बिजली उत्पादन हुआ कम तो सीएम ने किया तलब

2019-05-21T06:01:06+05:30

RANCHI :शहर में गर्मी बढ़ने के साथ बिजली के उत्पादन पर भी ब्रेक लगना शुरू हो गया है। एक महीने से टीवीएनएल के दोनों यूनिट में बिजली का उत्पादन हो रहा था लेकिन रविवार को सिर्फ एक यूनिट ने धोखा दे दिया। इससे पहले दोनों यूनिट से कुल 340 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था, मगर रविवार को महज 170 मेगावाट ही उत्पादन हुआ। कम उत्पादन होने का असर शहर के लोगों पर भी दिखने लगा है। बिजली की क्राइसिस होने से उन्हें बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस पर सीएम ने सोमवार को ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को तलब कर स्थिति को जल्द सुधारने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने फिर किया दावा

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सोमवार को बीजेपी प्रदेश कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर एक बार फिर दावा किया कि साढ़े चार साल में राज्य में 30 लाख परिवारों के घरों में बिजली पहुंचा दी गयी। लोड बढ़ा है, पर्याप्त बिजली नहीं है। इस कारण राज्य में पावर की समस्या है। हजारीबाग और गिरिडीह समेत 117 ग्रिड के निर्माण का काम चालू है। इनके चालू होते ही बिजली की समस्या खत्म हो जायेगी। सुदूर इलाकों में सोलर पावर के जरिये बिजली पहुंचायी जायेगी। इससे पहले राज्य में बिजली की स्थिति को देखते हुए सीएम ने सोमवार को ऊर्जा सचिव वंदना दादेल और वितरण निगम के एमडी राहुल पुरवार को बुलाया भी। इस दौरान एमडी ने बताया कि 24 मई के बाद बिजली व्यवस्था को लेकर जानकारी देंगे।

कोयले पर निर्भर है बिजली

सीएम ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य के कोयले से बिजली बना कर बेचना है। लेकिन सच्चाई यह है कि दूसरे राज्य झारखंड का कोयला खरीद कर झारखंड को ही सालाना 3000 करोड़ की बिजली बेचते हैं। वहीं एनटीपीसी और डीवीसी को झारखंड में ही कोल ब्लॉक आवंटित किया गया है। डीवीसी का मुख्यालय पश्चिम बंगाल और एनटीपीसी का मुख्यालय दिल्ली में है। हरियाणा के यमुनानगर में बन रहे पावर प्लांट के लिए झारखंड के बादलपारा और कल्याणपुर कोल ब्लॉक को आवंटित किया गया है। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन को पैनम कोल माइंस आवंटित की गयी है। झारखंड में सालाना 125 मिलियन टन कोयले का उत्पादन होता है। इसमें 100 मिलियन टन 95 फीसदी कोयला गुजरात, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली चला जाता है। राज्य के खाते में सिर्फ 25 मिलियन टन ही आता है। जबकि राज्य में स्थापित निजी और सरकारी उपक्रम के पावर प्लांट को चलाने के लिए हर दिन 43 हजार टन कोयले की जरूरत होती है।

ये कंपनियां झारखंड को सालाना बेचती हैं बिजली

डीवीस 1560 करोड़

एनएचपीसी 156 करोड़

एनटीपीसी 648 करोड़

पीजीसीआईएल -ट्रांसमिशन लाइन का उपयोग भी, 96 करोड़

पावर ट्रेडिंग कॉरपोरेशन 156 करोड़

कौन कंपनी कितना करती है आपूर्ति

कंपनी का नाम मेगावाट

डीवीसी 946

जूस्को 43

टाटा स्टील 435

सेल बोकारो 21

बिजली वितरण निगम 1900 से 2000

inextlive from Ranchi News Desk


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