नवरात्र कल से 9 दिन विधिविधान पूजा करने पर मिलता है ये फल

2019-04-05T08:52:11+05:30

कल्याणी और ललिता देवी मंदिर में हर दिन अलग रूप में होगा मां का श्रृंगार

- हिन्दू नववर्ष पर तमाम आयोजन भी होंगे

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PRAYAGRAJ: बाजारों में देवीगीत सुनाई देने लगे हैं। नवरात्रि के सामानों से दुकानें सज चुकी हैं। मंदिरों में भी तैयारियां जोरों पर हैं और उन्हें अब अंतिम रूप दिया जा रहा है। चैत्र नवरात्र इस बार 06 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। चैत्र नवरात्र से हिंदू नववर्ष का भी प्रारंभ माना जाता है और पंचांग की गणना की जाती है।

यह है मान्यता
पुराणों के अनुसार चैत्र नवरात्र से पहले मां दुर्गा अवतरित हुई थीं। ब्रह्म पुराण के अनुसार देवी ने ब्रह्माजी को सृष्टि निर्माण करने के लिए कहा। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में अवतार लिया था। प्रभु श्रीराम का जन्म भी चैत्र नवरात्र में ही हुआ था।

आज दोपहर खत्म होगी चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या
चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन हिन्दू वर्ष का समापन होता है। इसी के साथ चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को नूतन वर्ष अर्थात नव संवत्सर प्रारम्भ होता है। चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या 05 अप्रैल को दोपहर 01 बजकर 36 मिनट पर खत्म हो रही है। इसी के साथ नव संवत्सर आरम्भ हो रहा है। हालांकि सूर्य सिद्धांत पर आधारित गणना के आधार पर उदया तिथि को ही नव संवत्सर की शुरुआत मानी जाती है। इसी कारण 06 अप्रैल, दिन शनिवार को भारतीय संस्कृति का सर्वमान्य नववर्ष शुरु होगा। यह संवत्सर अपने नाम के अनुरूप ही अकुशलता, रोग्यता एवं अशुभ फलप्रदायक होगा।

नवरात्र पर दिनों का महत्व

प्रथम दिन
कलश स्थापना के साथ ही देवी मां की पूजा शुरू होती है। शैलपुत्री स्वरूप में मां का ध्यान करने से भक्तों को व्याधि रहित जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता।

द्वितीय दिन
अक्षमाला व कमंडल धारण करने वाली ब्रह्म चारिणी भक्तों के संकट हरण कर उन्हें आशीष प्रदान करती है। इनकी उपासना से तप, त्याग, बैराग, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है।

तृतीय दिन
मां चन्द्रघंटा का पूजन किया जाता है। इस दिन दुर्गा सप्तसती का पाठकर घर पर महिलाओं को आमंत्रित कर उन्हें भोजन कराकर कलश या घंटी दान करना विशेष लाभदायी होता है।

चौथे दिन
मां कूष्मांडा देवी की पूजा करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।

पंचम दिन
मां स्कंदमाता की उपासना की जाती है। मोक्ष का द्वार खोलने वाली माता अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। ये सूर्यदेव की अधिष्ठात्री हैं।

छठे दिन
मां कात्यायिनी रूप में पूजा होती है। इनके पूजन से मन को शान्ति व शक्ति प्राप्त होती है।

सप्तम दिन
मां कालरात्रि का स्वरूप होती हैं। इन्हें कालरात्रि की महामाया विष्णु की योगनिन्द्रा माना जाता है।

आठवें दिन
गौरी की आराधना की जाती है। इस दिन श्रद्धानुसार कन्याओं का पूजनकर उनका सम्मान करने से घर में सुख शांति आती है और समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

नौवां दिन
देवी के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री का पूजन होता है। इस दिन विधि विधान से देवी जी पर कमल पुष्प अर्पित करना चाहिए और पूजन के बाद कन्या व लंगूरों को भोजन कराकर उन्हें फल, पुष्प, मिष्ठान्न आदि दान करना चाहिए। इस दिन देवी जागरण करने से आठ सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

शक्ति उपासना के दिन नौ रूपों में भगवती अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं और मनोकामना पूर्ण करता है। ज्योतिष की दृष्टि से भी चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व है। नवग्रहों की पूजा से पूरे साल ग्रहों की स्थिति अनुकूल रहती है।
- पं। सुशील कुमार पाठक, अध्यक्ष महाशक्तिपीठ मां कल्याणी देवी मंदिर

भगवती के नौ स्वरूप दिव्य गुणों वाली नौ औषधियां हैं जो हमारे अंदर विद्यमान दैहिक, दैविक और भौतिक व्याधियों को दूरकर शरीर को शुद्धता प्रदान करता है। मानना है कि चैत्र नवरात्र के दिनों में मां स्वयं धरती पर आती है। इससे इच्छित फल की प्राप्ति होती है।
- पं। श्याम जी पाठक, महामंत्री महाशक्तिपीठ मां कल्याणी देवी मंदिर

मीरापुर स्थित महाशक्तिपीठ ललिता देवी मंदिर में चांदी के दरबार एवं मां के गहनों की साफ-सफाई का कार्य को रहा है। मंदिर को रंगीन झालरों से सजाया जाएगा। प्रात:काल दुर्गा पाठ एवं सायंकाल शतचंडी महायज्ञ का आयोजन होगा। सुबह से दोपहर 01 बजे और शाम से देर रात तक मंदिर खुलेगा।
- सुमित श्रीवास्तव, श्री ललिता कल्याण समिति

हिन्दू नववर्ष में जनता एवं समाज में सौम्यता कम एवं अस्थिरता बनी रहेगी। राजनीतिक दलों सहित समस्त संस्थाओं द्वारा किया गया कार्य जनता को लुभाने में असमर्थ होगा। परिधावी नामक इस संवत्सर के राजा शनि देव है। शासन तंत्र अपना कार्य कर पाने में सफल तो होगा परन्तु जनता में असंतोष अवश्य बढे़गा।
- पं। दिवाकर त्रिपाठी पूर्वाचली, निदेशक उत्थान ज्योतिष संस्थान

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष शुभारंभ पर वृहद यज्ञ एवं भजन का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान आर्य समाज की ओर से शुभकामना संदेश का भी आदान प्रदान किया जाएगा। विभिन्न कार्यक्रमों का वृहद समापन शंकरगढ़ कोठी मुट्ठीगंज में होगा।
- राजेन्द्र कपूर, प्रधान आर्य समाज मुंडेरा बाजार


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