अयोध्या जैसा होगा सबरीमाला का आंदोलन

2019-02-01T06:00:09+05:30

विश्व हिन्दू परिषद के दो दिवसीय धर्म संसद में बोले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

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देश के प्रत्येक मंदिर का अपना इतिहास और विशिष्ट परंपरा है। सबरीमाला उन्हीं में से एक है। केरल सरकार न्यायपालिका की आड़ में भगवान अयप्पा के भक्तों पर अत्याचार करा रही है। अब तक पांच भक्तों की मृत्यु हो चुकी है। लेकिन, हिन्दू समाज वहां संगठित होकर लड़ रहा है। इसलिए हम सब हिन्दुओं को एकजुट होकर अयोध्या जैसा आंदोलन सबरीमाला की ऐतिहासिक परंपरा के लिए चलाना होगा। यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को विश्व हिन्दू परिषद की ओर से आयोजित दो दिवसीय धर्म संसद के दौरान कही। श्री भागवत ने दो टूक कहा कि केरल में महिला आंदोलन समिति एक फरवरी से 15 दिनों का आंदोलन शुरू करने जा रही है। हम उनके साथ खड़े हैं और कदम से कदम मिलाकर हर स्तर पर साथ देंगे। अध्यक्षता स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने की।

पहले दिन पारित दो प्रमुख प्रस्ताव

एक-विहिप मार्गदर्शक मंडल के सदस्य स्वामी परमात्मानंद ने सबरीमाला में परंपरा और आस्था की रक्षा करने का संघर्ष अयोध्या की तर्ज पर किए जाने का प्रस्ताव रखा। जिसका अनुमोदन केरल से आए स्वामी अयप्पा दास ने किया।

दो- हिन्दू समाज के विघटन के षड़यंत्र के खिलाफ विहिप मार्गदर्शक मंडल के सदस्य स्वामी गोविंद देव गिरि ने प्रस्ताव रखा जिसका अनुमोदन स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने किया। संत समाज ने षड़यंत्र के विरोध में पूरे देश में व्यापक रूप से जनजागरण अभियान चलाकर हिन्दुओं को एकजुट करने का निर्णय लिया।

संसद में किसने क्या कहा

हिन्दुओं की आस्था पर लगातार चोट पहुंचाई जा रही है। चुनावी वर्ष चल रहा है इसलिए कुछ स्वार्थी दल हिन्दुओं को बांटने का षड़यंत्र रच रहे है। हमें खुद में सुधार करके षड़यंत्र के खिलाफ सचेत होना चाहिए।

मिलिंद परांडे, अंतरराष्ट्रीय महामंत्री विश्व हिन्दू परिषद

-सबरीमाला मंदिर में ईसाइयों द्वारा आग लगाई गई और विग्रह भंग किया गया। वर्ष 1982 मंदिर की जमीन पर क्त्रास गाड़ा गया। वर्तमान समय में हजारों मुस्लिम महिलाओं ने महिला दीवार सबरीमाला के विरूद्ध बनाई थी। यह उदाहरण बड़े षड़यंत्र की व्यापकता को दर्शाता है।

स्वामी परमात्मानंद जी महाराज

-जिसने पिंडदान कर दिया उस साधु की कोई जाति नहीं होती है। षड़यंत्र के दौर में साधुओं की एकता राष्ट्रीय एकता के लिए सबसे जरूरी है। हमें हिन्दू समाज को राह दिखाना है। इस देश में कामन सिविल कोड और दो बच्चों के लिए भी कानून बनाया जाना चाहिए।

स्वामी रामदेव, योग गुरु

केन्द्र और प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल नहीं खड़ा किया जाना चाहिए। हम आश्वस्त है कि राम मंदिर अयोध्या में ही बनेगा। षड़यंत्र और षड़यंत्रकारियों से हिन्दू समाज को थोड़ा धैर्य और संयम बनाकर रखना होगा।

महंत नृत्य गोपालदास, श्रीरामजन्मभूमि न्यास

-क्षेत्रवाद, भाषावाद, जातिवाद व छद्म धर्म निरपेक्षता के नाम पर देश को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे दिग्भ्रमित ना होकर ऐसे कुत्सित प्रयासों का संगठित होकर प्रतिकार करने के लिए आगे आना होगा।

स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती

मंदिर पर आज मंथन, होगा निर्णय

विहिप की धर्म संसद के पहले दिन सभी संत-महात्माओं की निगाहें राम मंदिर निर्माण के लिए किसी निर्णय पर टिकी थीं लेकिन सभी को मायूस होना पड़ा। मंच संभालते ही परिषद के महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि राम मंदिर के संबंध में धर्म संसद के अंतिम दिन प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। उसके बाद निर्णय लिया जाएगा।

inextlive from Allahabad News Desk


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