पहले कॉपियां जांचने वालों का होना चाहिए था मूल्यांकन

2019-04-13T06:00:56+05:30

फ्लैग : आरयू ने नियमों की अनदेखी कर पीजी की कॉपियों के मूल्यांकान में लगा दिए यूजी के टीचर्स

- कई अयोग्य टीचर हैं आरयू के कर्मचारियों के सगे संबंधी, वीसी को कोई जानकारी ही नहीं

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25 मार्च से शुरू हुआ है मूल्यांकन

04 सेंटर पर चल रहा है मूल्यांकन

45 दिनों में खत्म जांचनी हैं कॉपियां

512 कॉलेज हैं आरयू से संबद्ध

4.5 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने दिया है एग्जाम

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बरेली:

आरयू में स्टूडेंट्स के फ्यूचर से जमकर खिलवाड़ किया जा रहा है। पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स की एग्जाम की कॉपियों के मूल्यांकन के लिए आरयू प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर टीचर्स का सिलेक्शन किया है। पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स की मेन एग्जाम कॉपियां अंडर ग्रेजुएट स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे टीचर्स से चेक करवाई जा रही हैं। इनमें से कुछ आरयू कर्मचारियों के सगे संबंधी भी हैं और इन्हें यूजी में पढ़ाते हुए दो साल भी नहीं हुए हैं। सगे संबंधी होने के नाते अफसरों ने कॉपियों के मूल्यांकन के लिए इनके नाम को अप्रूवल भी दे दिया। नियमों के तहत यूजी के टीचर्स पीजी की कॉपियां नहीं जांच सकते। यूजी की कॉपियां जांचने के लिए भी उन्हें यूजी में पढ़ाने का तीन साल का अनुभव होना चाहिए।

पात्रता पूरी नहीं, कर रहे मूल्यांकन

आरयू के परीक्षा भवन में सेंटर को-ऑर्डिनेटर तूलिका सक्सेना के सेंटर पर संगीता जैन और मीनाक्षी के साथ अन्य कई टीचर मूल्यांकन कर रहे हैं। संगीता जैन ने पांच वर्ष तक कन्या महाविद्यालय में बगैर अपू्रवल के यूजी के स्टूडेंट्स को पढ़ाया। इसके बाद उन्होंने अप्रूवल मिलने पर दो वर्ष तक साहू राम स्वरूप महिला महाविद्यालय में पढ़ाया। अभी वे कहीं नहीं पढ़ा रही हैं। वहीं मीनाक्षी ने शाहजहांपुर के एसएस कॉलेज में एक वर्ष तक पढ़ाया था। और एक वर्ष साहूराम स्वरूप महिला महाविद्यालय में पढ़ाया। ऐसे में इन्हें भी तीन वर्ष पढ़ाने का अनुभव नहीं है। इसके बावजूद दोनों को कॉपियों के मूल्यांकन का काम सौंप दिया गया।

क्या हैं नियम

- मेन एग्जाम की कॉपियों के मूल्यांकन में उन टीचर्स को लगाया जा सकता है, जिन्हें कम से कम तीन वर्ष यूजी या पीजी में पढ़ाने का अनुभव हो।

- साथ ही वह उसी सब्जेक्ट की कॉपियों का मूल्यांकन कर सकता है, जिसे वह पढ़ाता है।

- वहीं यूजी की क्लास लेने वाला टीचर यूजी की कॉपियों का ही मूल्यांकन कर सकता है। जबकि पीजी में पढ़ाने वाला टीचर यूजी और पीजी दोनों की कॉपियों का मूल्यांकन कर सकता है। इसके लिए आरयू से अप्रूवल लेना होता है।

री चेकिंग कराई थी ड्राइवर से

आरयू में नियमों की अनदेखी का यह पहला मामला नहीं है। पिछले दिनों स्टूडेंट्स की कॉपियों की री चेकिंग ड्राइवर से कराए जाने का मामला सामने आया था। इसको लेकर काफी हंगामा भी हुआ था।

बॉक्स : तो क्या इसीलिए फेल हुए थे स्टूडेंट

ज्ञात हो पिछले वर्ष बड़ी संख्या में आरयू के स्टूडेंट्स फेल हुए थे। फेल स्टूडेंट्स ने इसे लेकर काफी हंगामा किया था। धरना प्रदर्शन हुआ तो आरयू वीसी ने स्टूडेंट्स को चैलेंजिंग मूल्यांकन लागू करने का भरोसा दिया। चैलेंजिंग मूल्यांकन लागू होने पर करीब 450 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने अप्लाई किया। इनमें करीब 90 स्टूडेंट्स पास हो गए। इसके बावजूद उनका पूरा साल खराब हो गया क्योंकि जिस समय इन्हें पास घोषित किया गया, उस दौरान कोई कॉलेज इनका एडमिशन लेने को तैयार नहीं था।

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वर्जन

इस मामले में मुझे जानकारी नहीं है कि कॉपियों का मूल्यांकन कौन-कौन कर रहा है। परीक्षा नियंत्रक ही इस बारे में बता पाएंगे।

प्रो। अनिल शुक्ल, आरयू वीसी

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-संगीता जैन ने दो और मीनाक्षी ने एक वर्ष तक कॉलेज में पढ़ाया था। अब वह नहीं पढ़ा रही है। वह यूजी क्लास को ही पढ़ाती थी।

डॉ। राकेश अरोरा, प्रिंसिपल साहूराम स्वरूप महिला महाविद्यालय

inextlive from Bareilly News Desk


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