साइबर क्रिमिनल्स ने उड़ाए 40 करोड़

2018-10-13T06:00:43+05:30

RANCHI :इंटरस्टेट गिरोह के छह साइबर क्रिमिनल्स को नामकुम थाना क्षेत्र से अरेस्ट कर पुलिस ने जेल भेज दिया है। जेल जाने से पहले इन क्रिमिनल्स ने कई खुलासे किए हैं। बताया कि एटीएम क्लोनिंग की ट्रेनिंग बिहार के गया स्थित फतेहपुर में मिली, जिसके बाद लोगों के करीब 30 से 40 करोड़ रुपए उड़ा चुके हैं। क्रिमिनल्स से मिली जानकारी के बाद झारखंड पुलिस की एक टीम फतेहपुर जाकर छानबीन करने की तैयारी में है। जिन साइबर क्रिमिनल्स को जेल भेजा गया है उनमें फुलेश सिंह (इटखोरी, चतरा। मूल रूप से धनबाद का रहने वाला), राजन कुमार (फतेहपुर, गया), मनीष कुमार (इमलीकोठी, हजारीबाग), रत्नेश मिश्रा (मुफस्सिल, गया), नीरज कुमार उर्फ गुड्डू (बारीचटी, गया) व अमन चंद्रा उर्फ सूरज सिंह (यशवंत नगर, हजारीबाग) शामिल हैं।

1270 एटीएम कार्ड के डिटेल मिले

यूट्यूब और साइबर ट्रेनरों से ट्रेनिंग लेकर इन अपराधियों के पास से जिस कार्ड क्लोनिंग मशीन को पुलिस ने जब्त किया है, उस डिवाइस में 1270 एटीएम कार्ड के ब्योरे मिले हैं। ये अपराधी एसबीआइ के एटीएम को ही सबसे ज्यादा शिकार बनाए हैं, क्योंकि यह उनके लिए बेहद आसान है। पूछताछ में साइबर अपराधियों ने बताया है कि किसी भी एटीएम मशीन में लगे कैमरे में चेहरे स्पष्ट रूप से कैद नहीं होते हैं, जिसका उन्हें फायदा मिलता रहा है।

इन एटीएम में लगा चुके हैं क्लोनिंग डिवाइस

चुटिया थाना के सामने, सदाबहार चौक नामकुम, हटिया रेलवे स्टेशन के पास, पंडरा बाजार के समीप, बूटी मोड़, हजारीबाग के आधा दर्जन एटीएम, खूंटी के कई एटीएम व बिहार के गया के कई एटीएम में, ओडि़शा के एटीएम में।

कार्ड डालने वाले स्थान पर ही डिवाइस सेट

जेल जाने से पूर्व साइबर अपराधियों ने बताया है कि एटीएम मशीन में जहां कार्ड डाला जाता है, वहीं पर ये अपना क्लोनिंग डिवाइस लगा देते हैं, जिसमें एटीएम का उपयोग करने वाले का डाटा फीड हो जाता है।

साफ्टवेयर इंजीनियर रत्नेश है गिरोह का मास्टरमाइंड

गिरफ्तार साइबर अपराधी गया निवासी रत्नेश मिश्रा गिरोह का मास्टर माइंड है। वह साफ्टवेयर इंजीनियर है। गैंग के दूसरे साइबर अपराधी मनीष कुमार का काम किसी भी एटीएम में डिवाइस को लगाना था। वहीं, राजन कुमार का काम एटीएम में घुसने वाले लोगों का पिन देखना था। पैसा निकालने की जिम्मेदारी नीरज उर्फ गुडडू और अमन चंद्रा उर्फ सूरज की थी। कार्ड की क्लोनिंग साफ्टवेयर इंजीनियर रत्नेश ही करता था.

ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों से कंप्लेन करेगी पुलिस

जिस डिवाइस के जरिए एटीएम की क्लोनिंग होती है, वो ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी ईबेय, इंडिया मार्ट व अलीबाबा पर अवेलेबल है। यहां कार्ड तैयार करने वाला डिवाइस 30 हजार रुपए व क्लोन करने वाला डिवाइस आठ से 16 हजार रुपए तक में उपलब्ध है। ऑनलाइन शॉपिंग पर उपलब्ध इन उपकरणों की खरीद- बिक्री रोकने को लेकर झारखंड पुलिस जल्द ही ऑनलाइन मार्केटिंग करने वाली कंपनियों को लेटर लिखेगी, ताकि यह उपकरण अपराधियों के हाथ न लग सके।

ईडी से जांच की हो सकती है अनुशंसा

गिरफ्तार साइबर अपराधियों ने पूछताछ में एटीएम क्लोन कर करीब डेढ़ करोड़ रुपए निकालने की बात ही स्वीकारी है। हालांकि, जब उनसे गंभीरता से पूछताछ की गई है तो उसके अनुसार अनुमान लगाया जा रहा है कि जालसाजी की रकम 30 से 40 करोड़ रुपए होगी। जालसाजी के रुपए का कहां निवेश किया, इसका भी पता लगाया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय की मदद ली जाएगी। प्रारंभिक पूछताछ में सिर्फ एक अपराधी नीरज कुमार उर्फ गुडडू का गया में पांच पोल्ट्री फार्म होने की जानकारी मिली है, जो साइबर अपराध के पैसे से खुले हैं।

2009 में जेल जा चुके हैं नीरज व रत्नेश

साइबर अपराध के मामले में ही नीरज व रत्नेश वर्ष 2009 में जेल जा चुके हैं। इनमें रत्नेश मिश्रा जहानाबाद से व नीरज उर्फ गुड्डू गया से जेल गए थे। जेल से छूटने के बाद ही इनलोगों ने एक गैंग बना लिया था, जिसके बाद अपराध शुरू कर दिया था।

inextlive from Ranchi News Desk


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