श्रीलंका को मिला चीन की तरफ से 2050 करोड़ रुपये की मदद का प्रस्ताव ये है कारण

2018-07-24T08:45:27+05:30

चीन ने श्रीलंका को 2050 करोड़ रुपये की मदद का ऑफर दिया है। इस बात की जानकारी श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेन ने खुद दी।

कोलंबो (रॉयटर्स)। श्रीलंका पर अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए चीन ने उसे बिना शर्त 29.5 करोड़ डॉलर (करीब 2050 करोड़ रुपये) देने का प्रस्ताव रखा है। श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेन ने शनिवार को चीन की मदद से बने किडनी अस्पताल के उद्घाटन समारोह के दौरान इस बात की जानकारी दी। बता दें कि यह आस्पताल कोलंबो से 230 किलोमीटर दूर स्थित सिरीसेन के संसदीय क्षेत्र पोलोन्नारुवा शहर में बनाया गया है। सिरीसेन ने कहा, 'कुछ दिन पहले अस्पताल के उद्घाटन समारोह की तारीख फिक्स करने के लिए चीन के राजदूत मुझसे मिलने मेरे घर पर आए थे। उसी दौरान उन्होंने मुझे बताया कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने हमें 29.5 करोड़ डॉलर ऑफर किया है, जिसे हम अपनी किसी भी विकास कार्य पर खर्च कर सकते हैं।'
राजपक्षे को 72 लाख डॉलर दिए
गौरतलब है कि श्रीलंका को मदद का ऑफर ऐसे समय में मिला है, जब देश में आम चुनाव के दौरान एक चीनी कंपनी से मदद लेने के लिए पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की खूब आलोचना हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2015 में आम चुनाव के दौरान चीनी कंपनी ने राजपक्षे को 72 लाख डॉलर दिए थे लेकिन बावजूद इसके राजपक्षे उस चुनाव को जीत नहीं पाए थे।

कई परियोजना को किया बंद

बता दें कि राष्ट्रपति सिरीसेना ने अपने कार्यकाल की शुरूआत में राजपक्षे द्वारा शुरू की गई चीनी समर्थित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से अधिकांश को निलंबित कर दिया था क्योंकि उस वक्त उनपर भ्रष्टाचार और सरकारी कामों का गलत तरीके से इस्तेमाल करने का आरोप था लेकिन एक साल बाद, सिरीसेना सरकार ने उनमें से कुछ परियोजनाओं को फिर से शुरू करने की इजाजत दे दी थी।

अर्थव्यवस्था की मुश्किलों से जूझ रहे श्रीलंकाई प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे अविश्वास प्रस्ताव का करेंगे सामना

म्‍यांमार ही नहीं भारत के इन पड़ोसी देशों में चल रहा है दो समुदायों में घमासान


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.