जीएसटी विवाद लगवाएगा दिल्ली की दौड़

2019-02-01T06:00:36+05:30

- एक अप्रैल से नेशनल ट्रिब्यूनल में जीएसटी के मामलों का होगा निस्तारण

- केंद्र सरकार के नये कदम का व्यापारियों ने किया विरोध

- कहा, जीएसटी काउंसिल से बनारस में बेंच स्थापित करने का बनाएंगे दबाव

VARANASI

व्यापारियों को जीएसटी की पेंडिंग व अन्य विवादों के निस्तारण के लिए अब दिल्ली की दौड़ लगानी होगी। भविष्य में जीएसटी के मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में नहीं होगी। एक अप्रैल से राष्ट्रीय जीएसटी ट्रिब्यूनल में ही जीएसटी के विवादित मामलों का निस्तारण होगा। वहीं व्यापारियों ने सरकार के इस नये कदम का विरोध किया है। उन्होंने जीएसटी काउंसिल से बनारस में बेंच स्थापित करने का दबाव बनाने का निर्णय लिया है।

एक चेयरमैन व दो सदस्य होंगे

नये फाइनेंशियल इयर से वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी में व्यापारियों के लिए न्याय पाना कठिन होगा। एडिशनल कमिश्नर गे्रड- टू अपील के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए व्यापारियों को दिल्ली तक दौड़ लगानी पड़ेगी। बता दें कि वाणिज्यकर विभाग में सचल दल, एसआईबी और कर निर्धारण अधिकारियों द्वारा व्यापारियों के खिलाफ आदेश पारित किया जाता है। ऐसे में इस आदेश के खिलाफ व्यापारी अब तक एडिशनल कमिश्नर ग्रेड- टू (अपील) के यहां अपील करते आ रहे हैं। इनके आदेश के खिलाफ प्रथम अपील अभी तक सीधे हाईकोर्ट में करते थे, लेकिन जीएसटी काउंसिल ने राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल का गठन कर इसे एक अप्रैल से प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। इस ट्रिब्यूनल में एक चेयरमैन और दो सदस्य होंगे.

व्यापारियों से बातचीत

हर व्यापारी दिल्ली नहीं जा सकता है। इसका विरोध होगा और बनारस में ही ट्रिब्यूनल बनाने की मांग की जाएगी। जीएसटी काउंसिल के अनाब- सनाब निर्णय से व्यापारी वर्ग पहले से परेशान है। कुछ अधिकारी तो बता रहे हैं कि नेशनल ट्रिब्यूनल में विशेष तौर पर वो ही मामले निबटाए जाएंगे जो दो राज्यों से जुड़े विवाद के होंगे.

अजित सिंह बग्गा, अध्यक्ष वाराणसी व्यापार मंडल

नेशनल ट्रिब्यूनल के गठन से व्यापारियों को लाभ होगा। यहां पर सीजर के मामले तत्काल निस्तारित होंगे। अन्य मामलों में भी पक्ष- विपक्ष को आमने- सामने रखकर तत्काल उसका निस्तारण किया जाएगा। फिर भी बनारस में नेशनल ट्रिब्यूनल के बेंच की स्थापना की मांग की जाएगी.

- प्रेम मिश्रा, अध्यक्ष, महानगर उद्योग व्यापार समिति, वाराणसी

वर्जन- -

नेशनल ट्रिब्यूनल को अभी मंजूरी मिली है। अभी वर्किंग फारमेट में नहीं आया है। इसलिए अभी कुछ कहना मुश्किल है। वैसे तो स्टेट ट्रिब्यूनल का भी बेंच होगा, लेकिन इसकी घोषणा अभी नहीं हुई है। नेशनल ट्रिब्यूनल के गठन को लेकर व्यापारियों के पास सही जानकारी नहीं है।

- केके वर्मा, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड- टू

अधिवक्ताओं से बातचीत- -

व्यापारी पूरी तरह से कागजों में उलझ गया है। नेशनल ट्रिब्यूनल का गठन और परेशानी खड़ा कर सकता है। हालांकि अभी स्टेट ट्रिब्यूनल का कोई निर्णय नहीं आया है। ऐसी स्थिति में व्यापारियों को दिल्ली ही जाना पड़ेगा, जिससे उनकी दिक्कतें और बढ़ेंगी। वैसे तो आईजीएसटी और सीजीएसटी के मामलों का ही निस्तारण दिल्ली में होता है.

- मनोज श्रीवास्तव, कर अधिवक्ता

व्यापारियों की सहूलियत के लिए जीएसटी लागू किया गया है, लेकिन उनकी मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। नेशनल ट्रिब्यूनल से व्यापारियों को राहत मिलेगी, यह भविष्य की बात है। विवादों के निस्तारण के लिए दिल्ली की दौड़ लगाना व्यापारियों व वकीलों दोनों के लिए परेशानी होगी।

- अतुल पांडेय, कर अधिवक्ता

inextlive from Varanasi News Desk


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