दाम के चक्कर में चली न जाए जान

2019-01-04T06:01:30+05:30

-सड़क पर सेंटर व एज लाइन में बनाने में हो रही भारी लापरवाही

-रात में जिसे दिखना चाहिए दिन में भी उसे देखना मुश्किल

-व्हाइट लाइन बनाने के रेट कम होने का रोना रोते हैं ठेकेदार, दोगुना खर्च की दे रहे दुहाई

पीडब्ल्यूडी को शहर के लोगों की जान की फिक्र नहीं है। तभी तो सड़क निमार्ण में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। यही नहीं बेहद जरूरी व्हाइट लाइन को बनाने में जबरदस्त घालमेल किया जा रहा है। एनआरआई समिट के मद्देनजर सड़कों को दुरुस्त किया जा रहा है। इन पर सेंटर व एज लाइन यानी सफेद पट्टी भी बनायी जा रही है लेकिन नियम और क्वालिटी को ताक पर रखकर है। वो ऐसी बन रही हैं कि रात में तो क्या दिन में भी नजर नहीं आएंगी। सिटी की सड़कों पर व्हाइट लाइन को थर्मो प्लास्टिक कंपाउंड युक्त ब्रांडेड पेंट से बनाने का निदेश हैं। व्हाइट लाइन बनाने के लिए ठेकेदारों को 428 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब पेमेंट किया जाता है। ठेकेदारों का कहना है कि इस काम में तय रेट से लगभग दोगुना खर्च होता है। पेमेंट कम होने की वजह से काम गुणवत्ता नहीं रह जाती है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी कहते हैं कि ठेकेदारों से जिस रेट पर काम कराया जा रहा है, वह काफी पुराना है। रेट रिवाइज के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।

रिफ्लेक्टर है गायब

रोड के बीच में व किनारों पर दिखने वाली व्हाइट लाइन को थर्मो प्लास्टिक कंपाउंड से तैयार किया जाता है। इसके सहारे कोहरे या अंधेरे में वाहन चालक रास्ता तय कर करते हैं। इस थर्मो प्लास्टिक कंपाउंड की साइज 2.5 एमएम मोटी होती है, जिसके ऊपर रिफ्लेक्टोराइंडिंगग्लास बिड लगाया जाता है। जब किसी वाहन का लाइट उस पर पड़ता है तो पट्टी चमकती है तो रास्ते का पता चलता है। शहर में जहां कहीं भी यह पट्टी लगी है वहां मानकों की धज्जियां उड़ा दी गई हैं। चाहे रथयात्रा, सिगरा हो या कैंटोनमेंट एरिया कही भी रिफ्लेक्टोराइडिंग ग्लास बिड नहीं लगे है। इससे पट्टी रात के अंधेरे में नजर नहीं आती है। यहीं नहीं पट्टी बनने के साथ ही गाडि़यों के पहिए के नीचे आकर इतनी खराब हो गयी है कि दिन में भी मुश्किल से नजर आती है।

ये है मानक

-2.5 एमएम होनी चाहिए व्हाइट पट्टी की मोटाइ

-रिफ्लेक्टोराइडिंग ग्लास बिड का होना जरूरी पट्टी पर

-निर्माण में ब्रांडेड पेंट का इस्तेमाल होना चाहिए

-सिटी की सड़कों पर 10 सेंटीमीटर चौड़ी होती है व्हाइट पट्टी

-स्टेट हाइवे पर 15 सेंटीमीटर पर चौड़ी होती है

-रोड पर व्हाइट के साथ पिली लाइन व जेब्रा क्रासिंग बनाना जरूरी

-सेंटर लाइन में हुए पेंट को सूखने देने के लिए चार घंटे का ट्रैफिक ब्रेक जरूरी

प्वाइंट टू बी नोटेड

सड़क पर बीच में बनी सफेद और पीली लाइनें भी ट्रैफिक के नियमों का हिस्सा हैं। इनके बारे में जानना जरूरी होता है।

1. सीधी सफेद पट्टी

2. निश्चित दूरी पर बनी सफेद पट्टी

3. सीधी पीली पट्टी

4. सीधी डबल पीली पट्टी

5. सीधी पीली पट्टी के साथ निश्चित दूरी पर बनी पीली पट्टी

सीधी सफेद पट्टी

सीधी सफेद पट्टी का मतलब है कि लेन बदले बिना सड़क पर लाइन के अंदर ही वाहन चलना है।

-निश्चित दूरी पर बनी सफ़ेद पट्टी

निश्चित दूरी पर बनी सफ़ेद पट्टी का मतलब है कि आप लेन बदल सकते हैं लेकिन सावधानी से।

-सीधी पीली पट्टी

सड़क के बीच में बनी सीधी पीली पट्टीबताता है कि आगे चल रहे वाहन को ओवरटेक कर सकते हैं, लेकिन पीली पट्टी को पार किए बिना।

-सीधी डबल पीली पट्टी

सड़क के बीच में बनी दो पीली पट्टी बताता है कि आप इस पट्टी को न पार कर सकते है न ही ओवरटेक। आगे चल रहे वाहन को क्रॉस या पास भी नहीं कर सकते।

-सीधी पीली पट्टी के साथ निश्चित दूरी पर बनी पीली पट्टी

यह पट्टी सीधी पीली पट्टी और निश्चित दूरी पर बनी पीली पट्टी के नियमो का मिश्रण है, सीधी पीली पट्टी की तरफ गाड़ी चला रहें हैं तो ओवरटेक नहीं कर सकते। वही निश्चित दूरी पर बनी पीली पट्टी की तरफ गाड़ी चला रहें हैं तो ओवरटेक कर सकते।

सड़क व सेंटर लाइन बनाने में यदि लापरवाही बरती जा रही है तो इसकी जांच आज खुद करेंगे। क्वालिटी खराब मिलने पर ठेकेदार का पेमेंट रोक दिया जाएगा।

ज्ञान प्रकाश पांडेय, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी

inextlive from Varanasi News Desk


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