बीएड की दौड़ में शामिल 22 हुए हजार

2013-04-24T11:21:02+05:30

Meerut बीएड क्वालीफाइड कैंडीडेट्स को अब प्राइमरी में टीचर नहीं बनाया जाएगा इसके बाद भी शहर में हुए बीएड एंट्रेंस में सिर्फ 1451 ही एब्सेंट रहे

बीएड एंट्रेस के लिए 23,599 लोगों ने रजिस्टेशन करवाया था। कहना गलत नहीं होगा कि बीएड अब भेड़ चाल बन गई है। एक दूसरे को देखकर सभी बीएड किए जा रहे हैं। ये किसी को नहीं पता कि बीएड के बाद नौकरी मिलेगी या नहीं।
कई जगह हुई परेशानी
सुबह के समय सेंटर्स तलाशने में कैंडीडेट्स को काफी परेशानी हुई। गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने एडमिट कार्ड पर एग्जाम सेंटर्स के नाम फुल फॉर्म में लिखे गया। जैसे कि आरजी कॉलेज को रधुनाथ कॉलेज लिखा गया। जबकि शहर में सभी लोग आरजी कॉलेज के नाम को ही जानते हैं। इसी तरह डीएन कॉलेज, वाईएसएल कॉलेज, आईएन कॉलेज समेत कई कॉलेजों पर कैंडीडेट्स को परेशानी हुई।
भेड़ चाल
पेपर देने आई कैंडीडेट्स से जब पूछा गया कि प्राइमरी में जॉब की गारंटी ना होने पर भी बीएड क्यों कर रही हैं? इस पर कोई भी जवाब ना दे सकी। एक कैंडीडेट ने कहा कि बस भेड़ चाल है। सब कर रहे हैं तो मैं भी कर रही हूं। सबको नौकरी मिलेगी तो मुझे भी मिल जाएगी।
लगा जाम
सुबह के समय तो फिर भी जाम नहीं लगा। लेकिन शाम को पेपर छूटा तो दिल्ली रोड पर कई जगहों पर जाम जैसे हालात बन गए। गढ़ रोड, ईव्ज चौराहा, तेजगढ़ी चौराहा, शास्त्री नगर मार्केट, जागृति विहार, गंगानगर, बुढ़ाना गेट, कंकरखेड़ा समेत कई जगहों पर जाम लग गया।
किसी को लगा इजी, किसी को टफ
शहर के 43 सेंटर्स पर बीएड का एग्जाम हुआ। पहला पेपर कंपेरेटिवली आसान रहा। हालांकि कई कैंडीडेट्स ने कहा कि पेपर हार्ड रहा। पेपर देने आई बिजनौर की शेफाली ने कहा कि पेपर का पहला पार्ट आसान रहा। लेकिन मेरठ की नेहा शर्मा ने कहा कि पेपर काफी टफ रहा।
देनी होगी बढ़ी फीस
बीएड कैंडीडेट्स ये ध्यान रखें कि पिछले साल तक बीएड वालों से 51 हजार फीस ली जाती थी, लेकिन तीन महीने पहले कुछ कॉलेज कोर्ट जाकर 72 हजार रुपए वसूल करने का आर्डर ले आए। सिर्फ मेरठ में ही करीब 34 कॉलेज बढ़ी फीस का आर्डर ला चुके हैं। इस लिए कैंडीडेट बढ़ी फीस वसूलने के लिए तैयार रहें।
बीएड एक नजर में
- मेरठ में है एक लाख से ज्यादा बीएड बेरोजगार
- मेरठ में हर साल पास आउट होते है - नौ हजार स्टूडेंट्स
- सीसीएसयू के कॉलेजों में हर साल बीएड पास आउट - तीस हजार स्टूडेंट्स
- स्टेट में हर साल बीएड पास आउट करते है - 1.10 लाख स्टूडेंट्स
- कुल बीएड बेरोजगार स्टेट में - 7 लाख से अधिक
- प्रदेश में टीचर्स के कुल पद खाली - 2.68 लाख
- स्टेट में हर साल रिटायर होते है - 15 हजार टीचर से अधिक
"पेपर काफी आसान रहा। उम्मीद है कि मैं पेपर में पास हो जाऊंगी."
अलका, बीएड कैंडीडेट
"बीएड में नौकरी की कोई गारंटी नहीं है। फिर भी घर वालों ने कहा तो कर रही हूं."
सीमा, बीएड कैंडीडेट
"सब लोग बीएड कर रहे हैं तो मैं भी कर रही हूं। जो होगा देखा जाएगा."
प्रभा, बीएड कैंडीडेट


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.