शहर में दो सौ से ज्यादा अवैध कार वाशिंग सेंटर

2019-06-20T06:00:15+05:30

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छ्वन्रूस्॥श्वष्ठक्कक्त्र: स्टील सिटी में पानी की भारी कमी के बीच ऐसे कई वाटर माफिया है जो बिना किसी लाइसेंस, और पाल्यूशन सार्टिफिकेट के ही पानी का कारोबार कर रहे हैं। शहर में बडे़ सर्विस सेंटर को छोड दें तो जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया, मानगो नगर निगम और जुगसलाई महापालिका में 200 से अधिक सेंटर कार वाशिंग सेंटर का संचालन कर रहे है। ये सेंटर डीप बोरिंग और सबमिर्सबल के माध्यम से भूमिगत पानी का अधिक से अधिक दोहन कर रहे है। जिसके चलते भूमिगत पानी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। शहर में टाटा स्टील के पास महज एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होने से शहर का अधिकतर वेस्ट वाटर बिना उपयोग के ही नदी में बह जाता है। इन वाशिंग सेंटर में पानी का अधिक से अधिक इस्तेमाल होने से शहर में पानी की समस्याएं बढती ही जा रही है। जिस पर नगर निगम के अधिकारियों की नजर नहीं जा रही हैं। जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

325 लीटर पानी से साफ होती है एक कार

एक कार को वाशिंग करने मे लगभग 325 लीटर पानी का प्रयोग होता है। कार वाशिंग स्टेशनों पर चार पहिया और दो पहिया वाहन दोनों की धुलाई की जाती है। एक आंकड़े के अनुसार बाइक की सफाई में ही 150 लीटर पाी का उपयोग होता है। इस तरह दिन में लगभग 100 वाहन की सफाई में औसत हर दिन 15000 से 20000 लीटर पानी की खपत होती है, जबकि तीन लोगों परिवार में हर दिन औसत 300 लीटर पानी खर्च होता है, जो एक परिवार के लिए लगभग दो महीने के खर्च के बराबर है। जिससे एक हजार लीटर की टंकी का उपयोग महज चार कार धोने में ही खत्म हो जाएगा।

बीस हजार लीटर पानी की खपत

शहर के साकची, बिष्टुपुर, कदमा, सोनारी, गोलमुरी, गाढ़ाबासा, टेल्को एरिया में हर दिन 60 से 100 वाहनों की वाशिंग होती है। वहीं मानगो, परसुडीह, गोबिंदपुर, सुंदरनगर आदि इलाकों में हर दिन 40 से 50 वाहनों की वाशिंग होती है। जहां पर दिन 10 हजार से 20 हजार लीटर पानी का उपयोग होता है। इनमें दो पहिया वाहनों की संख्या अधिक होती है। शहर के वाशिंग सेंटर में पानी की ज्यादा खपत का कारण शहर में वाहनों की संख्या भी है। शहर में पांच लाख से अधिक बाइक रजिस्टर्ड है, वहीं भारी वाहनों की संख्या भी शहर में अधिक होने से वाशिंग में अधिक पानी का उपयोग होता है। वाशिंग के कारोबार में कम लागत पर बिजनेस अच्छा होने के चलते हर गली में वाशिंग सेंटर बन चुके है। आलम यह है कि प्रति किलोमीटर पर ही आठ से 10 सेंटर स्थापित है।

नहीं हो रही कोई कार्रवाई

जेएनएसी और मानगो नगर निगम एरिया में स्थापित वाशिंग सेंटरों द्वारा अधाधुंध पानी की बर्बादी के बाद भी अधिकारी सुध नहीं ले रहे हैं। अप्रैल माह में मानगो नगर निगम द्वारा अभियान चलाया गया था, जिसके अंतर्गत वाशिंग सेंटर चलाने वाले एक्का-दुक्का दुकानदारों को हिदायत देकर छोड़ दिया गया था। कार्रवाई नहीं होने की वजह से वाशिंग सेंटर कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं। शहर में डीप बोरिंग कराने के लिए नगर निगम से इजाजत लेना अनिवार्य है, लेकिन शहर में नियम का पालन नहीं हो रहा है।

समय-समय पर वाशिंग सेटर की जांच कराकर कार्रवाई की जाती है। वाशिंग सेंटर चलाने के लिए रजिस्ट्रेशन और पाल्यूशन बोर्ड की एनओसी अनिवार्य है। तीनों अक्षेस के अधिकारियों को आदेश दिया जाएगा कि वह संबंधित क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे वाशिंग सेंटर का स्वयं निरीक्षण कर कार्रवाई करें।

चंदन कुमार, एसडीओ, धालभूमगढ़

inextlive from Jamshedpur News Desk


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