दुश्मन की हर नापाक हरकत का 10 गुना जवाब दे रही सेना पूर्व ले जनरल

2019-01-24T08:40:10+05:30

भारतीय सेना पाकिस्तान की हर हरकत का 10 गुना जवाब दे रही है

- केजीएमयू में नेता जी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बोले, उत्तर कमान के पूर्व सेनाध्यक्ष दीपेंद्र सिंह हुड्डा

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LUCKNOW : भारतीय सेना पाकिस्तान की हर हरकत का 10 गुना जवाब दे रही है. चाहे शेलिंग का मसला हो या फिर सैनिकों के शहादत का बदला हो सेना के हाथ पूरी तरह खुले हुए हैं. सेना की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तानी सेना में भय की स्थिति है. भारतीय सेना एक सक्षम सेना है यदि आवश्यकता पड़ती है तो निश्चित ही सेना कभी भी सर्जिकल स्ट्राइक का दोबारा कर सकती है, लेकिन यह सब बताकर नहीं किया जाता. बुधवार को केजीएमयू में नेता जी सुभाषचंद्र बोस जयंती के अवसर पर उत्तर कमान के पूर्व सेनाध्यक्ष ले. जनरल (रिटायर्ड) दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कही. वह यूथ इन एक्शन व यूथ ऑफ मेडिकोज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'आधुनिक भारत और हमारी भारतीय सेना' पर मेडिकोज को सेना की परिस्थितियों से रूबरू करा रहे थे.

बिना संपर्क विषम परिस्थितियों में सेना
दीपेन्द्र सिंह हुडा उस समय विशेष रूप से चर्चा में आए जब उनके नेतृत्व में सेना की उत्तरी कमांड ने पाकिस्तान में घुसकर में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था. उन्होंने नेता जी सुभाष चन्द्र बोस को याद करते हुए सशस्त्र सैन्यबलों के शौर्य और सम्मान को याद किया. उन्होंने बताया कि किस तरह विषम परिस्थितियों में सेना विषम हालात में सजग रहते हुए एक एक इंच जमीन की निगरानी करते हैं. कई ऐसी पोस्ट हैं जहां सैनिकों के पहुंचने के लिए रास्ता तक नहीं होता, हेलीकॉप्टर से जंप मारकर वहां पहुंचते हैं. लेह जैसे दुर्गम क्षेत्र में जवान छह महीने तक टिन में रखा खाना खाते हैं. उन्हें ताजा भोजन नहीं मिल पाता. पक्के आवास नहीं होते, जवान बर्फ की गुफा बनाकर उसमें रहते हैं. जवानों के सामने प्राकृतिक कठिनाई कश्मीर व लेह लददाख से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक है.

20 से 30 फीसद बर्फ
ले. जनरल हुड्डा ने बताया कि कश्मीर घाटी की शमशाबारी हाईमाउंटेड रेंज की पोस्ट पर 20 से 30 फीट बर्फ होती है. दुश्मन की पोस्ट सामने होती है और भारतीय सेना का संपर्क कट जाता है. कश्मीर घाटी से लद्दाख जाने के लिए एक रास्ता जोजिला पास और दूसरा रास्ता मनाली होकर जाता है. बर्फ के कारण लद्दाख पांच से छह महीने कटा रहता है. सब कुछ हेलीकॉप्टर से होता है. ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की बहुत कमी होती है. कई बार जवान बीमार हो जाते हैं. अकेले कारगिल में ही 200 से 300 पोस्ट हैं. जहां कई बार तीन से पांच दिन तक हेलीकॉप्टर भी मदद के लिए नहीं पहुंच पाता है.

सबसे ऊंचाई पर सेना
दीपेंद्र ने बताया कि सियाचिन ग्लेशियर में विश्व की सबसे ऊंचाई वाली जह 21 हजार 120 फीट की ऊंचाई पर बाना पोस्ट है. जिस पर एक जवान को 15 दिन में ही बदल दिया जाता है. कार्यक्रम का संचालन यूथ इन एक्शन के सचिव डॉ. भूपेंद्र सिंह ने किया. जबकि केजीएमयू वीसी डॉ. एमएलबी भट्ट ने अपने सेना में तैनाती के समय पर प्रकाश डालते हुए जवानों की कठिनाईयों के बारे में बताया. इस मौके पर यूथ इन ऐक्शन के राष्ट्रीय सचिव शतरुद्र प्रताप, डॉ. संदीप तिवारी, विवेक सोनी, प्रिंसी चौधरी, अनुराग अग्रवाल, आशुतोष, शिवराम, राजीव शुक्ला सहित अन्य लोग मौजूद रहे.


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