कुल 1621.65 मीट्रिक टन गेंहू की बचत हर महीने होती है। सप्लाई इंस्पेक्टर रामकृष्ण यादव ने बताया कि बचत के राशन को अन्य एपीएल कार्ड धारकों में बंटवा दिया जाता है। वो भी पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर। हैरानी की बात यह कि इसके बावजूद बकाया लोगों को राशन मिल नहीं पाता। फिर उन लोगों की डिमांड कैसे पूरी की जाती है इस बारे में सप्लाई ऑफिसर्स ने बताया कि जिन लोगों को राशन मिल नहीं पाता, उन्हें अगले महीने प्रायोरिटी बेसिस पर राशन मुहैया कराया जाता है। इस बारे में राशन दुकानदारों को भी दिशा-निर्देश दिये गये हैं।


हर महीने एक करोड़ का घपला!
अगर 2.39 लाख एपीएल कार्ड धारक अपने हिस्से का गेंहू नहीं खरीद रहे हैं तो हर महीने 1,070,2,919.70 रूपए का घपला सामने आ रहा है। फिलहाल, यह महज आंकलन है, फंड इससे ज्यादा भी हो सकता है। सप्लाई विभाग के अफसर कुछ भी दावा करें, लेकिन हकीकत यही है कि डिमांड की सप्लाई कभी भी पूरी नहीं हो पाती है। खुद सप्लाई विभाग के आंकड़े बताते हैं कि हर महीने 95 हजार एपीएल कार्ड होल्डर्स को अपने हिस्से का राशन पाने के लिए एक महीने का इंतजार करना पड़ता है। डिमांड की सप्लाई नहीं होने की जानकारी पर कमिश्नर महेश गुप्ता ने कोटा आवंटन की सही-सही जांच के आदेश दिये हैं। जिससे यह पता लगाया जा सके कि आखिर अमीरों के हिस्से का राशन सही-सही किसके हाथों में जा रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि एपीएल कोटा ब्लैक करके प्राइवेट दुकानों में पहुंचाया जा रहा है? कमिश्नर के आदेशों के तहत दोषी पाये जाने वाले अफसरों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।
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छह महीने तक उठान नहीं
एपीएल कार्ड होल्डर्स को अप्रैल-सितंबर तक राशन मिला ही नहीं। इस बारे में डीएसओ संतोष रंजन ने बताया कि इस टाइम पीरियड में गेंहू के कोटे की उठान ही नहीं हुई। अक्टूबर-नवंबर के कोटे का गेंहू आवंटित किया गया है। दिसंबर का कोटा मिलते ही डिस्ट्रिब्यूशन करवाया जाएगा।
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हर कैटेगरी का अलग-अलग कोटा :
राशन की दुकानों पर गेंहू, चावल और चीनी कंट्रोल रेट पर पब्लिक को मुहैया कराई जाती है। एपीएल को राशन की दुकान से सिर्फ गेंहू मिलता है। जबकि बीपीएल और अंत्योदय कैटेगरी के लोगों को गेंहू के अलावा शक्कर और चावल भी कंट्रोल रेट पर दी जाती है।
गेंहू -  
एपीएल : रेगुलर कोटा :    4,324 मीट्रिक टन प्रति माह
          एडिशनल कोटा : 2,162 मीट्रिक टन प्रति माह
बीपीएल : 1532 मीट्रिक टन
अंत्योदय : 947 मीट्रिक टन
चावल -
एपीएल : निल
बीपीएल : 2043 मीट्रिक टन
अंत्योदय : 1262 मीट्रिक टन
चीनी -
एपीएल : निल
बीपीएल व अंत्योदय : 513 मीट्रिक टन
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रेट चार्ट -
राशन दुकानों पर गेंहू, चावल और चीनी का कंट्रोल रेट इस प्रकार से हैं
आइटम    कार्ड       अंत्योदय    एपीएल
  गेंहू      4.65 रूपए     2 रूपए     6.60 रूपए
चावल     6.15 रूपए     3 रूपए       -
चीनी       14              14           -
(नोट : चीनी की कीमत 700 ग्राम प्रति यूनिट के हिसाब से.)
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कानपुर में राशन कार्ड की संख्या :  
सिटी में एपीएल, बीपीएल और अंत्योदय तीन कैटेगरी के राशन कार्ड का आवंटन हुआ है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मिलाकर यह संख्या 11 लाख से भी ज्यादा है
कैटेगरी        अर्बन    रूरल     टोटल
एपीएल         7,64,153  2,53,847  9,58,000
बीपीएल          37,565    64,596   1,02,161
अंत्योदय         22,982   40,148     63,148
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कुल संख्या   8,24,700   3,58,591    11,23,309
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सिटी में राशन की दुकानें अर्बन और रूरल दोनों क्षेत्रों में निर्धारित संख्या में एलॉट की गई हैं।
अर्बन एरिया - 882  रूरल एरिया - 779
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टोटल दुकानें - 1461
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(नोट : केरोसिन के थोक विक्रेताओं की संख्या 25 है)
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