बॉयोमेट्रिक और आधार सिस्टम में सेंध लगा गरीबों का राशन किया हजम

2018-09-17T06:00:19+05:30

- लखनऊ में भी लगाई सेंध, बीस करोड़ से ज्यादा का राशन हड़पा

- एसटीएफ ने तीन घोटालेबाजों को दबोचा, बाकियों की तलाश जारी

- खाद्य एवं रसद विभाग के तमाम पूर्ति निरीक्षक, ऑपरेटर भी फंसेंगे

LUCKNOW : सूबे में नये खाद्यान्न घोटाला का खुलासा होने के बाद एसटीएफ ने रविवार को तीन घोटालेबाजों को गिरफ्तार किया है। इनमें राजधानी निवासी आमिर खान राजधानी के वजीरगंज में कोटेदार है जबकि उसका भाई अल्तमश कंप्यूटर ऑपरेटर है। तीसरा युवक पुष्पेंद्र पाल नोएडा का रहने वाला है और वह बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध लगाकर फर्जी आधार कार्ड की इंट्री करता था। शुरुआती जांच में बीस करोड़ के राशन की हेराफेरी के प्रमाण मिल चुके है। एसटीएफ की जांच के दायरे में खाद्य एवं रसद विभाग के तमाम ऐसे पूर्ति निरीक्षक और कंप्यूटर ऑपरेटर हैं जिनके यूजर आईडी और पासवर्ड से यह घोटाला अंजाम दिया जा रहा है। एसटीएफ जल्द ही उन पर अपना शिकंजा कसने जा रही है। एसटीएफ ने अलग से सायबर थाने में भी धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है.

एक ही आधार पर सौ- सौ इंट्री

दरअसल खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा आधार कार्ड वैरीफिकेशन कर ई- पॉस मशीनों के जरिए गरीबों को राशन मुहैया कराने के लिए पूर्ति निरीक्षकों को यूजर आईडी और पासवर्ड दिया गया है। इसके जरिए ही उपभोक्ताओं का आधार वेरीफाई कराया जाता है। प्रदेश के करीब एक दर्जन जिलों में बॉयोमेट्रिक राशन वितरण प्रणाली में सेंध लगाकर राशन हड़प कर उसे खुले बाजार में बेचने का मामला सामने आने के बाद 22 से ज्यादा मुकदमे दर्ज कराए जा चुके है। शासन द्वारा इसकी जांच एसटीएफ को सौंपी गयी थी जिसके बाद एसटीएफ ने रविवार को तीन घोटालेबाजों को गिरफ्तार कर यह खुलासा किया है। आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि इस मामले में कई राशन दुकानों की ई- पॉश मशीनों का दुरुपयोग होने के प्रमाण मिले हैं। फिलहाल इसमें किसी संगठित गिरोह का हाथ होने की पुष्टि नहीं हुई है।

लखनऊ में लगती थी घोटाले की दुकान

एसटीएफ की पूछताछ में आमिर ने बताया कि उसकी राशन की दुकान है। क्षेत्र की पूर्ति निरीक्षक संगीता और कौशलेंद्र कुमार पांडे है जबकि कंप्यूटर ऑपरेटर अल्तमश मेरा भाई है। इन सभी की लॉग इन आईडी और पासवर्ड मेरे और अल्तमश के पास रहती है जिसके जरिए हम हेराफेरी अंजाम देते थे। केवल जुलाई माह में ही मैंने सौ बार यह हेराफेरी की। इसके अलावा मेरी दुकान में धर्मेद्र सिंह, योगेश द्विवेदी, राजकुमारी, रामचंद्र चौधरी, शंकर प्रसाद, शिव प्रकाश, संतोष रावत, सीमा गुप्ता, मेसर्स महिला उप समिति अपनी- अपनी ई- पॉस मशीनें तथा पूर्ति निरीक्षक व कंप्यूटर ऑपरेटर के लॉग इन आईडी और पासवर्ड लेकर आते थे और उन पर भ्ीा मैं आधार संख्या एडिट कर फर्जी वितरण कर देता था। ऐसे हजारों ट्रांजेक्शन मेरे द्वारा किए गये है।

13000 रुपये देकर बुलाते थे पुष्पेंद्र को

आईजी एसटीएफ ने बताया कि पुष्पेंद्र पाल को लखनऊ के कोटेदार 13000 रुपये महीना देकर हर माह आधार नंबरों का फर्जीवाड़ा करने के लिए लखनऊ बुलाते थे। राशनिंग अफसर के चालक सोनू उर्फ राम कुमार के संपर्क में आने के बाद वह इस धंधे में आया। नोएडा में सोनू ने उसे कई सप्लाई इंस्पेक्टर और आपरेटर के लॉग इन आईडी व पासवर्ड उपलब्ध कराए, जिनके जरिए गड़बडि़यां की गईं। पुष्पेंद्र का एक और साथी विजेंद्र सिंह भी है जिसकी एसटीएफ को तलाश है.

नोएडा में भी घोटाला

पुष्पेंद्र ने बताया कि उसने नोएडा में अग्गापुर के राशन डीलर सत्यपाल सिंह, उनकी पत्‍‌नी लीना सिंह, भाभी पूजा सिंह, गीता चौधरी, जितेंद्र सिंह, जीत सिंह, देवेंद्र, बबिता, रोहतास, शिवराज सिंह व बुलंदशहर के प्रमोद की ई- पॉस मशीन से अपने आधार नंबर का इस्तेमाल कर सैकड़ों राशन कार्ड से फर्जी वितरण किए। सोनू ने पुष्पेंद्र की मुलाकात जितेंद्र उर्फ जित्ते गुप्ता से कराई जिसने उसका संपर्क लखनऊ के कोटेदारों से कराया। पूछताछ में लखनऊ के दुकानदार रामदास, ओम प्रकाश आहूजा, प्रमोद गौतम, प्रवीण कुमार महाजन, महेश दत्त शुक्ला, राम प्रकाश सरोज, शिव प्रकाश, विजय कुमार महाजन, सूरज नारायण गुप्ता के नाम शामिल हैं।

सिस्टम में किया बदलाव

यह प्रकरण सामने आने के बाद एहतियात भी बरती जाने लगी है। एनआईसी ने अपने सिस्टम में कुछ अहम बदलाव भी किए हैं। अब बॉयोमेट्रिक इमेज को सीधे सर्वर पर भेजने के बजाय उसे सेव किया जाएगा। शुरुआती जांच के बाद ही उसे वेरीफाई करने को सर्वर पर अपलोड किया जाएगा।

फैक्ट फाइल

- 1.75 लाख से ज्यादा फर्जी ट्रांजेक्शन का लग चुका है पता

- 20 करोड़ से ज्यादा का राशन केवल लखनऊ में हड़पा गया

- 23 एफआईआर अब तक पूरे प्रदेश में दर्ज हो चुकी हैं

- 03 घोटालेबाजों को कुछ दिन पहले अलीगढ़ में किया गया अरेस्ट

- 43 जिलों में 859 आधार के जरिए जुलाई में 1.86 लाख राशन कार्ड से फर्जी वितरण

कोट

हम उन पूर्ति निरीक्षकों व कंप्यूटर ऑपरेटर्स की संलिप्तता का भी पता लगा रहे हैं जिनका यूजर आईडी और पासवर्ड इस्तेमाल कर एक ही आधार कार्ड पर सैंकड़ों लोगों को राशन देने की फर्जी इंट्री कर दी गयी। एसटीएफ इस प्रकरण में दर्ज 23 मुकदमों के जांच अधिकारियों को एक पत्र भी लिखेगी जिसमें उन्हें बताया जाएगा कि इस मामले की जांच किस तरह की जानी है.

- अमिताभ यश, आईजी एसटीएफ

inextlive from Lucknow News Desk


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