प्रयागराज कुंभ 2019 भीड़ को मैनेज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेजीलेंस फेल लोगों लगाते रहे चक्कर

2019-01-22T09:13:59+05:30

स्नानार्थियों को चार किलोमीटर पैदल चलने को किया गया मजबूर

पौष पूर्णिमा पर भीड़ कम होने के बावजूद नियमों में नहीं दी गई ढील

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PRAYAGRAJ: इलाहाबाद जंक्शन पर शहर में चारों तरफ से कब, कहां और कितनी भीड़ आ रही है? इसका डाटाबेस तैयार करने के लिए चारों तरफ कैमरों का जाल फैला दिया गया है। मेला से लेकर जंक्शन तक यह सीन है। आईबीएम ने इस प्लान को डेवलप किया है ताकि क्राउड के अनुसार जंक्शन पर मैनेजमेंट प्लान किया जा सके। लेकिन, इतना तामझाम खड़ा करन के बाद भी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल कब और कैसे होगा? इसका कोई प्लान नहीं है। कम से कम पौष पूर्णिमा स्नान के दिन तो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के डाटा का कोई यूज नहीं दिखा। स्मार्ट प्लानिंग होती तो पब्लिक को बिना वजह तीन से चार किलोमीटर का चक्कर न लगाना पड़ता।

सबकुछ जवानों के हवाले
इलाहाबाद जंक्शन पर प्रमुख स्नान पर्वो के एक दिन पहले व एक दिन बाद तक केवल सिटी साइड से ही पैसेंजर्स की इंट्री और सिविल लाइंस साइड से निकासी व्यवस्था है। जीआरपी, आरपीएफ व आरपीएसएफ के जवानों के साथ ही पैरा मिलिट्री के जवान लगाए गए हैं। अनारक्षित टिकट लेकर यात्रा करने वाले पैसेंजर यात्री विश्राम हॉल से होकर ही प्लेटफार्म पर पहुंच सकते हैं। जंक्शन पर इंट्री के बाद किधर जाना है, किधर नहीं, यह भी जवानों द्वारा तय किया जा रहा है।

नहीं बनाया कोई प्लान बी
ये तो हो गया रेलवे का प्लान ए यानी स्नान पर्व पर भीड़ होने पर रेलवे द्वारा इस तरह की व्यवस्था को फॉलो किया जाना है। लेकिन जंक्शन पर भीड़ कम हो, सड़कों पर पैसेंजर्स का प्रेशर न हो तो क्या करना है? कितनी सख्ती करनी है और कितनी छूट देनी है, इसकी व्यवस्था के लिए रेलवे अधिकारियों ने कोई प्लान बी तैयार नहीं किया।

रियलिटी चेक में सामने आयी हकीकत
सोमवार को पौष पूर्णिमा स्नान के दिन दैनिक जागरण आईनेक्स्ट रिपोर्टर ने इलाहाबाद जंक्शन का सिविल लाइंस साइड से रियलिटी चेक किया। इस दौरान हमने जो देखा वह पब्लिक को परेशान करने वाला सीन था।

स्थान- सिविल लाइंस साइड

समय- दोपहर 01.00 बजे

स्नान पर्व पर सिविल लाइंस साइड से जंक्शन पर इंट्री नहीं होगी, ये आदेश जारी होने के बाद भी बहुत से पैसेंजर ट्रेन पकड़ने के लिए सिविल लाइंस साइड पहुंचे। उन्हें इंट्री नहीं दी गई और जंक्शन की तरफ पैदल भेज दिया गया।

रेलवे स्टेशन सर्कुलेटिंग एरिया सिविल लाइंस साइड

दोपहर- 01.15 बजे

रेलवे स्टेशन के सिविल लाइंस साइड सर्कुलेटिंग एरिया में सन्नाटा था। पूरा एरिया खाली पड़ा हुआ था। इक्का-दुक्का ही लोग दिखाई दे रहे थे। पैसेंजर्स से कई गुना अधिक तो सुरक्षाकर्मी ही नजर आ रहे थे।

प्लेटफार्म, एफओबी सब खाली

दोपहर 02.00 बजे

रिपोर्टर सिविल लाइंस साइड से जब एफओबी पर पहुंचा तो प्लेटफार्म दस से लेकर प्लेटफार्म 2-3 तक बस सन्नाटा ही सन्नाटा दिखाई दिया। कुछ लोग ही दिखाई दिए। पूरा एरिया खाली नजर आया।

ऐसे काम करती है आईबीएम वीडियो एनालिटिक्स सर्विस

कई कैमरों से लिए गए वीडियो में से फोटो और जरूरी जानकारी खोजने के लिए एडवांस्ड सर्च, रिडक्शन और फेशियल रिकग्निशन का उपयोग किया जा सकता है।

किसी अपराधी, वीआईपी जैसे लोगों की फोटो एड कर वॉच लिस्ट बना सकते हैं, ताकि कैमरा इनको पहचान सके।

आयु, लिंग, चेहरे का रंग, बालों का रंग, कपड़ों का रंग और पैटर्न के आधार पर कई कैमरों में से सही रिजल्ट निकाला जा सकता है।

कोई ऑब्जेक्ट तय पैटर्न से अलग मूवमेंट करता है तो लाइव-स्ट्रीमिंग फिक्स्ड कैमरा से उसका तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।

वीडियो इमेज को डेटा में बदल देता है, जिससे वीडियो मॉनिटरिंग करना आसान हो जाता है।


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