प्रधानमंत्री बनने से पहले मखदूम शहाबुद्दीन के खिलाफ वारंट

2012-06-21T03:20:00+05:30

अभी सत्ताधारी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की ओर से मनोनीत प्रधानमंत्री मख़दूम शहाबुद्दीन के नाम को संसद की मंजूरी मिलना शेष है लेकिन इससे पहले ही उनकी गिरफ्तारी का वारंट जारी हो गया है

रावलपिंडी में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की अदालत ने ये वारंट जारी किया। पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के बेटे अली मूसा गिलानी की गिरफ्तारी का भी वारंट जारी किया गया है। मामले की जाँच कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय के पूर्व निदेशक जुमा ख़ान के बयान को बुनियाद बना कर अदालत ने गिरफ्तारी के वारंट जारी किए हैं।

उल्लेखनीय है कि अदालत की अवमानना के मामले में दोषी पाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को अयोग्य करार दिया था। इसके बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने मख़दूम शहाबुद्दीन को नया प्रधानमंत्री मनोनीत किया है। संसद में गुरुवार, 22 जून को उनके नाम पर मंजूरी लेनी है।

बयान

स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी जुमा ख़ान ने अदालत में बयान दिया था कि मख़दूम शहाबुद्दीन ने बतौर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एक दवा बनाने वाली कंपनी को कोटा से ज़्यादा मात्रा में दवा दिलवाने में अपना प्रभाव इस्तेमाल किया।

उनका कहना था कि अली मूसा गिलानी ने अपने पिता पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के पद का फायदा उठा कर उसी दवा बनाने कंपनी को ज़्यादा मात्रा में दवा दिलवाई थी और उसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों पर दबाव डाला था।

जाँचकर्ताओं ने नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की अदालत के जज शफ़क़ातुल्लाह ख़ान से मख़दूम शहाबुद्दीन और अली मूसा गिलानी के वारंट गिरफ्तारी जारी करने का आग्रह किया, जिसे अदालत ने मान लिया। स्वास्थ्य मंत्रालय के पूर्व निदेशक जुमा ख़ान इन दिनों एंटी-नार्कोटिक्स फोर्स यानी एएनएफ़ की हिरासत में हैं।

दबाव का आरोप

एएनएफ़ ने मख़दूम शहाबुद्दीन और अली मूसा गिलानी को जाँच के लिए कई बार बुलाया लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। इस मामले की जाँच एएनएफ़ रावलपिंडी के प्रमुख ब्रिगेडियर फहीम कर रहे हैं।

केंद्र सरकार ने इस मामले की जाँच के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ब्रिगेडियर फ़हीम को इस मामले की जाँच का काम जारी रखने को कहा गया था। ब्रिगेडियर फ़हीम ने आरोप लगाया था कि उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय बुलाया गया था और इस मामले की जाँच न करने के लिए दबाव डाला गया था।


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.