विंटेज कारों से इंजीनियरिंग सीख रहे हैं डीईआई के स्टूडेंट्स

2019-06-19T06:00:56+05:30

- डीईआई के ऑटोमोबाइल विभाग में विंटेज कार में प्रशिक्षण ले रहे स्टूडेंट्स

- सभी विंटेज कार चलती हालत में

आगरा। यूं तो आगरा ऐतिहासिक शहर है। विश्व विख्यात इमारतों के साथ ही यहां कुछ ऐसी भी चीजों की खान है, जो कि आजादी के समय के पहले की है। जी हां हम बात कर रहे है विंटेज कारों की। बात लग्जरी कार की हो या फिर विंटेज। कार के शौकीन लोगों के लिए विंटेज एक आकर्षण का केन्द्र रहती है। दयालबाग शिक्षण संस्थान का ऑटोमोबाइल डिर्पाटमेंट ऐसी कारों को सहेजने का काम कर रहा है। कारों को सहेजने के साथ ही विभाग में पढ़ रहे स्टूडेंट्स को पुरानी टेक्नोलॉजी से रूबरू भी कराया जा रहा है। खास बात यह है कि सभी विंटेज कार चलती हालत में है। जब इन कारों को स्टूडेंट्स सड़कों पर दौड़ाते हैं, तो हर किसी की नजर इन कारों पर टिक जाती है। डीईआई के ऑटोमोबाइल विभाग में करीब चार से अधक विंटेज कारें मौजूद हैं, जो डीईआई की शोभा बढ़ा रही है।

स्टूडेंट्स होते हैं हर तकनीकि से रूबरू

डीइआई के ऑटोमोबाइल विभाग में ब्वॉयज एंड ग‌र्ल्स दोनों स्टूडेंट्स हैं। कार की तकनीकि से लेकर इंजन को बनाना एवं उसके रखरखाव की ट्रेंनिंग विभाग के प्रोफेसरों द्वारा स्टूडेंट्स को दी जाती है। विभाग के लेक्चरर नीरज सत्संगी ने बताया कि स्टूडेंट्स पुराने इंजनों के साथ ही नए मॉडल की आ रही कारों पर भी रिसर्च कर रहे हैं। पुरानी टेक्नोलॉजी से रूबरू होकर स्टूडेंट्स का ज्ञान और बढ़ रहा है। इसके साथ ही विभाग में यमाहा, टीवीएस, मारुति सुजूकी, महिन्द्रा आदि कंपनियों ने अपने ट्रेनिंग सेंटर बना रखे है। जो स्टूडेंट्स को कार टेक्नोलॉजी के प्रति गहरी नॉलेज दे रहे है।

डीईआई के ऑटोमोबाइल कलेक्शन में शामिल स्टूडेबेकर कार वर्ष 1934 की है। यूपीए 611 नंबर की यह विंटेज कार आजादी से पहले की है। इस कार का प्रयोग डीईआई टेक्निकल कॉलेज के फाउंडर आनंद स्वरूप किया करते थे। यह कार छह सिलेंडर और पेट्रोल इंजन की है। इस कार का आकर्षण इसके पहिए है। पहियों में साइकिल की तरह तीलियों वाली रिम लगी हुई है।

ऑटोमोबाइल डिर्पाटमेंट में खड़ी विंटेज कारों में डिजाइन की अगर बात की जाए तो वर्ष 1936 की ब्यूक कार सबसे ज्यादा स्टाइलिश और खूबसूरत है। ब्राउन कलर की कार का नंबर भी उसकी तरह यूनिक है। गाड़ी नंबर यूपीए 612 ब्यूक कार में आठ सिलेंडर है। इस कार में उस समय चार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी एवं पेट्रोल से इसे चलाया जाता था। आज इस कार को शान से डीईआई के स्टूडेंट्स दौड़ाते है।

विंटेज कारों की लिस्ट में डीईआई के ऑटोमोबाइल में क्रीम कलर कार उस गोल्डेन टाइम की याद दिलाती है। वर्ष 1936 की शेवर्ले कार आज भी दूधिया सी चमक देती है। गाड़ी नंबर यूपीए21 को स्टूडेंट्स डीईआई के परिसर में जब दौड़ाते हैं, तब अन्य विभागों के लोग भी इसे एक नजर देखने से नहीं छूटते। विभाग के प्रोफेसर बताते हैं कि इस कार का प्रयोग टेक्निकल कॉलेज मैनेजिंग कमेटी के फाउंडर प्रेसीडेंट राय साहिब गुरूचरन दास मेहता साहब इसका प्रयोग किया करते थे। इस गाड़ी में छह सिलेंडर इंजन का प्रयोग किया गया है। 26 हार्स पावर की यह गाड़ी पेट्रोल से चलती है।

हर किसी के दिल की अजीज अंबेस्डर कार का हर कोई दीवाना है। उस समय शाही परिवार के लोग इस कार में सवारी किया करते थे। डीईआई के ऑटोमोबाइल डिपार्टमेंट में ब्लू कलर की चमचमाती अंबेस्डर कार को भी शामिल किया गया है। इस गाड़ी का नंबर यूएसक्यू 8434 है। वर्ष 1960 का यह मॉडल कारों के शाही पन से स्टूडेंट्स को रूबरू कराता है। लड़कों के साथ ही लड़कियां भी इस गाड़ी के प्रति काफी आकर्षित हैं। डिपार्टमेंट के नीरज सत्संगी ने बताया कि ब्लू कलर की अंबेस्डर गाड़ी का प्रयोग डीईआई के फाउंडर डायरेक्टर डॉक्टर मुकुंद बिहारी लाल साहब किया करते थे।

inextlive from Agra News Desk


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