डायलिसिस के दलालों के कब्जे में रिम्स

2019-04-18T06:00:53+05:30

RANCHI: रिम्स में मरीजों को बेहतर हेल्थ सर्विस उपलब्ध कराने वाली सरकार के दावों की पोल खुल गई है। वहीं प्रबंधन भी कैंपस में दलालों पर रोक लगाने में नाकाम साबित हो रहा है। यही वजह है कि रिम्स एकबार फिर दलालों के चंगुल में है। जहां ये लोग मरीजों को निशाना बना रहे हैं। कुछ ऐसा ही नजारा डायलिसिस सेंटर के बाहर देखने को मिल रहा है, जहां मरीज के पहुंचते ही दलाल किट लेकर हाजिर हो जा रहा है। इसके लिए मरीजों के परिजनों को 11-12 सौ रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। जबकि रिम्स में मरीजों का डायलिसिस फ्री में किया जाता है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि नर्स और स्टाफ्स की मिलीभगत से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को लूटने का काम जारी है।

जानकारी नहीं होने का उठा रहे फायदा

हॉस्पिटल में इलाज के लिए हर दिन हजारों मरीज आते है। जिसमें से दर्जनों मरीज को डायलिसिस की सलाह दी जाती है। वहीं इमरजेंसी में भी यह बोर्ड लगा है कि यहां पर मरीजों का डायलिसिस फ्री में किया जाता है। साथ ही मरीजों को डायलिसिस की पूरी किट भी उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन बाहर से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को इसकी जानकारी नहीं होने का फायदा दलाल उठाते है। वहीं स्टाफ्स और नर्स भी इसकी सही जानकारी परिजनों को नहीं देते। जिससे कि उनके पास किट के लिए पैसे चुकाने के अलावा कोई चारा नहीं होता। आखिर पेशेंट का इलाज उनकी प्राथमिकता होती है।

डेली दो दर्जन मरीज डायलिसिस के

किडनी के मरीजों को इलाज के लिए रिम्स में लाया जाता है। इसके बाद संबंधित डॉक्टर की निगरानी में उन्हें डायलिसिस के लिए भेज दिया जाता है। ऐसे में सुबह से रात तक एक शिफ्ट में चार मरीजों की डायलिसिस की जाती है। इसमें तीन-चार घंटे का समय लगता है। हालांकि कई मरीजों का डायलिसिस तीन घंटे में भी पूरा हो जाता है। ऐसे में दो दर्जन मरीज हर दिन डायलिसिस कराकर जाते हैं।

डीजे आईनेक्स्ट की खबर पर जागा था प्रबंधन

दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने पहले भी डायलिसिस के नाम पर लूटने वाले दलाल की खबर को प्रमुखता से छापा था। इसके बाद प्रबंधन ने सुपरिंटेंडेंट को मामले की जांच करने का आदेश दिया था। काफी दिनों तक दलालों की एंट्री पर रोक लग गई थी। वहीं एक-दो बार दलालों को रंगे हाथ पकड़ा भी गया। लेकिन कठोर कार्रवाई नहीं किए जाने से एक बार फिर दलालों का मन बढ़ गया है। यही वजह है कि ये लोग खुले आम रिम्स में मरीजों को निशाना बनाकर बंपर कमाई कर रहे हैं। इसमें स्टाफ्स से लेकर बड़े अधिकारियों का भी हिस्सा तय है।

डायलिसिस सेंटर में ड्यूटी नर्स से सीधी बातचीत

डीजे आईनेक्स्ट : मैडम, मरीज वार्ड में एडमिट है डायलिसिस कराना है?

जवाब : डॉक्टर साहब से बात करके ले आइए एक घंटे में।

डीजे आईनेक्स्ट : डायलिसिस कराने का कितना खर्च लगेगा?

जवाब : वो तो डॉक्टर साहब लिखकर देंगे। हमारे पास तो आधा सामान होता है।

डीजे आईनेक्स्ट : बाकी का सामान कहां से लेना होगा और कितना खर्च आएगा?

जवाब : जब मरीज को लेकर आएंगे तो बता दिया जाएगा। वैसे 1100-1200 रुपए देने होंगे।

दलाल से डीजे आईनेक्स्ट की सीधी बात

डीजे आईनेक्स्ट : सर, मेरे पेशेंट का डायलिसिस कराना है कैसे होगा?

जवाब : हो जाएगा, किस डॉक्टर की यूनिट में एडमिट है और क्या नाम है।

डीजे आईनेक्स्ट : डॉक्टर साहब किट के लिए बोले हैं तो कैसे मिलेगा?

जवाब : आप इमरजेंसी के पास रहिए हम वहीं किट लेकर आते हैं।

डीजे आईनेक्स्ट : किट के लिए कितना चार्ज देना होगा, सर?

जवाब : हम आते हैं तो बता देंगे, वैसे 1200 रुपए में हो जाएगा।

inextlive from Ranchi News Desk


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