जो रखेगा सेहत का ख्याल उसी की बनाएंगे सरकार

2019-03-15T06:00:34+05:30

RANCHI: मिलेनियल्स स्पीक के तहत गुरुवार को रिम्स के राजेंद्र पार्क में दैनिक जागरण आईनेक्स्ट की ओर से राजनी-टी का आयोजन किया गया। जहां सोशल एक्टिविस्ट और पारा मेडिकल स्टूडेंट्स ने हेल्थ सिस्टम पर अपनी बात रखी। साथ ही कहा कि जिस दिन हमारी सरकार हेल्थ सिस्टम को दुरुस्त कर देगी उस दिन हर गरीब का इलाज हो जाएगा और डॉक्टर-टेक्निशियन भी काम करने से पीछे नहीं हटेंगे। इसलिए हेल्थ सेक्टर को मजबूत बनाने के दावे करने वालों को इस बार चुनाव में इस मुद्दे को लाना होगा कि वे इसे बेहतर बनाने के लिए क्या करेंगे? शुरुआत रेडियो सिटी की आरजे वर्तिका के सवालों के साथ हुई। दैनिक जागरण आईनेक्स्ट, रेडियो सिटी और सतमोला प्रेजेंट्स राजनी-टी में मिलेनियल्स ने हेल्थ सिस्टम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हेल्थ से बड़ा कोई धन नहीं है। यह बातें केवल कागजों पर ही दिखाई देती हैं। लेकिन सच्चाई हकीकत से कोसों दूर है। यही वजह है कि आज हमारे स्टेट में जरूरतमंदों को हॉस्पिटल में जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वहीं डॉक्टरों और टेक्निशियन की कमी का खामियाजा हमारे स्टेट के मरीज भुगत रहे हैं। इतन ही नहीं, प्रॉपर मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं होने के कारण दलालों का भी कब्जा है। इससे उन्हें काफी दिक्कत हो रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां एक हजार लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए वहां 5000 पेशेंट्स पर एक डॉक्टर है। इसलिए हेल्थ सेक्टर में सुधार की जरूरत है। चूंकि सरकार लोगों को बेहतर हेल्थ सर्विस देने के लिए लाखों-करोड़ों खर्च कर रही है। लेकिन ग्राउंड लेवल पर इसका रिजल्ट नहीं दिख रहा।

मैनपावर की कमी

सरकारी हॉस्पिटलों में भी मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकता है। लेकिन इसके लिए सरकार से लेकर हॉसिप्टल प्रबंधन को भी नींद से जागने की जरूरत है। और यह समस्या तभी दूर हो सकती है जब मैनपावर की कमी को दूर कर लिया जाए। वैकेंसी निकालने पर रिजर्वेशन को भी लागू किए जाने की जरूरत है ताकि मेडिकोज और टेक्निशियंस को प्राथमिकता मिले। इससे मैनपावर की समस्या दूर करने में दिक्कत नहीं आएगी। वहीं मरीजों का बेहतर ढंग से ध्यान रखा जा सकेगा।

मिलेनियल्स की राय

हेल्थ सेक्टर में अगर कुछ जरूरी है तो वह डॉक्टर की कमी को दूर करना है। अगर डॉक्टर होंगे तो मरीजों की प्रॉपर केयर होगी। साथ ही वे जल्दी ठीक भी हो जाएंगे। वहीं सरकार वैकेंसी निकालकर टेक्निकल स्टाफ्स की बहाली करें। जिससे कि मरीजों को इलाज के साथ टेस्ट के लिए भी दौड़ न लगानी पड़े। इतना ही नहीं, टेक्निकल स्टाफ्स के लिए मेडिकल कॉलेज से पास आउट होने वालों को प्रायोरिटी दी जानी चाहिए।

दानिश

किसी भी स्टेट में सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल होते हैं। लेकिन मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा सरकारी हॉस्पिटलों में है। लेकिन डॉक्टर की कमी है और टेक्निशियन भी नहीं के बराबर हैं। इसी का फायदा उठाकर दलाल मरीजों को अपना निशाना बनाते हैं, जिसपर सरकार को सोचने की जरूरत है। प्रापर मॉनिटरिंग के लिए एक सिस्टम बनाना चाहिए, ताकि मरीज इलाज कराकर घर लौट सकें।

ममता

हेल्थ सिस्टम को दुरुस्त करने की जिम्मेवारी डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ्स के कंधों पर होती है। लेकिन उन्हें सिक्योरिटी और जरूरी सुविधाएं भी देने की जरूरत है। इसलिए मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करना होगा। जब दूसरे स्टेट में यह लागू हो सकता है तो हमारे राज्य में क्यों नहीं। अगर यह लागू हो जाता है तो हमलोग खुलकर काम कर सकेंगे। वहीं मरीजों को भी बेहतर सर्विस मिलेगी।

मिथिलेश पंडा

इलाज के लिए मरीजों को गंभीर स्थिति में लाया जाता है। लेकिन सुरक्षा नहीं होने के कारण उन्हें हाथ लगाने से भी डॉक्टर और टेक्निशियन कतराते हैं। इस चक्कर में मरीज की स्थिति खराब हो जाती है। अगर मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो जाए तो हमलोग बेफिक्र होकर मरीजों को सर्विस दे सकते हैं। इसलिए हर हाल में इसे लागू होना चाहिए। तभी हमारा हेल्थ सिस्टम दुरुस्त हो पाएगा।

शालिनी मिश्रा

देश में नकली दवाओं का कारोबार भी चल रहा है। इसका खामियाजा कहीं न कहीं मरीज भुगतते हैं। इसलिए सरकार को कंपनियों की मॉनिटरिंग करनी चाहिए, वहीं ऐसी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई कर उन्हें बंद करने की जरूरत है। रेगुलर मॉनिटरिंग के लिए ड्रग कंट्रोलरों को बहाल करने की जरूरत है, जिससे कि लोगों को राहत मिल सके।

गुडि़या कुमारी

डॉक्टर के बिना हेल्थ सेक्टर में सुधार नहीं हो सकता। इसलिए सरकार अधिक से अधिक डॉक्टर बहाल करें तभी सिस्टम सुधरेगा। डॉक्टर होंगे तभी तो मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा। वहीं पब्लिक को भी जागरूक होना होगा कि डॉक्टर के साथ मिसबिहेव न करें। तभी डॉक्टर फ्री होकर मरीज का इलाज करेगा।

आशिया

गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स में आए दिन मशीनों के खराब होने की बातें सामने आती हैं। इस वजह से मरीजों को प्राइवेट सेंटरों में दौड़ लगानी पड़ती है। वहीं, मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर दलाल उन्हें निशाना बना लेते हैं, इसलिए सरकार ऐसी व्यवस्था करे, ताकि मशीनों को तत्काल दुरुस्त कराया जा सके।

विकेश

मेरी बात

हमारे यहां मेडिकल कॉलेज को लेकर तो सरकार और प्रबंधन ध्यान देते हैं, लेकिन पारामेडिकल कॉलेज की स्थिति आजतक नहीं सुधर पाई है। हजारों स्टूडेंट्स पास आउट होकर निकल गए। इसके बाद भी उन्हें वैल्यू नहीं दी जाती। चूंकि बिल्डिंग तो हैेडओवर ले लिया गया, पर वहां न फैकल्टी है और न ही फैसिलिटी। आखिर हमलोगों को कब बेहतर सुविधा मिलेगी। तभी तो हमलोग एक्सपर्ट बनकर मरीजों को अच्छी सर्विस दे सकेंगे।

लक्ष्मी कुमारी

कड़क मुद्दा

सरकार ने हाल ही में आयुष्मान योजना को लांच किया है ताकि हर कोई बेहतर इलाज करा सके। लेकिन यह योजना अब भी धरातल पर नहीं उतरी है। लोगों तक इस योजना को पहुंचाने के लिए सरकार को ग्राउंड लेवल पर काम करना होगा। चूंकि एक बड़ा तबका इसका लाभ लेने से छूट रहा है। इसके लिए सरकार को डिस्ट्रिक्ट से लेकर ब्लाक और पंचायत लेवल तक प्रचार-प्रसार करना होगा। इसके अलावा ब्लड की उपलब्धता को लेकर काम करने की जरूरत है ताकि लोगों को इसके लिए भटकना न पड़े।

मंगेश झा

सतमोला खाओ, कुछ भी पचाओ

सरकार हॉस्पिटलों में फैसिलिटी देने की बात करती है। लेकिन गवर्नमेंट हॉस्पिटलों में आज भी स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हो पाया है। भीड़ होने के कारण मरीजों को न तो प्रॉपर ट्रीटमेंट मिलती है और न ही उन्हें कोई सुविधा मिल पाती है। वहीं आज भी कई हॉस्पिटलों की स्थिति ऐसी है कि जहां मरीजों का ढंग से इलाज भी नहीं हो पाता। इतना ही नहीं, मरीजों को एक बेड भी हॉस्पिटल में उपलब्ध नहीं कराया जाता है।

inextlive from Ranchi News Desk


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