हादसों पर लगाम को ट्रैक पर साहेबान

2019-04-03T06:00:51+05:30

-लगातार हो रहे डीरेलमेंट को देखते हुए ट्रैक बदलने की जद्दोजहद तेज

-पिछले साल के मुकाबले इस बार ज्यादा बदला गया है ट्रैक

-रिपेयरिंग वर्क में भी आई है तेजी

GORAKHPUR: फ्लां जगह ट्रेन डीरेल हो गई। वहां ट्रैक फ्रैक्चर था, जहां से ट्रेन गुजर गई। ट्रेन की आठ बोगियां ट्रैक से उतर गई, जिसकी वजह से छह लोग घायल हो गए। साल 2018-19 में ऐसे कई मामले सुनने को मिले हैं, जहां ट्रेन डीरेल हुई है और हादसों में कई लोगों की जान तक चली गई है। ऐसे हादसों से सबक लेते हुए एनई रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन ने ट्रैक रिपेयरिंग और मेनटेनेंस की कोशिशों को और तेज कर दिया है। हादसों पर लगाम कसने के लिए साहेबान ट्रैक पर हैं और लगातार कोशिशों में लगे हैं कि हादसों को कम करने के लिए जल्दी से जल्दी ट्रैक को अप-टू-डेट कर लिया जाए।

2018-19 में 22 हजार घंटों से ज्यादा ब्लॉक

ट्रैक को रिपेयर करना रेलवे के लिए टेढ़ी खीर है। मगर पैसेंजर्स की सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए रेलवे अपनी अर्निग से भी समझौता करने को तैयार है। यही वजह है कि साल 2018-19 में एनई रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन ने 22 हजार 713 घंटों का ब्लॉक लिया है, जिसका असर ट्रेन के आवागमन पर पड़ा है, लेकिन इससे सेफ्टी और सिक्योरिटी की चांसेज बढ़ी हैं। जबकि, साल 2017-18 में रेलवे ने 19 हजार घंटे का ब्लॉक लिया था।

140 स्पॉट्स पर बदल दिए ट्रैक

रेलवे में ट्रैक मेनटेंनेस की बात की जाए, तो बीते साल इसको लेकर काफी काम हुआ है। जहां करीब 105.10 ट्रैक किलोमीटर से ज्यादा ट्रैक की शोल्डर ब्लास्ट क्लीनिंग यानी उसके नीचे पड़ने वाली गिट्टी से डस्ट निकालकर उसे री-इंस्टॉल करने का काम हुआ है। तो वहीं 140 सेट ट्रैक भी बदले गए हैं। इतना ही नहीं ट्रैक पर लगे रबर पैड, जोकि डैमेज हो चुके थे, ऐसे 204 ट्रैक किलोमीटर को रिपेयर किया जा चुका है।

कहां क्या बदलाव

वर्क 2017-18 2018-19

ट्रैक रिन्यूअल - 88.19 53.60 ट्रैक किलोमीटर

डीप स्क्रीनिंग - 103.29 किमी 121.55 ट्रैक किलोमीटर

टीटीआर - 127.50 139.25

टीएफआर - 283.05 204.22

एसईजे रीन्यूअल 113 101

शोल्डर ब्लास्ट क्लीनिंग 82.2 105.10

टीटीआर - थ्रू टर्नआउट रीन्यूअल

टीएफआर - थ्रू फिटिंग रबर पैड लाइनर

एसईजे - स्विच एक्सपार्शन ज्वाइंट

पीएसआर - परमनेंट स्पीड रिस्ि1ट्रक्शन

काफी मिली है मदद, रिस्टि्रक्शन हटा

एनई रेलवे के कई रूट्स पर ऐसे ट्रैक हैं, जहां जिम्मेदार चाहकर भी अपनी स्पीड को बढ़ा नहीं सकते हैं। ऐसे प्लेसेस पर भी एनई रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन ने काफी वर्क किया है। इन सब जगहों से स्पीड रिस्ट्रिक्शन जो लगा हुआ था, उसे ट्रैक को बेहतर कर हटाने की कोशिश जारी है। इस सीरीज में जहां 2017-18 में 3 स्पॉट से स्पीड रिस्ट्रिक्शन हटाया गया था, वहीं साल 2018-19 में ऐसे 10 स्पॉट पर वर्क कर स्पीड रिस्ट्रिक्शन हटा दिया गया है, जिससे ट्रैक पर ट्रेन तेज रफ्तार से दौड़ने लगी हैं।

वर्जन

रेलवे ने ट्रैक को बेहतर करने के लिए काफी कदम उठाए हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल ट्रैक सेफ्टी के लिए काफी काम हुए हैं। आगे भी यह वर्क जारी रहेंगे।

- संजय यादव, सीपीआरओ, एनई रेलवे

inextlive from Gorakhpur News Desk


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