ऑटो की सीटिंग कैपासिटी 8 बैठा रहे 1414 पैसेंजर्स

2018-12-03T06:00:45+05:30

RANCHI : सिटी की सड़कों पर दौड़ रहे सैकड़ों ऑटो में जानवरों की तरह पैसेंजर्स को ठूंसा जा रहा है। ट्रैफिक रूल्स ताक पर रख हर दिन सैकड़ों लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। एक - एक ऑटो में जबरन 14- 14 पैसेंजर्स को बैठाया जा रहा है। कानून की सरेआम धज्जियां उड़ायी जा रही हैं और इसके लिए पुलिस, दबंगों और ठेकेदारों को मैनेज किया जा रहा है। ओवरलोड ऑटो कभी यह हादसों को न्योता देते हैं तो कभी सड़क की ट्रैफिक व्यवस्था को ध्वस्त कर देते हैं। लेकिन, व्यवस्था में सुधार के तमाम उपायों को फेल होता देख कोई विकल्प नहीं तलाश पा रहे हैं.

फ्रंट में सीट एक का, बैठते 3- 4

आठ सीटर ऑटो में आगे की साइड सीट तो एक होती है, लेकिन उसमें तीन या चार लोगों को बैठाया जाता है। पीछे की सीट पर तीन लोगों के बैठने का नियम है, लेकिन चार- पांच पैसेंजर्स को बैठाया जा रहा है। ऑटो में ओवरलोडिंग का कुछ ऐसा ही नजारा राजधानी की सड़कों पर देखने को मिलता है। ऑटो पूरी तरह पैक्ड रहता है जिससे सांस तक लेने में मुश्किल होती है।

महिला- बच्चे ज्यादा होते परेशान

ऑटो में ओवरलोडिंग से सबसे ज्यादा परेशानी युवतियों को होती है.युवकों के साथ बैठना तो पड़ता ही है, पर कई बार ऑटोवाले युवकों के बीच युवतियों को बैठा देते हैं.इस वजह से ऑटो में सफर के दौरान वह लोग काफी इनसिक्योर फील करती हैं। वही ओवरलोडिंग के कारण कभी भी कोई हादसा हो सकता है.

पुलिस नहीं लेती है एक्शन

पुलिस के सामने ऑटोवालों की मनमानी चल रही है। पुलिस के एक्शन नहीं लेने से इनका मनोबल और बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि पोस्ट और थानों को मैनेज कर नियमों की धज्जियां उड़ायी जा रही हैं। हर दिन ट्रैफिक सिस्टम ध्वस्त होता है लेकिन पुलिस को इससे कोई मतलब नहीं होता.

देनी होती है रंगदारी

नाम नहीं छापने की शर्त पर ऑटो चालक ने बताया कि बिना ओवरलोडिंग के गुजारा नहीं चलता है। ऑटो में ज्यादा से ज्यादा पैसेंजर्स को बैठाना हमारी मजबूरी है। इसी कारण ऑटो के खुलने में भी लेट होता है। हर रुट पर कहीं रंगदार तो कहीं पुलिसवाले रुपया वसूलते हैं जिन्हें बिना भुगतान किए रुट पर ऑटो चलाना मुश्किल है।

लेते पूरा भाड़ा, बीच रास्ते दूसरे ऑटो में बैठा देते

रांची में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सबसे सुलभ साधन ऑटो है। लेकिन, ऑटोवालों की मनमानी अब पैसेंजर्स पर भारी पड़ रही है। कई बार तो ऑटो को बीच रास्ते में रोककर पैसेंजर्स का इंतजार भी ऑटो ड्राइवर करने लगते हैं। ऐसे में कई बार पैसेंजर्स पूरा भाड़ा देने के बाद भी बीच रास्ते में ऑटो से उतरकर दूसरी गाड़ी से जाने में ही भलाई समझते है.

inextlive from Ranchi News Desk


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