तो इससे बेहतर छावनी कोई नहीं

2012-07-05T02:02:02+05:30

Meerut ये मामला देश की दूसरी सबसे बड़ी छावनी के विकास का है जिसे हर बार बजट न होने पर इग्नोर कर दिया जाता है कभीकभी हालात ऐसे हो जाते हैं कि अपने अधिकारियों और कर्मियों की सैलरी देने के लिए बोर्ड को दिल्ली और लखनऊ की ओर ताकना पड़ता है कमाई के साधन भी सीमित हैं टैक्स भी पूरा मिले तो काम चल जाए लेकिन करोड़ों का रुपए का टैक्स भी रुका हुआ है बात स्कूलों की करें तो तीन करोड़ रुपए का टैक्स कैंट बोर्ड का स्कूलों के पास पड़ा है इनमें से कुछ स्कूलों के पास हाईकोर्ट का स्टे है जिस पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है बात विकास की करें तो अगर ये पूरा रुपया कैंट बोर्ड के खाते में हो पूरे कैंट की सूरत बदल जाएगी आइए महज स्कूलों के इस बकाए से कैंट में क्याक्या विकास हो सकता है

1. दो माह की सैलरी
कैंट बोर्ड के अधिकारियों, कर्मचारियों और अस्थाई कर्मचारियों की एक माह की कुल सैलरी तकरीबन पौने दो करोड़ रुपए है। इस हिसाब से तकरीबन तीन करोड़ चालीस लाख रुपए दो माह की सैलरी के काफी होंगे.

2. पार्किंग की समस्या होगी दूर
काफी समय से कैंट बोर्ड पब्लिक के लिए हाईटेक पार्किंग बनाने के बारे में सोच रहा है, लेकिन बजट न होने के कारण इस प्रोजेक्ट को इंप्लीमेंट नहीं किया जा सका। कैंट बोर्ड के लिए अब भी आबूलेन की सेंट्रल पार्किंग नासूर बनी हुई है.

3. कैंट बोर्ड के स्कूल
सीएबी इंटर कॉलेज और आधारशिला स्कूल के अलावा कैंट बोर्ड चार प्राइमरी स्कूलों को भी संचालित कर रहा है। जहां हमेशा बुनियादी सुविधाओं के अलावा टीचर्स का भी अभाव रहता है। प्राइवेट स्कूलों का टैक्स काया इन स्कूलों की किस्मत बदल सकता है.

4. हर वार्ड में ओवर हेड टैंक
हर बोर्ड मीटिंग में पानी की समस्या के बारे में कहा जाता है। काफी समय से बढ़ती आबादी के बावजूद भी हेड ओवर टैंक की डिमांड की जा रही है। लेकिन अभी तक कोई उपाय नहीं किया जा सका है। तकरीबन साढ़े तीन करोड़ रुपए से हर वार्ड में हेड ओवर टैंक बन सकते हैं। जिससे हर वार्ड के हर घर में 24 घंटे पानी की सप्लाई संभव हो जाएगी.

5. नाले हो जाएंगे साफ
कैंट के निवासी नालों से काफी परेशान हैं। मौसम कोई सा भी हो नाले हमेशा भरे हुए रहते हैं। हमेशा से ही अधिकारियों के लिए नालों की सफाई सिरदर्द बनी हुई रही हैं। अगर कैंट बोर्ड के खाते में साढ़े तीन करोड़ रुपए आते हैं तो सभी नालों की सफाई हो जाएगी.

6. एम्यूजमेंट पार्क
गांधी बाग में पिछले दस पहले एम्यूजमेंट पार्क का रेज्यूल्यूशन पास हुआ था। जिस पर आज तक काम नहीं हो सका। वहीं गांधी बाग में बच्चों के पार्क में सभी झूले टूटे हुए हैं। साढ़े तीन करोड़ रुपए में बच्चों के लिए अच्छा खासा एम्यूजमेंट पार्क तैयार हो सकता है.

स्कूल                 बकाया(लाखों में)
सोफिया गल्र्स स्कूल  -  49,44,365
सेंट मैरीज एकेडमी    - 62,61,702
जीटीबी पब्लिक स्कूल - 88,13,342
करन पब्लिक स्कूल   - 75,19,036
नोट - इन स्कूलों को हाईकोर्ट से स्टे मिला हुआ है.

मॉर्डन पब्लिक स्कूल -  5,20,304
सनवेज पब्लिक स्कूल - 3,42,270
चिराग स्कूल          -  2,34,506
दीवान पब्लिक स्कूल -  11,13,020
नोट - इन स्कूलों ने इस साल कुछ भी जमा नहीं कराया है.

ऋषभ एकेडमी -   20,07,806
इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल - 3,28,369
होटल मैनेजमेंट - 17,37,888
नोट - इन स्कूलों की कैंट बोर्ड से बातचीत चल रही है.
स्रोत - ये सभी आंकड़े कैंट बोर्ड से उपलब्ध हुए हैं.



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