बच्चों की ऑनलाइन गेमिंग बनी पैरेंट्स के लिए मुसीबत

2019-02-05T06:00:03+05:30

- प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के ऑनलाइन गेम खेलने की आदत से परेशान पैरेंट्स

- स्कूल में पीटीएम के दौरान काउंसलर से कर रहे शिकायत

GORAKHPUR: मैम मेरा बेटा स्कूल से आते ही ऑनलाइन गेम में लग जाता है। मना करने के बाद भी नहीं मानता, बहुत परेशान कर दिया है। यह शिकायत रुस्तमपुर की रहने वाली सविता की है। सिर्फ सविता ही नहीं, सिटी के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले तमाम बच्चों के पैरेंट्स बच्चे के ऑनलाइन गेम खेलने की आदत से तंग हो पैरेंट्स टीचर मीटिंग के दौरान काउंसलर से मदद मांग रहे हैं। इन पैरेंटेस को टेंशन है कि बच्चे की ऑनलाइन गेमिंग की लत कहीं उसकी पढ़ाई ना चौपट कर दे।

सिर पर एग्जाम, बच्चा खेलता गेम

स्कूल में पैरेंट्स- टीचर्स मीटिंग में काउंसलर्स को तमाम ऐसी शिकायतें मिल रही हैं जिनमें पैरेंट्स का कहना है कि उनके बच्चो को मोबाइल फोन पर ऑनलाइन गेम खेलने की लत लग गई है। इन पैरेंट्स का कहना है कि इधर फाइनल एग्जाम्स की डेट भी डिक्लेयर हो चुकी हैं लेकिन उनका बच्चा पढ़ाई करने की जगह ऑनलाइन गेम ही खेलता रहता है। ऐसे में पैरेंट्स को बच्चों के रिजल्ट की चिंता सता रही है। बच्चों के रूटीन में शामिल ऑनलाइन गेमिंग उनके लिए सिरदर्द बन चुका है।

स्कूल से आने के बाद नहीं करते रेस्ट

काउंसलर माधवी बताती हैं कि पीटीएम के दौरान कई ऐसे पैरेंट्स ने कंप्लेंट दर्ज कराई है जो बेहद परेशान करने वाली है। ज्यादातर बच्चों के पैरेंट्स का कहना है कि उनके बच्चे स्कूल से जाने के बाद मोबाइल फोन में गेम खेलने लग जाते हैं। स्कूल से आने के बाद जहां उन्हें लंच करके थोड़ा रेस्ट करना चाहिए, वहीं वे गेम में पूरी तरह से खुद को इन्वॉल्व कर लेते हैं। पैरेंट्स के मना करने के बाद भी बच्चे कई बार अनुशासनहीनता पर उतारू हो जाते हैं। वहीं, आरपीएम रुस्तमपुर ब्रांच की प्रिंसिपल व काउंसलर डॉ। सुनीत कोहली बताती हैं कि कई पैरेंट्स ने ऐसी शिकायत की है कि मोबाइल गेम खेलने की आदत के चलते उनके बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता। इसके लिए पैरेंट्स को बच्चे को समझाने के टिप्स देने के साथ ही बच्चों की भी काउंसलिंग की जाती है।

पैरेंट्स के लिए सुझाव

- बच्चों को किसी भी तरह ऑनलाइन गेम की लत से बाहर निकालें।

- एग्जाम डेट डिक्लेयर हो जाने के कारण उसे स्कूल से आने के बाद कुछ देर फिजिकली रेस्ट करना जरूरी है।

- शाम 7 बजे से रात के 9.30 बजे तक एग्जाम प्रिपरेशन के लिए पैरेंट्स खुद पढ़ाएं।

- जितने भी क्लास वर्क कंप्लीट हो चुके हैं उन्हें रिवीजन कराएं

- मोबाइल गेम खेलने के बजाय फिजिकल गेम पर जोर दें।

- बच्चे को अकेले पढ़ाई के लिए न छोड़े। साथ में जरूर बैठें.

- शादी- पार्टी हो या फिर कहीं घूमने का मन बनाया हो तो उसे एग्जाम टाइम तक कैंसिल ही करना बेहतर होगा।

- बच्चे को रात 10 बजे तक सोने के लिए कहें।

फैक्ट फिगर

सीबीएसई स्कूल - 85

बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता वाले स्कूल - 245

सीआईएससीई स्कूल - 19

कक्षा एक से पांचवी तक बच्चों की संख्या - 56,765

कक्षा छठवीं से आठवीं तक बच्चों की संख्या - 76,345

कोट्स

बेटी मोबाइल गेम खेलती है लेकिन उस पर पूरा ध्यान रखती हूं। एग्जाम की डेट डिक्लेयर हो चुकी है इसलिए पहले से ही अटेंशन मोड में हूं।

- विनीता, पैरेंट

स्कूल से आने के बाद बेटे को गेम खेलने की आदत है, लेकिन उसे छुड़वाने की पूरी कोशिश है। एग्जाम भी सिर पर है। इस बात की टेंशन बहुत रहती है लेकिन उसे दूर कराएंगे।

गरिमा शाही, पैरेंट

वर्जन

बच्चों की इस आदत पर पैरेंट्स को ध्यान देना होगा। बच्चे को किसी भी ऑनलाइन गेम में इन्वॉल्व न होने दें। क्योंकि उसकी सेहत और दिमाग दोनों पर ही बुरा असर पड़ता है। वह अवसाद में जा सकता है। आगे चलकर पैरेंट्स के लिए दिक्कत हो सकती है।

- गौरी पांडेय, समाजशास्त्री

inextlive from Gorakhpur News Desk


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