10 दिनों में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ही नहीं इन 6 हस्तियों ने भी कहा दुनिया को अलविदा

2018-08-17T12:44:16+05:30

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुरुवार को एम्स में अंतिम सांस ली। अटल जी छठवें ऐसी महान हस्ती हैं जिन्होंने अगस्त महीने में दुनिया को अलविदा कहा है। पिछले 10 दिनों में नजर डालें तो भारत के कुल 6 बड़ेबड़े लोग इस दुनिया को छोड़ गए।

16 अगस्त (अटल बिहारी वाजपेयी)
कानपुर। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने गुरुवार को शाम 5 बजकर 5 मिनट दिल्‍ली एम्‍स में आखिरी सांस ली, वो 93 साल के थे। लंबे समय से बीमार चल रहे वाजपेयी को सांस लेने में तकलीफ के साथ साथ यूरीन और किडनी में संक्रमण होने के कारण 11 जून को एम्स में भर्ती किया गया था। एम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार सुबह वाजपेयी को सांस लेने में तकलीफ हुई थी। इसके बाद उन्हें जरूरी दवाइयां दी गई थीं और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया। भाजपा के संस्थापकों में शामिल वाजपेयी 3 बार देश के प्रधानमंत्री रहे। वह पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

15 अगस्त (अजित वाडेकर)

राजनीति ही नहीं क्रिकेट जगत के लिए भी यह हफ्ता सही नहीं गुजरा। भारतीय क्रिकेट टीम के पहले वनडे कप्तान रहे अजित वाडेकर का 15 अगस्त को 77 साल की उम्र में निधन हो गया। पूर्व भारतीय क्रिकेटर अजित वाडेकर को 70-80 के दशक में टीम इंडिया का बेस्ट कप्तान माना जाता था। हालांकि वाडेकर ने कप्तानी बहुत कम मैचों में की, मगर थोड़े समय में ही वह क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज करा गए। इंग्लैंड जैसी टीम के खिलाफ उन्हीं के घर पर जीतना आसान काम नहीं था। भारत ने इसके लिए सालों इंतजार किया तब जाकर वाडेकर कप्तानी में भारत के पास वो मौका आया जब उन्होंने अंग्रेजों को उन्हीं के घर पर पहली बार हराया। आठ साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में बायें हाथ के बल्लेबाज वाडेकर ने कुल 37 टेस्ट मैच खेले। 1971 से 1974 के दौरान उन्होंने 16 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम की कप्तानी की, जिसमें से चार मैच जीते, चार हारे, जबकि आठ मैच ड्रॉ रहे। वह दो वनडे मैच भी खेले और दोनों में उन्होंने भारतीय टीम की कमान संभाली। वनडे क्रिकेट में वह भारतीय टीम के पहले कप्तान थे।
14 अगस्त (बलराम दास टंडन)
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलराम दास टंडन का 14 अगस्त को रायपुर में निधन हुआ। 90 साल के बीडी टंडन को मंगलवार सुबह हार्ट अटैक आया था। जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। टंडन का राजनीतिक करियर साल 1952 में शुरु हुआ था जब वह अगले 10 साल तक अमृतसर में नगर निगम पार्षद रहे। इसके बाद 1957, 1962, 1967 और 1977 में वह अमृतसर से ही विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। उन्होंने पंजाब मंत्रिमंडल में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री के रूप में उद्योग, स्वास्थ्य, स्थानीय शासन, श्रम एवं रोजगार आदि विभागों में अपनी सेवाएं दी और कुशल प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया। भारतीय जनता पार्टी के नेता टंडन पंजाब के उपमुख्यमंत्री भी रहे। टंडन 1979 से 1980 के दौरान पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे।
13 अगस्त (सोमनाथ चटर्जी)
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का 89 साल की उम्र में 13 अगस्त को निधन हो गया। वह लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। इन्हें हाल ही में बीते सात अगस्त को बेलेव्यू क्लीनिक में उपचार हेतु भर्ती कराया गया था। सोमनाथ के निधन पर देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने शोक जताया था। सोमनाथ चटर्जी करीब 40 साल तक सांसद रहे थे। वह सीपीआई के बड़े नेता माने जाते थे। उनके निधन पर पीएम ने कहा था सोमनाथ चटर्जी भारतीय राजनीति का एक स्तंभ थे। वह संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने आैर कमजोर लोगों के कल्याण के लिए एक मजबूत आवाज थे।
11 अगस्त (वीएस नायपॉल)
भारतीय मूल के बड़े लेखक और नोबेल पुरस्कार विजेता वीएस नायपॉल अब हमारे बीच नहीं रहे। 85 वर्ष की उम्र में उन्होंने 11 अगस्त को अपने लंदन स्थित आवास पर आखिरी सांसे ली। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित कई लोगों ने नायपॉल के निधन पर शोक जताया था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट किया था कि उनके निधन से साहित्य जगत खासकर भारतीय-अंग्रेजी लेखन को बहुत नुकसान हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा कि सर नायपॉल अपने व्यापक लेखन के चलते हमेशा याद किए जाएंगे। इतिहास, संस्कृति, उपनिवेशवाद और राजनीति से लेकर तमाम विषयों पर उन्होंने लिखा। नायपॉल को 1971 में बुकर प्राइज से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें जबरदस्त लेखनी के लिए 2001 में साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार भी दिया गया था। नायपॉल ने अपने जीवन में 30 से अधिक किताबें लिखी थीं।
6 अगस्त (आर के धवन)
कांग्रेस के बड़े नेता रहे आर के धवन का 6 अगस्त को निधन हो गया था। आरके धवन कभी देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निजी सचिव रहे भी रहे हैं। इंदिरा गांधी इन पर काफी भरोसा करती थीं। आपातकाल के दौरान (1975-77) के दौरान भी वह इंदिरा के कुछ चुनिंदा विश्वासपात्रों में शामिल थे। इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद कुछ दिनों के लिए कांग्रेस में इनकी स्थिति थोड़ी गड़बड़ हो गर्इ थी। हालांकि एक बार साल वर्ष 1990 में आरके धवन ने शानदार तरीके से वापसी की और राज्यसभा के लिए चुने गए।आरके धवन अपने राजनीति जीवन के अलावा निजी जिंदगी को लेकर काफी चर्चा में रहे हैं। यह साल 2011 में अपने विवाह को लेकर सुर्खियों में रहे। इन्होंने 74 साल की उम्र में शादी की थी। पत्नी अचला अभी जीवित हैं।
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